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वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ना उपलब्धि

रिपोर्ट के मुताबिक, 2015 में करीब 500 बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बीच किए गए सर्वे में 60 फीसदी कंपनियां भारत में निवेश के लिए तैयार।

वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ना उपलब्धि

निवेश के नजरिये से विश्व के श्रेष्ठ तीन पसंदीदा देशों में भारत का शुमार होना निश्चित ही मोदी सरकार की नीतिगत उपलब्धि है। यह देश के आर्थिक सेंटिमेंट के लिए बेहद सकारात्मक है।

चीनी थिंकटैंक इनबाउंड की रिपोर्ट के मुताबिक 2015 में करीब 500 बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बीच किए गए सर्वे में यह देखा गया कि 60 प्रतिशत कंपनियां भारत को निवेश के नजरिए से प्रमुख तीन देशों में मान रही है।

इसका एक बड़ा कारण भारत में विशाल घरेलू बाजार, सस्ते श्रम और कुशल श्रम बाजार है। वाकई ये तीनों चीज इस समय भारत की ताकत है। चीनी सरकारी मीडिया ने भारत के दुनिया में सबसे आकर्षक निवेश गंतव्य देश के रूप में उभरने को लेकर अपने देश को चेताया भी है कि चीन को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। चीनी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने आंकड़े के साथ चीन को आईना दिखाया है कि कैसे भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है।

पिछले दो-तीन सालों में भारत में चीनी कंपनियों का निवेश बढ़ा है। वीवो, रेडमी, ओपो, ह्यूवेई और लेनोवो जैसे स्मार्टफोन भारत में अपना अच्छा बाजार बना चुके हैं। मोबाइल टूल्स जैसे शेयर इट, यूसी ब्रॉउजर, चीता मोबाइल, आपुस के भी भारत में बड़ी संख्या में यूजर्स बन गए हैं।

सच में कहा जाय तो चीन जहां अपनी सारी कूटनीति भारत को रोकने या परेशान करने में झोंक रहा है, वहीं भारत चुपचाप चीनी कंपनियों को शानदार अवसर उपलब्ध करा रहा है। केवल चीनी कंपनियां ही नहीं, यूरोपीय, अमेरिकी, जापानी, कोरियाई व ऑस्ट्रेलियाई कंपनियां भी भारत में निवेश कर रही हैं।

हमेशा यूरोप व अमेरिका पर भरोसा करने वाली सऊदी व यूएई कंपनियां भी भारत की ओर रुख कर रही हैं। ग्लोबल कंपनियों का अचानक भारत पर भरोसा नहीं बढ़ा है। इसके पीछे पीएम नरेंद्र मोदी की सुनियोजित नीति काम कर रही है। देश में इन्वेस्टर फ्रेंडली माहौल बनाया है।

विदेशी निवेश के नियमों को आसान बनाया है। अधिकांश क्षेत्र को एफडीआई के लिए खोला है। कई तरह के टैक्स सुधार किए हैं। बुनियादी ढांचा क्षेत्र, स्मार्ट सिटी, हाई स्पीड ट्रेन, नए एयरपोर्ट निर्माण, सोलर एनर्जी, सैटेलाइट लांचिंग आदि क्षेत्रों में मोदी सरकार ने बड़े देशी-विदेशी निवेश की योजना बनाई है।

सरकार अप्रत्यक्ष कर सुधार में गेमचेंजर जीएसटी लागू करने जा रही है। भारत के सौर ऊर्जा विकास से चीनी मीडिया इतना स्तब्ध है कि उसे लग रहा है कि सोलर इकॉनोमी में भारत जल्द ग्लोबल लीडर बनेगा।

खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले ढाई साल में लगभग सभी प्रमुख देशों की यात्रा कर वहां के निवेशकों को भारत आने के लिए आमंत्रित किया है। मोदी ने अपनी कूटनीति से विश्व को साफ संदेश दिया है कि भारत सभी के साथ मित्रवत संबंध चाहता है और पड़ोसियों के साथ भी शांति चाहता है।

आज ही पीएम श्रीलंका गए हैं। बाद में रूस, इजराइल भी जाएंगे। एक और प्रमुख कारण है कि विश्व में जहां अमेरिका संरक्षणवाद की राग अलाप रहा है, चीन आर्थिक सुस्ती के दौर से गुजर रहा है, जापान विकास दर की स्थिरता से जूझ रहा है, वहीं भारत आर्थिक उदारीकरण की नीति के साथ मजबूती से खड़ा है और सात फीसदी की दर से ग्रोथ कर रहा है।

सेंसेक्स भी 30 हजार अंक से ऊपर कीर्तिमान रच रहा है। एशिया व प्रशांत क्षेत्र के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (इस्केप) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत की वृद्धि दर 2017 में 7.1 प्रतिशत रहेगी जबकि 2018 में 7.5 प्रतिशत।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अप्रैल में कहा था कि जीडीपी दर 2017-18 में 7.2 प्रतिशत रहेगी जबकि अगले वित्त वर्ष में 7.7 प्रतिशत। एशियाई विकास बैंक ने कहा है कि वर्ष 2017-18 में जीडीपी दर 7.4 प्रतिशत रहेगी और अगले वित्त वर्ष में 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

ये तमाम कारण हैं, जिससे वैश्विक निवेशकों का भरोसा लगातार भारत पर बढ़ता जा रहा है। अब मोदी सरकार को चाहिए कि तेजी से सुधारात्मक फैसले लेकर वह देश में इस सकारात्मक आर्थिक मोमेंटम को बनाए रखे।

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