Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

गौरीशंकर राजहंस का लेख : देशहित में जापान से दोस्ती

न की हरकतों से जापान और भारत दोनों परेशान हैं इसलिए दोनों ने मिलकर एक सैन्य संधि की है जिसके अनुसार दोनों देशों की सेनाएं एक दूसरे के सभी सैनिक अड्डों का युद्व की स्थिति में उपयोग कर सकेंगे। गुरूवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे ने करीब आधे घंटे तक फोन पर बात की जिसमें इस सैनिक समझौते के महत्व पर चर्चा हुई।

गौरीशंकर राजहंस का लेख :  देशहित में जापान  से दोस्ती
X

गौरीशंकर राजहंस

जैसा कि ज्ञातव्य है भारत और चीन के बीच तनातनी बहुत बढ़ गई है। चीन ने पैंगोंग झील के उत्तरी छोर पर अपना सैन्य बल बढ़ा लिया है और लाचार होकर भारत ने भी दक्षिणी पैंगोंग में बहुत बड़े पैमाने पर अपनी सैन्य टुकड़िया तैनात कर दी हैं। सेना के जवान बहुत बड़ी संख्या में तैनात कर दिए हैं। दिन-रात बोफोर्स तोप तैनात किए जा रहे हैं और जब से भारत को राफेल लड़ाकू विमान प्राप्त हुए हैं तब से भारत का मनोबल बहुत बढ़ गया है और भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डंके की चोट पर कहा है कि अब हमारी सैन्य ताकत बहुत बढ़ गई है और हम किसी भी हालत में भारत की एक ईंच जमीन भी किसी को हड़पने नहीं देंगे।

इस बीच एक अच्छी खबर आई है कि भारत और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में यह प्रसिद्व कहावत है कि दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है। चीन की हरकतों से जापान और भारत दोनों परेशान हैं इसलिए दोनों ने मिलकर एक सैन्य संधि की है जिसके अनुसार दोनों देशों की सेनाएं एक दूसरे के सभी सैनिक अड्डों का युद्व की स्थिति में उपयोग कर सकेंगे। गुरूवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे ने करीब आधे घंटे तक फोन पर बात की जिसमें इस सैनिक समझौते के महत्व पर चर्चा हुई।

शिंजो अबे का कहना है कि अपना पद छोड़ने के पहले वे भारत और जापान के समारिक रिश्तों को नई उंचाई तक ले जाएंगे। चीन के आक्रामक रवैये को देखते हुए उन्होंने कहा कि जापान के साथ एक मजबूत गठबंधन की जरूरत समय का तकाजा था। चीन के साथ जो तनातनी चल रही है उसे देखते हुए इस समझौते का बहुत अधिक महत्व है। इस समझौते के अंतर्गत भारत और जापान दोनों देशेां की सेनाएं और सैनिक साजो सामान एक दूसरे के सैनिक अड्डों पर आसानी से तैनात किए जा सकेंगे। पहले भी ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, अमेरिका और सिंगापुर से भारत ने ऐसा समझौता किया है। इस सैन्य समझौते का अर्थ है कि युद्व की स्थिति में ये सभी देश भारत के साथ खड़े होंगे और यदि चीन ने आंख दिखाई तो ये सभी देश चीन को घेर लेंगे। भारत की तरफ से कहा गया कि दोनों प्रधानमंत्रियों ने अहमदाबाद और मुम्बई के बीच बुलैट ट्रेन की प्रगति पर विस्तार से बात की।

नरेन्द्र मोदी और शिंजो अबे इस बात पर सहमत थे कि कोविड-19 की महामारी ने सारे संसार की अर्थव्यवस्था को तहस नहस कर दिया है। ऐसे में समय का तकाजा है कि भारत और जापान एक साथ चलें और चीन जैसे दुश्मन का डटकर मुकाबला करें। प्रधानमंत्री मोदी ने शिंजो अबे को इस बात के लिए धन्यवाद दिया कि अपने प्रधानमंत्री काल में उन्होंने भारत के साथ मजबूत रिश्ते स्थापित करने के पूरे प्रयास किया और उम्मीद जताई कि ये रिश्ते नए प्रधानमंत्री के कार्यकाल में और भी मजबूत होंगे। ठस समझौते की खास बात है कि यदि युद्व की स्थिति उत्पन्न हुई तो दोनों देशों की नौसेना और वायु सेना एक दूसरे के नौसैनिक अड्डों के साथ साथ हवाई अड्डों का भी इस्तेमाल कर सकेंगे। दोनों देश एक दूसरे को अपने हड्डों से लड़ाकू विमानों का ईंधन उपलब्ध करवाएंगे तथा खाद्य सामग्री और कलपूर्जी की बिना बाधा आपूर्ति करेंगे। राजनीतिक प्रवेक्षकों का कहना है कि भारत और जापान के बीच यह सैनिक संधि पूरे एशिया की राजनीति बदल देगी और बहुत दिनों तक चीन अब एशियाई देशों को आंख नहीं दिखा सकेगा। राफेल के आने पर भारतीय वायुसेना की ताकत बहुत बढ़ गई है और चीन इस बात को समझ गया है कि वह बहुत दिनों तक भारत को आंख नहीं दिखा पाएगा। चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है और एलएसी के आसपास दिन रात उपद्रव कर रहा है और सैनिक शक्ति बढ़ा रहा है। इसे देखते हुए भारत की कमांडरों का कहना है कि चीन यदि अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो किसी भी दिन युद्व छिड़ सकता है और उस स्थिति में चीन को मुंह की खानी पड़ेगी। क्योंकि भारत की सेना पहाड़ियों पर लड़ने की महारथी है। चीन इस बात से भयभीत जरूर है परन्तु अपने सैनिकों को डरा धमका कर रख रहा है जिससे वे पीछे नहीं हट सकें।

भारत-चीन सीमा पर जिस तरह की हरकतें हो रही हैं उससे लगता है कि चीन अपनी चालबाजियों से बाज नहीं आएगा। भारत के शीर्ष सैन्य अफसरों के साथ बातचीत में वह शांति की बात करता है और तुरन्त पीठ में छूरा भोंक देता है। भारत चीन की इन चालाकियों को अच्छी तरह समझ गया है और यदि युद्व की स्थिति हुई तो वे सारे देश जो चीन के खिलाफ हैं और कोरोना महामारी से त्रस्त हैं, आपस में मिलकर चीन का कड़ा मुकाबला करेंगे। चीन के तानाशाह अभी कुछ निश्चय नहीं कर पा रहे हैं। परन्तु वे इस बात को अच्छी तरह समझ रहे हैं कि संसार के अधिकर देश चीन के खिलाफ हैं और यदि किसी कारणवश चीन और भारत के बीच युद्व हुआ तो अधिकतर देश भारत के साथ खड़े होंगे और चीन की अकल ठिकाने लगा देंगे। आगामी कुछ सप्ताह एशिया की राजनीति में बहुत महत्वपूर्ण साबित होंगे। संसार के लोग संास रोककर भारत-चीन के बीच बढ़ रही तनातनी पर नजर रखे हुए हैं। देखते हैं ऊंट किस करवट बैठता है।

Next Story
Top