Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

घनश्याम बादल का लेख : लगाम के साथ स्वतंत्रता

17 मई को जिस प्रकार से देश में एक साथ करीब 5000 संक्रमितों की संख्या बड़ी उससे केंद्र सरकार सोचने पर विवश हुई होगी कि ढील देने का परिणाम क्या हो सकता है। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लॉकडाउन 4.0 में न तो राज्यों को स्वायत्त किया गया है और न ही बहुत अधिक ढील दी गई है।

घनश्याम बादल का लेख : लगाम के साथ स्वतंत्रता

घनश्याम बादल

जैसी आशंका थी वैसा ही हुआ। 17 मई को समाप्त होने वाला लॉकडाउन 3.0 अब 31 मई तक लॉकडाउन 4.0 के रूप में आगे बढ़ गया है। पहले कयास लगाए जा रहे थे कि इस बार के लॉकडाउन को कब तक वह किस किस राज्य में बढ़ाया जाएगा। इसमें राज्य सरकारों की भूमिका भी काफी बड़ी होगी। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में लॉकडाउन 4.0 के बारे में 20 लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा के समय यह संकेत दिया था कि लॉकडाउन 4.0 नए नियम एवं रंग रूप में सामने आएगा।

मुख्यमंत्रियों के साथ हुई मंत्रणा में उन्होंने सभी राज्य सरकारों से सुझाव भी लिए थे। प्रधानमंत्री के संकेतों के आधार पर विशेषज्ञों ने यह अनुमान भी लगा लिए थे कि लॉकडाउन 4.0 में काफी रियायत मिलने वाली हैं, लेकिन इस बीच प्रवासी मजदूरों के साथ दुर्घटनाएं हुई। 17 मई को जिस प्रकार से देश में एक साथ करीब 5000 संक्रमितों की संख्या बड़ी उससे केंद्र सरकार सोचने पर विवश हुई होगी कि ढील देने का परिणाम क्या हो सकता है। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लॉकडाउन 4.0 में न तो राज्यों को स्वायत्त किया गया है और न ही बहुत अधिक ढील दी गई है। जो गतिविधियां पहले से चल रही हैं उन्हें गति देने कोशिश जरूर दिखाई देती है लॉकडाउन 4.0 में।

गृह मंत्रालय ने रविवार को लॉकडाउन 4.0 के ऐलान के साथ नई गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। मेट्रो, मॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स पहले ही तरह बंद रहेंगे। रेस्टोरेंट्स से होम डिलीवरी हो सकती है। दो राज्यों के बीच आपसी सहमति से बसें चल सकती हैं। राज्यों के भीतर भी बस चलाने का अधिकार मिल गया है। अब राज्य रेड, ग्रीन और ऑरेंज जोन तय कर सकेंगे। इस घोषणा में सबसे बढ़ा संभ्रम पैदा होने की जो संभावना है वह है देश में विभिन्न राजनीतिक दलों की सरकारी होना। देखने में आता है कि यदि एक राज्य में एक दल विशेष की सरकार है तथा दूसरे उसकी सीमा से सटे हुए राज्य में दूसरे दल की सरकार है और यह एक-दूसरे के विरोधी दल हैं तो ऐसे में सियासत का खेल शुरू हो जाता है। कहीं दूसरा दल इससे मजबूत न हो जाए इस डर के चलते या तो अनुमति नहीं दी जाती है अथवा उसमें इस प्रकार के पेंच फंसा दिए जाते हैं की उसका क्रिया निबंध क्रियान्वयन मुश्किल हो जाता है।

केंद्र सरकार ने लॉकडाउन 4.0 की घोषणा में कई दूसरी सुविधाएं देने के लिए भी गाइडलाइंस जारी की हैं। यद्यपि कुछ बिंदुओं पर स्पष्टीकरण की जरूरत पड़ सकती है जो विभिन्न राज्यों के सचिवों द्वारा मांगे जाने पर केंद्र सरकार मुहैया कराएगी। फिलहाल ग्रीन जोन में एक ही राज्य के अंदर बस, टैक्सी चलाने की इजाजत, स्टेडियम, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स खुलेंगे, दर्शकों को जाने की इजाजत नहीं होगी। होटल, रेस्टोरेंट बंद रहेंगे लेकिन होम डिलीवरी की इजाजत होगी। बाजार को खोलने को लेकर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऑटो रिक्शा के चलने पर उसमें सवारी बैठाने उनके बीच दूरी बनाए रखने के बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं है। यह सारा जिम्मा तो राज्य सरकारों एवं स्थानीय प्रशासन को ही योजनाबद्ध तरीके से उठाना होगा। सुविधा मिलना अच्छा भी है जरूरी भी था। किंतु शराब की बिक्री जैसा ही मंजर पैदा हो जाए इस बात का भी डर है। हां, यदि आम जनता एवं राज्य सरकारों, स्थानीय प्रशासन ने समर्पण भाव के साथ योजनाबद्ध तरीके से लागू करते हुए सहयोग दिया तो अगले चरण के लॉकडाउन में और सुविधाएं मिलना भी तय है।

लॉकडाउन 4 .0 की घोषणाओं के अनुसार 31 मई तक सभी उड़ानों पर रोक रहेगी। मॉल, सिनेमाहॉल पहले की तरह बंद रहेंगे। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें 31 मई तक बंद रहेंगी। सभी तरह के आयोजनों पर 31 मई तक रोक रहेगी। सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक कार्यक्रम नहीं होंगे। स्कूल, कॉलेज और सभी शिक्षण संस्थाएं पहले की तरह बंद रहेंगे। मेट्रो सेवा 31 मई तक बंद रहेगी। सभी तरह के पूजा स्थल भी अभी बंद ही रहेंगे। यदि देखा जाए तो ऐसा किया जाना जरूरी भी था। क्योंकि इन सब सेवाओं के चलने का मतलब था आप किसी भी प्रकार से लोगों के इकट्ठे होने पर रोक नहीं लगा सकते हैं। साथ ही साथ यदि स्कूल और कॉलेज खोले जाते हैं तो किशोर एवं युवा पीढ़ी के अपेक्षाकृत कम अपरिपक्व छात्र-छात्राएं अधिक मात्रा में संक्रमित हो सकते थे। अब क्योंकि लॉकडाउन 4.0 में ही ईद भी आ रही है अतः यदि एक भी धर्म के पूजा घर को खोला जाता तो अन्य धर्मों के मतावलंबी भी यह मांग लेकर सड़कों पर आ सकते थे कि उन्हें भी यह छूट मिलनी चाहिए। इसलिए इस घोषणा को व्यवहारिकता के साथ स्वीकार किया जाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को पुनः चालू किए जाने का तो प्रश्न ही नहीं उठता। क्योंकि अभी दुनिया भर के लगभग सारे देश कोविड-19 की चपेट में है इन उड़ानों को शुरू करने से अब तक की गई सारी मेहनत पर पानी फिरने का भी पूरा अंदेशा था।

सरकार का एक और व्यवहारिक निर्णय है स्टेडियम एवं स्पोर्ट्स कांप्लेक्स को खोलना। अब क्योंकि वहां पर शर्त के अनुसार दर्शक होंगे ही नहीं इसलिए संक्रमण की संभावना भी न्यूनतम हो जाती है। टेलीविजन चैनलों पर इनके प्रसारण से जहां खेल प्रेमी लोगों को घर में रोकने में मदद मिलेगी वहीं यह गतिविधियां भी आंशिक रूप से ही सही शुरू हो जाएंगी। इसी प्रकार से शादी समारोह में 50 व्यक्तियों की उपस्थिति तथा मृत्यु होने पर 20 व्यक्तियों की उपस्थिति की शर्त भी काफी व्यवहारिक है। लेकिन इनमें भी हमें पहले स्वयं व्यवहारिक होना पड़ेगा तथा साथ ही साथ प्रशासन को भी चाक-चौबंद एवं सतर्क होकर इन गतिविधियों का निरीक्षण करना होगा। वह भी संवेदनशीलता के साथ जिससे लोगों की भावनाएं भी आहत न हों एवं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी हो जाए। अगर प्रशासन यह करने में सफल रहता है तो कम कोरोना पर जीत दर्ज कर सकते हैं।

Next Story
Top