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डॉ़ मोनिका शर्मा का लेख : बेटियों की युद्धपोत तक उड़ान

गौरतलब है कि भारतीय नौसेना में पहली बार दो महिला अधिकारियों की तैनाती युद्धपोत पर की गई है। नौसेना में महिलाओं को यह अहम जिम्मेदारी (responsibility) मिलना ऐतिहासिक अवसर है। सैन्य क्षेत्रों में महिलाओं की सहभागिता से जुड़े मोर्चे पर एक नई शुरुआत है। हेलीकॉप्टर स्ट्रीम में ऑब्जर्वर के तौर पर नियुक्त की गईं दोनों महिला अधिकारी भारतीय नौसेना के 17 अधिकारियों के टीम का हिस्सा हैं, जिसमें चार महिला अधिकारी और तीन भारतीय तट रक्षक शामिल हैं।

डॉ़ मोनिका शर्मा का लेख : बेटियों की युद्धपोत तक उड़ान
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सिनेतारिकाओं के चमकते चेहरों से जुड़ी अजब-गज़ब खबरों के बीच इन दिनों एक समाचार देश के आम परिवारों की बेटियों (daughters) की सशक्त कदमताल की भी बानगी बना। जिस दौर में कोरोना काल की आपदा हर हालात से जूझने और आगे बढ़ने का सबक सिखा रही है, यह खबर एक व्यावहारिक उदाहरण है, विपरीत परिस्थितियों में भी खुद को साबित करने का हौसला रखने का।

जिस देश में बेटियों के लिए आम कार्य क्षेत्र में भी संघर्ष पूर्ण स्थितियां हैं, वहां सैन्य क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दर्ज करवाना कितना कठिन होगा, यह समझना मुश्किल नहीं। ऐसे में संघर्ष की लंबी राह पर चलते हुए हासिल की गई गर्व करने वाली उपलब्धियां हौसले और मेहनत के दम पर ही महिलाओं (Women) के हिस्से आ रही हैं। यही वजह है कि हर हाल में खुद को साबित करने का जज्बा रखने वाली बेटियां आज किसी भी मोर्चे पर कम नहीं।

गौरतलब है कि भारतीय नौसेना में पहली बार दो महिला अधिकारियों की तैनाती युद्धपोत पर की गई है। नौसेना में महिलाओं को यह अहम जिम्मेदारी मिलना ऐतिहासिक अवसर है। सैन्य क्षेत्रों में महिलाओं की सहभागिता से जुड़े मोर्चे पर एक नई शुरुआत है। हेलीकॉप्टर स्ट्रीम में ऑब्जर्वर के तौर पर नियुक्त की गईं दोनों महिला अधिकारी भारतीय नौसेना के 17 अधिकारियों के टीम का हिस्सा हैं, जिसमें चार महिला अधिकारी और तीन भारतीय तट रक्षक शामिल हैं।

यह वॉरशिप से बतौर एयरबोर्न कॉम्बटेंट काम करने वाला महिला अधिकारियों का पहला दस्ता है। हालांकि पहले से भी भारतीय नौसेना में कई महिला अधिकारी हैं, लेकिन अब तक युद्धपोतों पर उनकी तैनाती नहीं की जाती थी। ऐसे में महिलाओं को मिला यह नया मोर्चा कई दूसरे पहलुओं पर भी बदलाव लाने वाला साबित होगा। लैंगिक असमानता को दूर करने का संदेश देने वाला यह कदम वाकई सुखद और सराहनीय है। साथ ही पहली बार नौसेना के युद्धपोत पर महिलाओं को क्रू के रूप में तैनात किया जाना देश की बेटियों को ऐसे खास क्षेत्रों में भविष्य बनाने और भागीदार बनने की प्रेरणा देने वाला है।

दरअसल, कामकाजी क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव और सशक्त भागीदारी से जुड़ा हर नया कदम महिलाओं के मन-जीवन से जुड़े हालातों को गहराई से प्रभावित करता है। सशस्त्र बलों में लैंगिक समानता लाने वाले निर्णय तो समाज और परिवार के पूरे मनोविज्ञान पर असर डालते हैं।

बेटियों को कमजोर या कमतर समझे जाने की मानसिकता पर चोट करते हैं। उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण जैसे मानवीय पहलुओं पर बराबरी लाने और आगे बढ़ाने का परिवेश बनाते हैं। घर ही नहीं दफ्तर में भी उनकी जरूरतों और सहूलियतों पर सोचने के हालात तैयार करते हैं। गौरतलब है कि चालक दल के क्वार्टर्स में गोपनीयता की कमी और महिलाओं के लिए विशिष्ट बाथरूम की सुविधा का न होना जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव भी अब तक युद्धपोतों पर महिला अधिकारियों की तैनाती न किए जाने के कारणों में से एक रहा है।

यकीनन अब इन ऐसी सहज सुविधाओं को उपलब्ध करवाने के हालातों में बदलाव निश्चित है। कहना गलत नहीं होगा कि ऐसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव आज भी कई कार्यक्षेत्रों में महिलाओं के लिए असहज और असुरक्षित वातावरण बना रहा है। जबकि भारतीय महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रभावपूर्ण उपस्थिति दर्ज करवा रही हैं। हर बाधा को पार करते हुए आगे बढ़ रही हैं।

आज निजी क्षेत्र की कंपनियों में कुल वर्कफोर्स की 24.5 फीसदी महिलाएं है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में महिलाओं की ये हिस्सेदारी तकरीबन 17. 9 प्रतिशत है। कई ऐसे क्षेत्र जिनमें केवल पुरुषों का एकाधिकार था, अब महिलाएं भी अपना दखल रखती हैं। वे भारतीय कार्यबल का अहम्ा हिस्सा हैं। मौजूदा समय में प्रत्यक्ष श्रमशक्ति में 40 प्रतिशत तथा अप्रत्यक्ष श्रमशक्ति में 90 प्रतिशत योगदान महिलाओं का ही है।

कुछ साल पहले मार्स ऑर्बिटर मिशन मॉम की सफलता के बाद अखबारों, न्यूज चैनलों और सोशल मीडिया तक, सहज और साधारण सी दिखने-लगने वाली असाधारण प्रतिभा वाली स्त्रियों की तस्वीरें दुनियाभर में छा गईं थीं । भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन से जुड़ीं ये महिलाएं प्रथम मंगल अभियान की टीम का अहम्ा हिस्सा रहीं। इतना ही नहीं गगनयान मिशन 2022 से जुड़ी टीम में भी महिला शक्ति को खास जगह मिली है।

हाल ही में भारतीय वायुसेना में शामिल हुए राफेल लड़ाकू विमान को उड़ाने के लिए भी वायुसेना की दस महिला फाइटर पायलटों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आधिकारिक सूत्रों मुताबिक जो महिला पायलट राफेल विमान उड़ाने का प्रशिक्षण ले रही हैं, उनकी तैनाती पहले मिग-21 लड़ाकू विमान उड़ाने के लिए रही है। सुखद है कि एक ओर महिलाएं ऐसे अंतरिक्ष अभियानों की कमान संभाल रही हैं तो दूसरी सैन्य बलों में भी रेखांकित करने योग्य भूमिका में आ रही हैं।

यह सकारात्मक और सम्बल देने वाली बात है कि कभी महिलाओं का न के बराबर दखल रखने वाले कार्य क्षेत्रों में भी महिलाओं का योगदान देखने को मिल रहा है। असल में देखा जाए तो नई पीढ़ी की कामकाजी महिलाएं महत्वाकांक्षी भी हैं और साहसी भी। यही वजह है कि युवतियां नए कार्य क्षेत्रों में भी अपनी भूमिका पुख्ता कर रही हैं। तयशुदा खांचे से बाहर अपनी पहचान बना रही हैं।

पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए कामकाजी मोर्चे पर भी स्वयं को साबित करने में जुटी आधी आबादी पूरे मनोयोग से लगभग हर क्षेत्र में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रही है। बेटियां जिंदगी के हर मोर्चे पर बराबरी से शामिल हैं। खेल का मैदान, सैन्य बल, राजनीति का अखाड़ा या फिर अंतरिक्ष से जुड़े अनुसंधान की दुनिया।

महिलाओं के मजबूत इरादों से उनकी उपलब्धियों में इजाफा हो रहा है। हालांकि आज भी भारतीय महिलाओं के समक्ष अनगिनत चुनौतियां हैं, पर दोहरी जिम्मेदारी निभाते हुए भी उच्च शिक्षा के आंकड़ों से लेकर कामकाजी दुनिया तक, उनकी भागीदारी बढ़ ही रही है। ऐसे में नौसेना में इन महिला अधिकारियों की प्रभावी भूमिका और ऊर्जामयी चेहरों के जरिये बदलाव की नई बयार को और बल मिलेगा। बेटियों के प्रति न केवल विचार और व्यवहार बदलेगा बल्कि कार्य क्षेत्र में भागीदारी बढ़ेगी।

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