Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

देश को अलग से महिला बैंक की क्या जरूरत है

प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा मुंबई में भारतीय महिला बैंक की शाखा के उद्घाटन के साथ ही देश के सात शहरों लखनऊ, बेंगलुरु, कोलकाता, चेन्नई, अहमदाबाद, गुवाहटी और मुंबई में महिला बैंक ने काम करना शुरू कर दिया है।

देश को अलग से महिला बैंक की क्या जरूरत है
X

आधी आबादी के सशक्तिकरण के नाम पर प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा मुंबई में भारतीय महिला बैंक की शाखा के उद्घाटन के साथ ही देश के सात शहरों लखनऊ, बेंगलुरु, कोलकाता, चेन्नई, अहमदाबाद, गुवाहटी और मुंबई में महिला बैंक ने काम करना शुरू कर दिया है। परंतु यह सवाल तो है कि जब देश में केवल 35 प्रतिशत लोगों को ही बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध हैं तब अलग से महिलाओं के लिए बैंक की क्या जरूरत है? देश में करीब एक लाख बैंक शाखाएं हैं और देश के 6.5 लाख गांवों में से अधिकांश में एक भी बैंक नहीं है। ऐसे में सरकार को महिलाओं और पुरुषों दोनों को ही अधिक से अधिक बैंकिंग से जोड़कर उन्हें वित्तीय सेवाएं मुहैया कराए जाने की योजना पर अमल करनी चाहिए। यह सही है कि देश में कामकाजी महिलाओं की संख्या बढ़ रही है। और उनकी एक बड़ी संख्या अनौपचारिक अर्थव्यवस्था से भी जुड़ी है। ऐसी सूरत में महिलाओं के लिए भी बैंक तक पहुंच आसान बनाने की जरूरत है। यह उनके सशक्तिकरण और उन्हें वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मददगार होगा। विश्व बैंक की ग्लोबल फाइनेंशियल इनक्लूजन डेटाबेस स्टडी के मुताबिक भारत में केवल 26 प्रतिशत महिलाओं का किसी वित्तीय संस्था में औपचारिक खाता है। दरअसल, वित्त वर्ष 2013-14 के बजट में वित्त मंत्री ने देश में एक हजार करोड़ रुपये की आधार पूंजी के साथ महिला बैंक की स्थापना का जिक्र किया था। हालांकि उस दौरान निर्भया बलात्कार का मुद्दा गरम था और देश की भावनाओं को देखते हुए महिलाओं के लिए अलग से महिला थाना और महिला बैंक के गठन की बात कही गई थी लेकिन इन क्षेत्रों में मौजूदा समस्याओं के निराकरण के बिना आनन फानन में चालू की गई ये योजनाएं अपनी चुनौतियों से कितना पार पाएंगी कहना मुश्किल है। महिला बैंक का मुख्यालय दिल्ली में होगा और अगले वित्त वर्ष तक देश भर में इसकी 25 और अगले चार साल में इसकी शाखाओं की संख्या 500 तक पहुंचाने की बात कही जा रही है। इसमें कर्मचारी महिलाएं ही होंगी और ये अधिकांशत: महिलाओं को ही ऋण देगा। बैंक महिलाओं से जुड़े लैंगिक मुद्दों, उनके सशक्तिकरण और वित्तीय समावेश की दिशा में काम करेगा। इनका जोर शहरी क्षेत्रों में महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने पर होगा, जबकि ग्रामीण महिलाओं को इससे कोई लाभ नहीं मिलने वाला। समाज के कमजोर वर्ग की महिलाओं को बेहद कम ब्याज दर पर कर्ज देकर उन्हें आर्थिक तौर पर स्वावलंबी बनाने का लक्ष्य तो रखा गया है परंतु कुछ मट्ठीभर ब्रांच खोलकर इस लक्ष्य को नहीं पाया जा सकता। बैंकिंग सेवा से जुड़ी जो समस्याएं हैं उनका पहले उन्मूलन करना होगा, तभी इसका भी कुछ लाभ मिल पाएगा। कुलमिलकार देश में बैंकिंग सेवाओं का दायरा बढ़ाने के लिए महिलाओं के लिए अलग से बैंक खोलने के साथ ही बेहतर होगा कि मौजूदा बैंकों की अधिक से अधिक शाखाएं खोली जाएं खासकर ग्रामीण इलाकों में, बैंकिंग नियमावली को आसान बनाया जाए, क्षेत्रीय भाषाओं के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाए, अधिक लोगों तक पहुंच बनाने के लिए माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं और स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद ली जाए और ऋण की उपलब्धता को आसान बनाया जाए तथा साथ ही वित्त शिक्षा की जरूरत पर बल दिया जाए।

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story
Top