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फीफा विश्व कप 2018 फ्रांस फुटबाल का शहंशाह

रुस में संपन्न फीफा विश्व कप के 21वें संस्करण ने कई मिथकों, श्रेष्ठता की तथाकथित कहानियों और केवल नामी खिलाड़ियों के दम पर मैदान मार लेने के दावों की पोल खोल कर रख दी।

फीफा विश्व कप 2018 फ्रांस फुटबाल का शहंशाह
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रुस में संपन्न फीफा विश्व कप के 21वें संस्करण ने कई मिथकों, श्रेष्ठता की तथाकथित कहानियों और केवल नामी खिलाड़ियों के दम पर मैदान मार लेने के दावों की पोल खोल कर रख दी।

इसी बीच दूसरी बार चैंपियन बनी फ्रांस की टीम ने सही मायने अपनी महारत का जलवा बिखेरते हुए पूरी दुनिया को अपना कायल बना दिया। फ्रांस तो ‘निर्विवाद विश्व श्रेष्ठ‘ बना ही, अंतिम चार में पहुंचने वाली दीगर चार टीमों में उपविजेता क्रोएशिया तथा तीसरे व चौथे स्थान पर रही बेल्जियम और इंग्लैंड की टीमों ने भी अपने खेल से दुनियाभर के खेल प्रेमियों के मानस पटल पर अमिट छाप छोड़ी।

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आॅलमी फुटबाॅल में लेटिन अमेरिकी मुल्कों के दबदबे की परम्परा को कायम रखने में ब्राजील, उरूग्वे और अर्जेंटीना जैसी टीमें इस बार बुरी तरह से नाकाम रहीं। मैसी पर मोहताज रहने वाली अर्जेंटीना की टीम को फ्रांस ने प्री क्वार्टर फाइनल में जिस महारत के साथ जमींदोज किया, उससे यह लगाने लगा था कि फ्रांस के इरादे इस बार खतरनाक है।

बाद में क्वार्टर फाइनल में दो बार के चैंपियन उरूग्वे, जिसने अर्जेंटीना और ब्राजील की तुलना में ज्यादा परिपक्वता वाला प्रदर्शन किया, उसे भी फ्रांस के आगे हथियार डालने पड़े।

फ्रांस की राह में बेल्जियम और क्रोएशिया के रूप में दो ऐसी टीमें सेमीफाइनल और फाइनल में आई जिनके ओज को निस्तेज करके फ्रांस ने विश्व कप भले ही जीत लिया, मगर हम यह नहीं कहे कि दिल क्रोएशिया और बेल्जियम की टीमों ने भी जीता है, तो यह बड़ी नाइंसाफी होगी।

आॅलमी फुटबाॅल के सर्वोच्च शिखर पर अपनी श्रेष्ठता का झंडा गाड़ने वाली फ्रांसिसी टीम के साथ, पांच बार की चैंपियन ब्राजील को क्र्वाटर फाईनल में धूल चटाने वाली बेल्जियम और 1966 के बाद एक बार फिर खिताब जीतने का सपना पाल चुके फुटबाॅल के जनक इंग्लैंड को हरा पहली बार फाइनल में पहुंची क्रोएशिया के खिलाड़ियों के जज्बे को भी सलाम करना लाजमी है।

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युवा सितारों से सज्जित फ्रांस की संतुलित टीम ने फाइनल में क्रोएशिया की करिश्माई टीम को छकाकर ब्राजील, इटली, जर्मनी, अर्जेंटीना और उरूग्वे के बाद विश्व कप इतिहास में ऐसी छठी टीम बनने का एजाज हासिल किया, जिसने दूसरी बार विश्व खिताब जीता है।

विश्व कप के आगाज से पहले सर्वाधिक पांच बार के विजेता ब्राजील, डिफेंडिंग चैंपियन और चार बार के विजेता जर्मनी, लियोनल मैसी की अर्जेंटीना, 2010 के विजेता स्पेन और क्रिस्टियानों रोनाल्डो की मौजूदगी से महिमामंडित होने वाली पुर्तगाल की टीम की खिताबी जीत की संभावनाओं के कोलाहल में फ्रांस की टीम के रूप में मुकम्मल महारत और मजबूत पक्ष को दरकिनार कर दिया गया।

मगर मास्को के लुज्निक स्टेडियम पर रविवार को एक माह के रोमांचक सफर के बाद फीफा विश्व का क्लाइमैक्स आया तो फुटबाॅल के फलक पर फ्रांस के फन को छाने से कोई नहीं रोक पाया। फ्रांस ने 1998 में जब अपनी मेजबानी में अपना पहला विश्व खिताब जीता था तो वहां क्रोएशिया को सेमीफाइनल में हराया था।

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इस बार पूरे टूर्नामेंट में करिश्माई प्रदर्शन कर सबका दिल जीतने वाली क्रोएशियाई टीम से हर कोई यह उम्मीद कर रहा था कि वह फाइनल में भी चमत्कारिक प्रदर्शन करते हुए फ्रांस की राह का रोड़ा बन जाएगी। मगर क्रोएशिया के गहरे प्रतिरोध और ताबड़तोड़ प्रयासों के बावजूद धैर्य और संयम के साथ लक्ष्य पर निगाहे टिकाए फ्रांसिसी खिलाड़ियों ने दूसरी मर्तबा खिताब जीत कर ही दम लिया।

‘छोटा देश, बड़े सपनेे‘ के मूल मंत्र के संग बुलंद हौसलों और मजबूत इरादों की हुंकार भरते हुए क्रोएशिया ने विश्व कप में अपने ड्रीम रन में फाइनल से पहले दो पूर्व विश्व विजेताओं अर्जेंटीना को ग्रुप मैच में 3-0 तथा सेमीफाइनल में 1966 के चैंपियन इंग्लैंड को हराकर जबर्दस्त खेल दिखाया।

क्रोएशिया की मानसिक दृढ़ता और हर हाल में जीत की भूख का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है, प्री क्वार्टर फाइनल, क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में उसने पिछड़ने के बावजूद वापसी कर मुकाबले जीते। ‘गोल्डन बाॅल‘ जीतने में कामयांब रहे बेहतरीन मिडफील्डर कप्तान लुका मोड्रिच के नेतृत्व में मैच दर मैच कड़े होते हर इम्तहान की कसौटी पर क्रोएशिया की यह ड्रीम टीम लगातार खरी उतरी।

क्वार्टर फाइनल से सेमीफाइनल तक हर मैच में एक्सट्रा टाइम और पिछड़ने के बावजूद वापसी कर जीतने वाली क्रोएशियाई ने विपरीत परिस्थितियों की तपिश में कुंदन की तरह निखरते हुए पहली बार फाइनल में दस्तक दी।

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जहां फ्रांसिसी टीम की महारत उस पर भरी पड़ी। इस विश्व कप में कांसे का तमगा जीतने वाले बेल्जियम की गोल्डन जनरेशन के सितारों ने भी सही मायने अपने प्रदर्शन से पूरी दुनिया में प्रशंसकों के बीच अपनी अमिट छाप छोड़ी है। बेल्जियम ने अपने सभी मैच जीतकर सेमीफाइनल में पहुंचने तक के सफर में हर तरह की परिस्थिति में आखिरी दम तक जीत के लिए जिद्दी इरादों का नायाब प्रदर्शन किया।

फुटबाॅल के खेल में सफलता टीम के तौर पर समेकित प्रदर्शन पर ज्यादा निर्भर करती है। इस लिहाज से भी फ्रांस के हाथों सेमीफाइनल मुकाबले में हार के बाद इस विश्व कप में एक बार फिर इंग्लैंड को मात देकर तीसरा स्थान प्राप्त करने वाली बेल्जियम की टीम का प्रदर्शन सराहनीय रहा।

बेल्जियम ने इस विश्व कप में 16 गोल स्कोर किए है, इनमें 10 अलग-अलग खिलाड़ियों ने अपना हाथ बंटाया, यह टीम के तौर पर इस विश्व कप का सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा है। फ्रांस और क्रोएशिया की टीमें 14-14 गोल स्कोर कर पाई। इंग्लैंड का गैरी लिनेकर, वेन रूनी और डेविड बैकहम के दौर में भी 1966 की सफलता को दोहराने का सपना पूरा नहीं हो पाया था।

इस बार कोच साउथगेट और कप्तान हेरी केन की जुगलबंदी से उसे सुनहरे अतीत को लौटा लाने की पूरी उम्मीद थी, मगर कई मोर्चों पर शानदार प्रदर्शन के बावजूद उसकी सफलता की सांसें फिर सेमीफाइनल की दहलीज पर ही टूट गई।

इस विश्व कप की दीगर खास बातों पर निगाह डाले तो 12 आत्मघाती गोलों (ओन गोल्स) का इस बार नया रिकार्ड बना, यहां तक कि फाइनल मका पहला गोल भी क्रोएशिया के माजुकिच के हैडर से हुआ ओन गोल था।

वीडियो एसिस्टेंट रैफरी के दखल ने भी नतीजों में जरूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता का समावेष किया है। फाइनल में फ्रांस को पेनल्टी इसी नई तकनीक के जरिए मिली, जिस पर गोल कर ग्रीजमैन ने फ्रांस को निर्णायक बढ़त दिलाई।

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