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योगेश कुमार गोयल का लेख: सुपर साइक्लोन अम्फान का डर

21 वर्ष लंबे अंतराल के बाद पहली बार कोई सुपर साइक्लोन भारत में दस्तक दे रहा है, जिससे निपटने के लिए सेना तथा वायुसेना को पूरी तरह अलर्ट किया जा चुका है और जानमाल के नुकसान को रोकने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की भी 53 टीमें तैनात की गई हैं।

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कोरोना महामारी के कहर के बीच भारत में महातूफान कहर बरपाने आ रहा है। 21 वर्ष लंबे अंतराल के बाद पहली बार कोई सुपर साइक्लोन भारत में दस्तक दे रहा है, जिससे निपटने के लिए सेना तथा वायुसेना को पूरी तरह अलर्ट किया जा चुका है और जानमाल के नुकसान को रोकने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की भी 53 टीमें तैनात की गई हैं। खतरा कितना बड़ा है, यह इसी से समझा जा सकता है कि एयरफोर्स के सी-131 विमानों को भी तैयार रहने को कहा गया है। इस भयानक तूफान का नाम है अम्फान, जिससे पश्चिम बंगाल तथा उड़ीसा में भारी तबाही की आशंका जताई जा रही है।

अम्फान सुपर साइक्लोन को वर्ष 1999 में उड़ीसा के तट पर आए प्रचंड चक्रवातीय तूफान के बाद उसी श्रेणी का दूसरा तूफान बताया जा रहा है। 1999 में आए बेहद जानलेवा चक्रवाती तूफान ने 9 हजार से भी ज्यादा लोगों की जान ले ली थी। अम्फान से पश्चिम बंगाल तथा उड़ीसा के तटीय जिलों में भारी से अत्यंत भारी बारिश होने की आशंका है। तूफान के दस्तक देने के दौरान समुद्र से चार से छह मीटर ऊंची तूफानी लहरें उठने के कारण दक्षिण और उत्तर 24 परगना जिलों के निचले इलाके जलमग्न हो सकते हैं। संभावना जताई जा रही है कि जब तूफान स्थल भाग में प्रवेश करेगा तो समुद्र की लहरें 20 फुट की ऊंचाई तक उठ सकती हैं। एनडीआरएफ के महानिदेशक एस एन प्रधान का कहना है कि अम्फान को हल्के में नहीं लिया जा रहा है। उनके मुताबिक यह अत्यधिक प्रचंड चक्रवातीय तूफान होगा, जो तट पर आने के दौरान महाचक्रवात से केवल एक श्रेणी नीचे होगा। इस भयानक तूफान से कच्चे मकान, मकानों की कच्ची छतों, नारियल के पेड़ों, टेलीफोन तथा बिजली के खंभों को गंभीर क्षति पहुंच सकती है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक एम. महापात्रा के अनुसार अम्फान के तट से टकराने के दौरान हवा की गति 195 से 200 किलोमीटर रहने का अनुमान है।

पश्चिम बंगाल तथा उड़ीसा में आने वाले चक्रवाती तूफान को अम्फान नाम थाईलैंड द्वारा दिया गया है, जहां इसे उम-पुन कहते हैं। चक्रवातों को कोई नाम देने का सिलसिला विश्व मौसम संगठन द्वारा वर्ष 1953 में शुरू किया गया था। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अमेरिका द्वारा चक्रवातों को महिलाओं का नाम देना शुरू किया गया था, लेकिन वर्ष 1978 से आधे चक्रवातों के नाम पुरूषों के नाम पर भी रखे जाने लगे। वहां तूफानों का नाम तय करने में अब ऑड-ईवन फार्मूले को अपनाया जाता है। विषम वर्ष में आने वाले तूफानों के नाम महिलाओं पर सम वर्ष में आने वाले तूफानों के नाम पुरूषों पर होते हैं।

बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर में आने वाले समुद्री तूफानों के नाम रखने का सिलसिला करीब सोलह वर्ष पूर्व वर्ष 2004 में शुरू हुआ था। इन क्षेत्रों में तूफानों को नाम देने के लिए आठ देशों बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका और थाईलैंड की एक सूची बनाई गई, जिनके द्वारा क्रमवार आठ-आठ नाम दिए गए। भारत द्वारा तूफानों के नामों की इस सूची के लिए अग्नि, आकाश, बिजली, जल, लहर, मेघ, सागर तथा वायु नाम दिए गए थे। जब जिस देश का नंबर आता है, उस देश की सूची में दिए गए नाम के आधार पर उस तूफान का नामकरण किया जाता है। अब थाईलैंड द्वारा चक्रवात को दिया गया अम्फान नाम 64 तूफानों के नामों की इस सूची में अंतिम नाम है। बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर में आने वाले तूफानों को नाम देने की शुरूआत के समय अंग्रेजी वर्णमाला के हिसाब से तूफान के नामकरण का पहला अवसर बांग्लादेश को मिला था, जिसने पहले तूफान को 'ओनिल' नाम दिया था। अम्फान के साथ अब ये 64 नाम समाप्त हो गए हैं और इन्हें अब फिर से नए सिरे से शुरू किया जाएगा।

बहरहाल, केरल, गोवा, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, गुजरात, महाराष्ट्र इत्यादि भारत राज्य ऐसे चक्रवाती तूफानों से प्रभावित होते रहे हैं। इस तरह के सुपर साइक्लोन अपने पीछे केवल बर्बादी छोड़ जाते हैं। अम्फान चक्रवाती तूफान को लेकर भी अनुमान लगाया जा रहा है कि तट पर आने के दौरान इसका प्रभाव फोनी चक्रवात जैसा ही होगा। भीषण तबाही मचाकर गुजर जाने वाले ऐसे तूफानों के बाद भी तूफान प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को लंबे समय तक अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अम्फान के कहर से तबाही होनी तो तय है ही, इसलिए जरूरी है कि अम्फान के गुजर जाने के बाद लोगों को मुसीबतों से निजात दिलाने के लिए राजनीतिक बयानबाजियों से परे हटकर कार्य किए जाएं।

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