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नहीं रहे मशहूर शायर व गीतकार निदा फाजली

12 अक्टूबर 1938 को दिल्ली में जन्में फाजली का मुंबई में हार्ट अटैक के कारण निधन हो गया।

नहीं रहे मशहूर शायर व गीतकार निदा फाजली
मुंबई. सोमवार की सुबह 11.30 बजे मशहूर शायर और गीतकार निदा फाजली का निधन हो गया। 12 अक्टूबर 1938 को दिल्ली में जन्में फाजली का मुंबई में हार्ट अटैक के कारण निधन हो गया। उनकी उम्र 78 वर्ष थी। उनका पूरा नाम मुक्तदा हसन निजा फाजली था।
निदा फाजली का करियर
फ़िल्म प्रोड्यूसर-निर्देशक-लेखक कमाल अमरोही उन दिनों फ़िल्म रज़िया सुल्ताना (हेमा मालिनी, धर्मेन्द्र अभिनीत) बना रहे थे जिसके गीत जाँनिसार अख़्तर लिख रहे थे जिनका अकस्मात निधन हो गया। जाँनिसार अख़्तर ग्वालियर से ही थे और निदा के लेखन के बारे में जानकारी रखते थे जो उन्होंने शत-प्रतिशत शुद्ध उर्दू बोलने वाले कमाल अमरोही को बताया हुआ था। तब कमाल अमरोही ने उनसे संपर्क किया और उन्हें फ़िल्म के वो शेष रहे दो गाने लिखने को कहा जो कि उन्होंने लिखे। इस प्रकार उन्होंने फ़िल्मी गीत लेखन प्रारम्भ किया और उसके बाद इन्होने कई हिन्दी फिल्मों के लिये गाने लिखे।
फिल्मों में लोकप्रिय गीत
मशहूर शायर और गीतकार फाजली ने यूं तो कई गीत लिखे हैं लेकिन उनके गीत तेरा हिज्र मेरा नसीब है, तेरा गम मेरी हयात है (फ़िल्म रज़िया सुल्ताना)। यह उनका लिखा पहला फ़िल्मी गाना था। फिल्मों के लिए लिखे उनके कुछ लोकप्रिय गीत आई ज़ंजीर की झन्कार, ख़ुदा ख़ैर कर (फ़िल्म रज़िया सुल्ताना), होश वालों को खबर क्या, बेखुदी क्या चीज है (फ़िल्म सरफ़रोश), कभी किसी को मुक़म्मल जहाँ नहीं मिलता (फ़िल्म आहिस्ता-आहिस्ता) (पुस्तक मौसम आते जाते हैं से), तू इस तरह से मेरी ज़िंदग़ी में शामिल है (फ़िल्म आहिस्ता-आहिस्ता), चुप तुम रहो, चुप हम रहें (फ़िल्म इस रात की सुबह नहीं), दुनिया जिसे कहते हैं, मिट्टी का खिलौना है (ग़ज़ल), हर तरफ़ हर जगह बेशुमार आदमी (ग़ज़ल), अपना ग़म लेके कहीं और न जाया जाये (ग़ज़ल) हैं।
काव्य संग्रह, आत्मकथा और संस्मरण
मशहूर शायर फाजली का पहला प्रकाशित संकलन 'लफ्जों के फूल' नाम से प्रकाशित हुआ। इसके अलावा उन्होने मोर नाच, आंख और ख्वाब के दरमियां, खोया हुआ सा कुछ, आंखों भर आकाश, सफर में धूप तो होगी काव्य संग्रह लिखे। 'खोया हुआ सा कुछ' (1996) को साल 1998 में साहित्य अकादमी से पुरस्कृत किया गया। इसके अलावा उन्होने दीवारों के बीच, दीवारों के बाहर, निदा फाजली नाम से आत्मकथा भी लिखी। और उन्होने मुलाक़ातें, सफ़र में धूप तो होगी, तमाशा मेरे आगे नाम से संस्मरण भी लिखे।
आगे की स्लाइड्स में पढ़िए, पुरस्कार और सम्मान-
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