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आस्था : हनुमान जी की शरण में दिल्ली

अरविंद केजरीवाल-मंत्री मनीष सिसोदिया हाल ही में कनॉट प्लेस के हनुमान मंदिर में गए। लेकिन इधर सियासी हस्तियां दशकों से आ रही हैं। पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, इंदिरा गांधी, बाबू जगजीवन राम हनुमान मंदिर में आकर हनुमान चालीसा पढ़ना पसंद करते थे।

आस्था : हनुमान जी की शरण में दिल्लीहनुमान मंदिर में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (फाइल)

दिल्ली की सियासत में हनुमान जी के महत्वपूर्ण बने रहने पर किसी को आश्चर्य तो नहीं करना चाहिए। सच यह है कि दिल्ली को आप चाहें तो हनुमान जी का शहर मान सकते हैं। इधर अंजनी पुत्र हनुमान के जगह-जगह मंदिर और भव्य प्रतिमाएं स्थापित हैं। पर हैरानी इस बात पर अवश्य है कि अरविंद केजरीवाल अपने सरकारी आवास के पास स्थित मरघट वाले हनुमान मंदिर में कभी क्यों नहीं जाते। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण पांडवों के समय हुआ था। दिल्ली के नामवर इतिहासकार आर.वी. स्मिथ कहते हैं कि मरघट वाला हनुमान मंदिर मौजूदा रूप में 125 साल से अधिक पुराना नहीं है। विश्वास नगर सीट से भाजपा के विजयी उम्मीदवार ओम प्रकाश शर्मा की यहां मिठाई की दूकान भी है। इसे आमेर के राजा जयसिंह ने सन 1724 में बनवाया था। राजा जयसिंह के नाम पर जयपुर शहर का नाम रखा गया है।

अरविंद केजरीवाल या उनके साथी मंत्री मनीष सिसोदिया हाल ही में कनॉट प्लेस के हनुमान मंदिर में गए हों पर इधर सियासी हस्तियां दशकों से आ रही हैं। पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, इंदिरा गांधी, बाबू जगजीवन राम हनुमान मंदिर में आकर हनुमान चालीसा पढ़ना पसंद करते थे। यहां एक अगस्त, 1964 से श्रीराम जयराम जय-जयराम मंत्र का अटूट जाप आरंभ हुआ था। मंदिर में दिन में हर वक्त लगभग पचास भक्त हनुमान चालीसा पढ़ रहे होते हैं। रात को इनकी संख्या घटती है, पर खत्म नहीं होती। कहते हैं, राजा जयसिंह कनॉट फ्लेस क्षेत्र में किसी भवन का निर्माण करवा रहे थे। उस दौरान यहां पर स्वयंभू हनुमान की मूर्ति प्रकट हुई थी। इसमें हनुमान जी दक्षिण दिशा की ओर देख रहे हैं। इसमें उनकी सिर्फ एक ही आंख दिखाई दे रही है। इधर इस मूर्ति के प्रकट होने के बाद यहां पर हनुमान मंदिर का निर्माण हुआ।

राजधानी में यूं तो कई हनुमान मंदिर हैं, पर पंचमुखी की मूर्तियां गिनती के ही मंदिरों में मिलती हैं। पटेल नगर के हनुमान मंदिर में पंचमुखी हनुमान की मूर्ति में मारुति नंदन का कठोर रूप दिखाया गया है। यह अपने आप में दुर्लभ कलारूपों में एक हैं, जहां वे किसी राक्षस का वधकर रहे हैं। कनॉट प्लेस और और ओखला के हनुमान मंदिरों में भी पंचमुखी रूप में हनुमान जी हैं।

हनुमान चालीसा राजधानी के कम से कम दो बजरंग बली के मंदिरों में अखंड चलता है। इसमें कहीं कोई व्यवधान नहीं आता। कनॉट प्लेस के हनुमान मंदिर और इससे तीन-चार किलोमीटर दूर पूसा रोड या आप कह सकते हैं कि करोल बाग और झंडेवालान मेट्रो स्टेशन के बीच में स्थित हनुमान मंदिर में अखंड हनुमान चालीसा समवेत स्वर में सुना जा सकता है। झंडे वालान मेट्रो स्टेशन के पास संकट मोचन की 108 फीट ऊंची प्रतिमा लगी है। इसे मंदिर में जाकर या फिर मेट्रो में सफर करते हुए देखना अपने आप में रोमांचकारी अनुभव से कम नहीं होता। बजरंग बली की इस विशाल मूर्ति को इश्क जादे, बजरंगी भाईजान, दिल्ली-6 वगैरह फिल्मों में दिखाया भी गया है। हनुमान जी एक बड़ी विशाल प्रतिमा छतरपुर मेट्रो स्टेशन के करीब भी स्थापित है। इसी तरह से तिलक ब्रिज से सटे हनुमान मंदिर में भी उनकी एक मूर्ति मंदिर के बाहर स्थापित है। जहां तक झंडेवालान वाले हनुमान मंदिर की बात है तो यह सन 1995 तक छोटा सा मंदिर था। पर यहां पर इधर हनुमान जी की भव्य मूर्ति स्थापित होने के बाद यहां पर दिल्ली-एनसीआर के अलावा शेष भारत के हनुमान भक्त भी दर्शन करने के लिए आने लगे हैं।

तुगलक रोड पर भी एक सिद्ध हनुमान मंदिर है। इसे मंगलवार वाला हनुमान मंदिर भी माना जा सकता है। इसमें बाबू जगजीवन राम, कमालापति त्रिपाठी से लेकर लालू यादव, राबड़ी देवी समेत हजारों-लाखों हनुमान भक्त आते रहे हैं। जिन दिनों लालू यादव को तुगलक रोड पर सरकारी आवास मिला हुआ था,तब राबड़ी देवी यहां आती थीं। निश्चित रूप से इधर कनॉट प्लेस या बस अड्डे वाले हनुमान मंदिरों जितने भक्त तो नहीं आते। आपको इधर हनुमान चालीसा या सुंदर कांड पढ़ने वाले भक्त भी नहीं मिलेंगे, लेकिन ये मंगलवार और कुछ हद तक शनिवार को गुलजार हो जाता है। इन दोनों दिनों में बजरंग बली के सैकड़ों भक्त कुछ पलों के लिए रूकते हैं। पूजा अर्चना करके या प्रसाद चढ़ा कर निकल लेते हैं। चूंकि तुगलक रोड खासी चौड़ी है, इसलिए यातायात प्रभावित नहीं होता। इसमें आने वाले श्रदालु दक्षिण दिल्ली से होते हैं। कई बार राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री का काफिला इस सड़क से गुजरना होता है तो हनुमान मंदिर को कुछ समय के लिए बंद करवा दिया जाता है। यह हनुमान मंदिर 1950 के आसपास स्थापित हुआ। इसकी स्थापना की थी पंडित सालिग राम शर्मा ने। वो चिराग दिल्ली रहते थे। इधर हनुमान जी और शिव परिवार की मूर्तियां हैं।

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