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फेसबुक डेटा लीक केस: कैम्ब्रिज एनालिटिका की रिपोर्ट के बाद सोशल मीडिया पर उठे ये सवाल

कैम्ब्रिज एनालिटिका ने अपनी प्रोफइल में दावा किया है कि फेसबुक ने अमेरिका और ब्रिटेन के अलावा नाइजीरिया, केन्या, ब्राजील और भारत में चुनावी कैंपेन करने व बिग डाटा के इस्तेमाल से जनमत प्रभावित करने का दावा किया है।

फेसबुक डेटा लीक केस: कैम्ब्रिज एनालिटिका की रिपोर्ट के बाद सोशल मीडिया पर उठे ये सवाल
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सोशल मीडिया पर मौजूद बिग डाटा का इस्तेमाल चुनाव अभियान के लिए किया जाना लोकतंत्र के लिए नया खतरा है। आज फेसबुक, टि्वटर, इंस्टाग्राम जैसी कई सोशल साइट्स हैं, जिनके पास करोड़ों लोगों की पर्सनल जानकारी है। इन कंपनियों ने लोगों से उनकी पर्सनल जानकारी गोपनीयता का भरोसा देने के बाद ली है। लोगों को पूर्ण विश्वास है कि सोशल मीडिया की मशहूर साइट- फेसबुक, टि्वटर अपने यूजरों की जानकारी सुरक्षित रखेंगी।

ऐसे में सोशल मीडिया कंपनियां अगर अपने यूजरों की पर्सनल जानकारी डाटा विश्लेषण के आधार पर चुनाव अभियान चलाने वाली कंपनियों को बेचने लग जाए तो यह बड़ा विश्वासघात होगा। दरअसल, अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव अभियान में फेसबुक पर पर्दे के पीछे से रूस के इशारे पर काम करने का आरोप लगने के बाद से सोशल मीडिया कंपनियों पर कई सवाल उठने लगे हैं।

फेसबुक पर आरोप लगा कि उनसे अपने करोड़ों यूजरों के डाटा से उनकी व्यक्तिगत जानकारी और रुचि के आधार पर अमेरिकी चुनाव अभियान को संचालित किया और ट्रंप के पक्ष में लोगों के मत को प्रभावित किया। उसने यह काम रूस के इशारे पर किया। खुद फेसबुक ने एक लाख सत्तर हजार अमेरिकियों के डाटा लीक की बात मानी, हालांकि माना जा रहा है कि उसने करीब दस करोड़ अमेरिकी फेसबुक यूजरों को अपने चुनावी कैंपेन से प्रभावित किया।

ट्रंप की जीत में फेसबुक समेत सोशल मीडिया का बड़ा हाथ माना जा रहा है। भारत में 2014 के लोकसभा में सोशल मीडिया का व्यापक इस्तेमाल देखा गया। उससे पहले के चुनावों में भी सोशल मीडिया का प्रयोग हुआ था, लेकिन उसका दायरा सीमित था। ट्रंप के चुनाव अभियान के लिए सोशल मीडिया कैंपेन को संचालित करने वाली कंपनी अमेरिकी कंपनी ‘कैम्बि्रज एनालिटिका' पर फेसबुक के पांच करोड़ यूजर्स के पर्सनल डाटा गुपचुप तरीके से हासिल करने के आरोप लगे हैं।

आरोप है कि फेसबुक ने ये डाटा बेचे हैं, हालांकि उसने इन्ाकार किया है। कैम्बि्रज एनालिटिका ने अपनी प्रोफइल में दावा किया है कि 2010 में उसने बिहार चुनाव में अभियान चलाने में मदद की थी। पिछले साल गुजरात और पंजाब विस चुनावों के दौरान उसने कांग्रेस की मदद की। इस कंपनी ने अमेरिका और ब्रिटेन के अलावा नाइजीरिया, केन्या, ब्राजील और भारत में चुनावी कैंपेन करने व बिग डाटा के इस्तेमाल से जनमत प्रभावित करने का दावा किया है।

भारत में कैम्ब्रिज एनालिटिका का नाम एससीएल इंडिया से जुड़ा है। इसकी वेबसाइट के मुताबिक, यह लंदन के एससीएल ग्रुप और ओवलेनो बिजनेस इंटेलिजेंस (ओबीआई) प्राइवेट लिमिटेड का साझा उपक्रम है। भारत में राजनीतिक मकसद के लिए कैम्बि्रज एनालिटिका की भूमिका की बात सामने आ रही है। उसके बाद से इस कंपनी के भारतीय राजनीतिक दलों व नेताओं से लिंक को लेकर राजनीति शुरू हो गई है।

यह राजनीति गलत है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि फेसबुक, टि्वटर जैसी कंपनियां अपने यूजर्स के पर्सनल डाटा नहीं बेच पाएं। केंद्रीय कानून व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि केंद्र सरकार मीडिया की स्वतंत्रता, बोलने की आजादी का समर्थन करती है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विचारों के आदान-प्रदान का भी समर्थन करती है,

लेकिन सोशल मीडिया और फेसबुक के जरिए गलत भावना से भारत की चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फेसबुक इसे समझ ले कि अगर जरूरत पड़ी तो भारत सरकार उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी। सरकार की यह चेतावनी जरूरी है, क्योंकि भारतीय लोकतंत्र की सुरक्षा आवश्यक है।

लोकतंत्र में कोई दखल नहीं होना चाहिए। फेसबुक के मुखिया मार्क जुकरबर्ग को सुनिश्चित करना होगा कि निजी जानकारी सुरक्षित रहे। गोपनीय जानकारी बेचना कारोबारी नैतिकता के भी खिलाफ है।

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