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जयंतीलाल भंडारी का लेख : रोजगार-पलायन फिर चुनौती

देशभर में कोरोना की दूसरी घातक लहर से लॉकडाउन के कारण उद्योग-कारोबार की बढ़ती चिंताओं को रोकने, प्रवासी मजदूरों को पलायन की मुश्किलों से बचाने और देश की विकास दर के वैश्विक अनुमानों को साकार करने के मद्देनजर एक बार फिर कोरोना से दूसरे महायुद्ध की नई रणनीति जरूरी दिखाई दे रही है। इस रणनीति में जान बचाने के साथ-साथ आजीविका भी बचाने की प्राथमिकता के साथ कुछ विशेष बातों पर ध्यान देना होगा। भारत में कोरोना वैक्सीन के अधिकतम निर्माण और वितरण की रणनीति कारगर रूप से क्रियान्वित की जानी होगी।

जयंतीलाल भंडारी का लेख : रोजगार-पलायन फिर चुनौती
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जयंतीलाल भंडारी

हाल ही में 18 अप्रैल को नीति आयोग ने कहा है कि कोविड की दूसरी लहर के बीच देश को उपभोक्ता और निवेशक धारणा को लेकर 'अधिक अनिश्चितता' के लिए तैयार रहना चाहिए। कहा गया है कि संक्रमण के मामले बढ़ने की वजह से मौजूदा स्थिति कोरोना की पहली लहर की तुलना में अधिक कठिन हो गई है। कोरोना की वर्तमान चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार के द्वारा जरूरत होने पर राजकोषीय उपाय सुनिश्चित किए जाएंगे, ताकि चालू वित्त वर्ष 2021-22 में देश की अर्थव्यवस्था 11 प्रतिशत की दर से बढ़ सकेगी।

निसंदेह कोरोना की दूसरी घातक लहर ने देश के उद्योग-कारोबार की चुनौतियां बढ़ा दी है। शेयर बाजार बड़ी गिरावट दिखा रहा है। रोजगार और प्रवासी मजदूरों के पलायन की गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। देश में कोविड-19 संक्रमण का आंकड़ा प्रतिदिन दो-ढ़ाई लाख को पार कर गया है। अस्पतालों में बिस्तर, वेंटिलेटर और ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए चारों ओर चिंताएं बढ़ गई हैं। कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या के लिहाज से ब्राजील को पीछे छोड़कर भारत विश्व में अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।

हाल ही में 15 अप्रैल को ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज के द्वारा भारत में कोरोना संक्रमण से बढ़ रही आर्थिक चुनौतियों के मद्देनजर प्रकाशित की गई ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि महाराष्ट्र, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, पंजाब, हरियाणा समेत कुछ अन्य राज्यों में लगाए गए लॉकडाउन जैसे प्रतिबंधों से देश में अरबों रुपयों का उत्पादन प्रभावित हो रहा है और रोजगार में बड़ी गिरावट आ गई है। वैश्विक शोध संगठन बार्कलेज की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में लॉकडाउन जैसे प्रतिबंधों के कारण मई 2021 के आखिर तक करीब 10.5 अरब डॉलर की हानि दिखाई दे सकती है। स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि कोरोना की त्रासदी के कारण देश की विनिर्माण गतिविधियों में वृद्धि की रफ्तार फिर सुस्त पड़ गई है और पिछले माह मार्च 2021 में यह सात माह के निचले स्तर पर आ गई है।

5 अप्रैल को जारी मासिक सर्वे के मुताबिक आईएचएस मार्किट इंडिया का विनिर्माण खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) मार्च में घटकर सात माह के निचले स्तर 55.4 पर आ गया है। फरवरी में यह सूचकांक 57.5 पर था। इसी तरह सर्विस सेक्टर का सूचकांक मार्च में घटकर 54.6 रह गया, जोकि फरवरी में 55.3 रहा था। इससे रोजगार की नई चिंताएं खड़ी हो गई हैं। इन दिनों वैश्विक शोध संगठन देश की विकास दर में कमी आने की रिपोर्टें प्रस्तुत कर रहे हैं। 14 अप्रैल को गोल्डमैन सैश ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 2021 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर पहले के अनुमान से घटकर 10.5 फीसदी पर पहुंच सकती है। स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि कोरोना की दूसरी लहर से उत्पादन श्रृंखला पुन: बाधित हो गई है। कोरोना की पहली लहर के कारण कई कंपनियां और कारोबारी क्षेत्र अभी परेशानियों से उबरे भी नहीं हैं और फिर कोरोना के दूसरे नए झटके से वे मुसीबत में पड़ गए हैं। औद्योगिक संगठन पिछले वर्ष लगाए गए पूर्ण लॉकडाउन जैसे उपायों से बचने की सलाह दे रहे हैं। हाल ही में उद्योग चैंबर सीआइआइ ने कोरोना की दूसरी घातक लहर के मद्देनजर देश के 710 सीईओ के बीच एक सर्वेक्षण किया है। इस सर्वेक्षण में 70 फीसद सीईओ ने कहा कि लॉकडाउन श्रमिकों की आवाजाही, वस्तुओं की आपूर्ति, उत्पादन को प्रभावित करते हुए रोजगार और अर्थव्यवस्था पर अत्यधिक प्रतिकूल प्रभाव डालेगा।

ऐसे में देशभर में कोरोना की दूसरी घातक लहर से लॉकडाउन के कारण उद्योग-कारोबार की बढ़ती चिंताओं को रोकने, प्रवासी मजदूरों को पलायन की मुश्किलों से बचाने और देश की विकास दर के वैश्विक अनुमानों को साकार करने के मद्देनजर एक बार फिर कोरोना से दूसरे महायुद्ध की नई रणनीति जरूरी दिखाई दे रही है। इस रणनीति में जान बचाने के साथ-साथ आजीविका भी बचाने की प्राथमिकता के साथ कुछ विशेष बातों पर ध्यान देना होगा। भारत में कोरोना वैक्सीन के अधिकतम निर्माण और वितरण की रणनीति कारगर रूप से क्रियान्वित की जानी होगी। ज्ञातव्य है कि देश में 18 अप्रैल तक कोरोना टीके की 12.5 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी है। सरकार के द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति ने रूस में तैयार टीके स्पूतनिक वी के इस्तेमाल के साथ-साथ विदेशी टीकों को देश में मंजूरी देने की प्रक्रिया में तेजी लाने का रास्ता साफ कर दिया है। सरकार ने 14 अप्रैल को इंजेक्शन रेमडेसिविर का उत्पादन करीब दोगुना यानी 78 लाख वायल (शीशी) प्रति माह करने की मंजूरी दी है। निसंदेह देश में जहाँ अधिकतम टीकाकरण जरूरी है, वहीं टीकों के अधिकतम उत्पादन के साथ टीका निर्माण करने वाली कंपनियों को खुले बाजार में टीका मुहैया कराने का अवसर भी शीघ्रतापूर्वक दिया जाना लाभप्रद होगा।

देश में कोरोना टीका निर्माताओं को टीका निर्माण के लिए वित्तीय सहायता के साथ अधिक उत्पादन करने का प्रोत्साहन दिया जाना होगा। इस बार लॉकडाउन जैसी कठोर पाबंदी लगाने वाली राज्य सरकारों और नियोक्ताओं के द्वारा श्रमिकों और कर्मचारियों को भरोसेमंद तरीके से उनके कार्यस्थल या आवास पर रुकने की व्यवस्था करनी होगी। लेकिन जो श्रमिक अपने घर लौटना चाहते है, उन प्रवासी श्रमिकों के लिए उपयुक्त परिवहन व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी होगी। गाँवों में लौटते प्रवासी कामगारों के रोजगार के लिए मनरेगा को प्रभावी बनाया जाना होगा। चालू वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में मनरेगा के मद पर रखे गए 73,000 करोड़ रुपए के आबंटन को बढ़ाया जाना होगा। चूंकि क्वाड्रीलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग (क्वाड) ग्रुप के चार देशों-भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के द्वारा वर्ष 2022 के अंत तक एशियाई देशों को दिए जाने वाले कोरोना वैक्सीन के 100 करोड़ डोज का निर्माण भारत में किया जाना सुनिश्चित किया गया है, अतएव भारत के द्वारा कोरोना वैक्सीन के संसाधन के जुटाने के लिए क्वाड देशों से शीघ्र वित्तीय और आधारभूत सहयोग लेकर व्यापक टीका निर्माण कार्य आगे बढ़ाना होगा।

जिन राज्यों में लॉकडाउन जैसी पाबंदियां लगाई गई हैं, उनमें राज्य सरकारों के द्वारा महाराष्ट्र राज्य की तरह राहत पैकेज दिया जाना होगा। कोरोना से प्रभावित हो रहे उद्योग-कारोबार को राहत देने के लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की पेचिदगियाँ भी कम की जानी होगी। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) के लिए नई राहत शीघ्र घोषित की जानी होगी। सरकार के द्वारा गत वर्ष 2020 में कोविड-19 की पहली लहर के बीच घोषित किए गए वित्तीय मदद एवं ऋण में सहायता जैसे विभिन्न उपाय अब फिर दोहराए जाने होंगे ।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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