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चिंतन: शिक्षा के मंदिरों को इस राजनीति से दूर ही रखें

विद्यार्थी परिषद से जुड़े स्टूडेंट का आरोप है कि हैदराबाद के मुसलिम लीग के एक नेता की शह पर कैंपस में ये गतिविधियां जारी थी।

चिंतन: शिक्षा के मंदिरों को इस राजनीति से दूर ही रखें
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हैदराबाद यूनिवर्सिटी के छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या बेहद दुखद है। किसी भी छात्र की खुदकुशी अफसोसजनक होती है। उसके कारण चाहे जो हों। रोहित दलित समुदाय से थे और अंबेड़कर स्टूडेंट एसोसिएशन के सदस्य भी थे। अब तक की जांच-पड़ताल से स्पष्ट है कि उनकी स्टूडैंट एसोसिएशन ने कुछ ऐसे मुद्दों पर प्रदर्शन किए थे, जिन्हें लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने विरोध किया था। जिन छात्रों ने मुंबई सीरियल बम धमाकों के जिम्मेदार याकूब मेनन की फांसी का विरोध किया, उनमें रोहित वेमुला भी थे। यही नहीं, उन्होंने मुजफ्फरनगर और भी हैं फिल्म का प्रदर्शन भी किया था।

विद्यार्थी परिषद से जुड़े स्टूडेंट का आरोप है कि हैदराबाद के मुसलिम लीग के एक नेता की शह पर कैंपस में ये गतिविधियां जारी थी। सोशल मीडिया पर तो एक युवती ने यहां तक लिखा है कि जिन छात्रों ने कैंपस में बीफ पार्टी दी थी, उनमें रोहित भी शामिल थे। जब पड़ौस के संसदीय क्षेत्र सिकंद्राबाद के भाजपा सांसद और केन्द्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय को इसकी जानकारी मिली, तब अगस्त में उन्होंने केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी को लिखे पत्र में कहा कि कैंपस जातिवादी, अतिवादी और राष्ट्र विरोधी राजनीति का अड्डा बनता जा रहा है।

दत्तात्रेय ने विवि प्रशासन पर मूकदर्शक बने रहने का आरोप लगाया था। मानव संसाधन मंत्रालय ने विश्वविद्यालय को एक पैनल बनाने का आदेश दिया जिसने रोहित सहित पांच छात्रों के निलंबन का फैसला किया। छात्रों और फैकल्टी के विरोध के बाद कुलपति अप्पा राव पिंदिले ने उनके अकादमिक कोर्स से निलंबन का फैसला वापस ले लिया ताकि वह फैलोशिप से हाथ न धो बैठें। इसके बदले में उन्हें सिर्फ हॉस्टल से निलंबित करने का फैसला किया गया। इसी बीच एक छात्र के अभिभावकों ने निलंबन को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी।

यही नहीं, कार्रवाई के विरोध में रोहित और दूसरे छात्रों ने खुले आसमान के नीचे कैंपस में ही रहना शुरू कर दिया। इससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया। रोहित ने फांसी लगाने से पहले जो पत्र लिखा है, उसमें अपने इस कदम और फैसले के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। यहां तक लिखा है कि वह इसके लिए उसकी अपनी मनोदशा और बचपन में उसके साथ हुआ भेदभाव का व्यवहार जिम्मेदार है, जो अब भी उसके साथ जारी है। कैंपस में घटी इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को आमतौर पर राजनीतिक तूल दिए जाने से अतीत में बचा जाता रहा है परन्तु चूकि इस पूरे प्रकरण में कहीं न कहीं एक केन्द्रीय मंत्री का पत्र है। भाजपा की छात्र इकाई एबीवीपी है।

मानव संसाधन मंत्रालय के जांच के आदेश हैं और स्मति ईरानी भी हैं, जो अमेठी पहुंचकर राहुल गांधी को चुनौती देती रही हैं, इसलिए कांग्रेस उपाध्यक्ष तुरंत हैदराबाद यूनिवर्सिटी के कैंपस पहुंच गए और सीधे केन्द्रीय मंत्री के इस्तीफे की मांग कर डाली। बाकी दल भी कहां पीछे रहने वाले थे। ममता बनर्जी ने अपने सांसद को हैदराबाद जाने का कहा। मायावती ने दो जांच दल भेज दिए हैं। कवि अशोक वाजपेयी ने असहिष्णुता की तर्ज पर डीलिट की उपाधि लौटाने का ऐलान कर दिया है।

यानी इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर भी राजनीति शुरू हो गई है। कांग्रेस की एक नेता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर चुप्पी साधने का आरोप लगाकर उन्हें भी घसीटने की कोशिश की है। यह सब अफसोसनाक है। कम से कम शिक्षा के मंदिरों को तो इस तरह की क्षुद्र राजनीति से दूर ही रखा जाना चाहिए।

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