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चिंतन: झूठ व असहयोग की राजनीति उचित नहीं

पूरा देश देख रहा है कि कांग्रेस जिस जीएसटी बिल को लेकर खुद आई थी, अब इसे पास करने का वक्त है, तो वह यू-टर्न लेकर असहयोग कर रही है।

चिंतन: झूठ व असहयोग की राजनीति उचित नहीं
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कांग्रेस का झूठ एक बार फिर उजागर हुआ है। इस बार इस पार्टी के ही वरिष्ठ नेता और उसकी सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे मनीष तिवारी ने कांग्रेस को झूठलाया है। कांग्रेस के प्रवक्ता जैसे अहम पद की जिम्मेदारी संभाल चुके नेता तिवारी ने कहा है कि चार साल पहले 2012 में 16-17 जनवरी की रात को सेना की दो टुकड़ियों ने सही में बगैर सरकार की इजाजत के दिल्ली की ओर कूच किया था। उस समय सेना की कमान जनरल वीके सिंह संभाल रहे थे और केंद्र में डा. मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्रित्व में कांग्रेस नीत यूपीए की सरकार थी।

एक अंग्रेजी अखबार ने 4 अप्रैल 2012 को सूत्रों के हवाले से खबर छापी थी, जिसमें दावा किया गया था कि तख्तापलट के मकसद से हरियाणा के हिसार में सेना की 33वीं आम्र्ड डिविजन की यूनिट ने दिल्ली की ओर कूच किया। यूनिट के साथ 48 टैंक ट्रांसपोर्टर्स थे। इस पर आम्र्ड फाइटर व्हीकल (एएफवी) लदे थे। यूनिट को नजफगढ़ के पास रोक कर वापस भेजा गया। आगरा में 50वीं पैरा ब्रिगेड की एक दूसरी टुकड़ी पालम तक पहुंची गई थी। उसे वहीं रोक कर वापस भेजा गया।

खुफिया एजेंसियों ने सरकार को अलर्ट किया। उस वक्त सेना प्रमुख रहे जनरल वीके सिंह का केंद्र सरकार के साथ उम्र विवाद चल रहा था और उन्होंने 16 जनवरी को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई थी। जब यह खबर आई तो तत्कालीन मनमोहन सरकार ने इसे तथ्यहीन करार दिया था। तब यूपीए सरकार ने कहा था कि सेना की कोई भी टुकड़ी ने दिल्ली की ओर कूच नहीं किया, यह खबर गलत है। उस समय के रक्षा मंत्री एके एंटनी ने तो संसद में बाकायदा बयान दिया था कि सेना के दिल्ली कूच की खबर गलत है।

अब कांग्रेस के नेता पूर्व सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी कह रहे हैं कि अखबार की 'सेना का दिल्ली कूच' वाली खबर सही है। वे प्रमाण भी दे रहे हैं कि यह घटना तब कि है जब वह खुद रक्षा मंत्रालय की स्थाई समिति के सदस्य थे और इसलिए इस खबर की सच्चाई से वाकिफ हैं। यह एक दुर्भाग्यपूर्ण लेकिन सच घटना थी। अब सवाल उठता है कि यदि यह सही बात थी, तो फिर मनमोहन सरकार ने इसे गलत क्यों बताया था? और बड़ा सवाल यह है कि जब यूपीए सरकार इसे गलत बता रही थी, तब मनीष तिवारी ने सच क्यों नहीं बोला? इतने दिन कहां थे? अब जबकि पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह मोदी सरकार में मंत्री हैं, तब क्यों बोल रहे हैं।

क्या मनीष तिवारी को इस चीज का भान है कि उनके इस कथन से कांग्रेस और यूपीए सरकार झूठी साबित हो रही है। जबकि कांग्रेस अभी कह रही है कि मनीष तिवारी सच नहीं बोल रहे हैं। एंटनी ने दोहराया है कि 'मैंने उस वक्त संसद में जो बयान दिया था, वही सही है।' ऐसे में देश क्या समझे? दोनों में से सच कौन बोल रहा है? पिछले इतिहास को देखें तो कांग्रेस और उसके नेता तथ्यहीन बात कहने और फिर यू-टर्न लेते रहे हैं।

पूरा देश देख रहा है कि कांग्रेस जिस जीएसटी बिल को लेकर खुद आई थी, अब इसे पास करने का वक्त है, तो वह यू-टर्न लेकर असहयोग कर रही है। गत लोकसभा चुनाव में इतनी बड़ी हार मिलने के बाद भी लगता है कांग्रेसी नेता सबक नहीं लेना चाहते हैं, जबकि इलेक्टोरल पॉलीटिक्स में पार्टी व नेता की साख बड़ी बात होती है। सियासतदां इसे जल्द समझ लें तो अच्छा।

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