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शह-मात की लड़ाई से प्रभावित होता क्रिकेट

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) एक बार फिर गलत कारणों से सुर्खियों में है।

शह-मात की लड़ाई से प्रभावित होता क्रिकेट
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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) एक बार फिर गलत कारणों से सुर्खियों में है। कहा जा रहा है कि दो खेमों में वर्चस्व की लड़ाई को लेकर यह विवाद पैदा हुआ है। और बात राजस्थान क्रिकेट संघ (आरसीए) के निलंबन तक जा पहुंची है। दरअसल, मामला पूर्व आईपीएल कमीश्नर ललित मोदी का आरसीए के अध्यक्ष पद के लिए चुने जाने का है। बीसीसीआई द्वारा नियमों का हवाला दे यह निलंबन एक नया टकराव ही पैदा करेगा, जो कि न तो क्रिकेट और ना ही बीसीसीआईके पक्ष में जाएगा। इससे पूर्व बोर्ड आईपीएल में सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग को लेकर चर्चा में था। जिसकी जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही है। इसमें बीसीसीआई अध्यक्ष एन र्शीनिवासन के दामाद सहित कईखिलाड़ियों का नाम आया है। हालांकि र्शीनिवासन अभी अध्यक्ष पद पर नहीं हैं। उनको सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अपने पद से हटने पर बाध्य होना पड़ा था पर बोर्ड में उनके प्रभाव से इंकार नहीं किया जा सकता। यह जगजाहिर हैकि ललित मोदी और एन र्शीनिवासन एक दूसरे के प्रतिद्वंद्वी हैं और उनमें आपसी दुराव से बीसीसीआई और एक हद तक क्रिकेट को नुकसान उठाना पड़ रहा है। देखा जाए तो इस हालिया विवाद की पटकथा गर्त वर्ष नवंबर में ही लिखी जा चुकीथी जब ललित मोदी ने आरसीए के अध्यक्ष पद के लिए नामांकन किया था। उन्हें रोकने के लिए बीसीसीआई कोर्ट भी गया था, परंतु सुप्रीम कोर्ट ने उसकी अपील खारिज करते हुए दो पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिए, जिनकी देख रेख में चुनाव संपन्न हुए। आरसीए पर पकड़ को देखते हुए ललित मोदी की जीत पहले से ही तय मानी जा रही थी। ललित मोदी पिछले चार साल से लंदन में रह रहे हैं। गत वर्ष सितंबर में बीसीसीआई ने उन पर हमेशा के लिए प्रतिबंध भी लगा दिया था। बोर्ड की अनुशासनात्मक समिति ने उन पर अनुशासन और खराब व्यवहार के आरोप लगाए थे। और कहा था कि उन्होंने बीसीसीआई को नुकसान पहुंचाने वाले कदम उठाए थे। अब आरसीए का कहना हैकि यह चुनाव राजस्थान खेल एक्ट के तहत हुए हैं। इसके चलते बीसीसीआई उसको निलंबित नहीं कर सकता। वहीं बीसीसीआई का कहना हैकि वह नियमों के मुताबिक ऐसा कर सकता है। अब आरसीए के निलंबन का यह मामला एक बार फिर अदालत में जाता दिखाईदे रहा हैऔर इस शह मात की लड़ाईमें कुछ और मामले अदालतों में दर्ज हो जाएं तो आश्चर्य नहीं होगा। इसमें जीत किसी की भी हो पर हार खेल की होगी। क्रिकेटर्स इसमें नाहक ही पिसेंगे। क्योंकि निलंबन के बाद खिलाड़ी बेवजह प्रभावित होंगे। वह भी उन दो लोगों के कारण जो क्रिकेट की बेहतरी की दुहाई देते हैं। बीसीसीआई को यह व्यवस्था करनी चाहिए कि इससे राजस्थान के खिलाड़ी प्रभावित नहीं हों और वे अपना खेल जारी रख सकें। क्योंकि यह बोर्ड का मामला हैइसमें क्रिकेट को नहीं घसीटा जाना चाहिए। राजस्थान कई बार रणजी ट्राफी जीत चुका है। ऐसे मामलों में वरिष्ठ खिलाड़ियों को भी आगे आने की जरूरत है। उन्हें इस पर राय रखनी चाहिए।

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