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ऑटो इंडस्ट्री में सुस्ती और ऑटो एक्सपो

भारत में मोटराइजेशन पर नजर डालें तो अब भी यहां 1000 नागरिकों पर कारों का औसत 100 से भी कम है।

ऑटो इंडस्ट्री में सुस्ती और ऑटो एक्सपो
नई दिल्ली. ग्रेटर नोएडा में बारहवां ऑटो एक्सपो उफान पर है। उम्मीद की जा रही है कि यह सुस्त पड़ी ऑटो इंडस्ट्री में जान फूंकेगा। लोगों में कार के प्रति दिवानगी का अंदाजा यहां आने वाली भीड़ से लगाया जा सकता है। इसी बीच देश में कार के इस जुनून को पैदा करने और मध्य वर्ग को कार से रू-ब-रू कराने के साथ-साथ मारुति कंपनी को नया मुकाम देने वाली कार मारुति-800 चुपके से अलविदा कह गई।
प्रकृति का शाश्वत नियम है कि जिस चीज का आगाज हुआ है उसे एक दिन अंजाम तक पहुंचना होता है। गत वर्ष इसके पहले मालिक हरपाल सिंह का भी निधन हो गया था। अब इस वर्ष 18 जनवरी को गुणगांव में मारुति-800 की 30 वर्षों की यात्रा थम गई। यह देश में 2004 तक सबसे ज्यादा बेची जाने वाली कार थी। इसने करोड़ों लोगों के कार के सपने को पूरा किया, शायद इसकी वजह कार की कम कीमत थी। लिहाजा इसे पीपल्स कार भी कहा गया। इसका उत्पादन बंद करने के पीछे कंपनी का तर्क है कि चूंकि प्रदूषण के नये नियम आ गए हैं, लिहाजा इस कार में और निवेश नहीं करना चाहती है। हालांकि बदले दौर में लोगों की पसंद भी बदली है और टाटा नैनो जैसे प्रतिद्वंद्वी भी मौदान में आए हैं।
आज मध्यवर्ग ज्यादा सशक्त होकर उभरा है। वह कार में अतिरिक्त फीचर भी चाहता है। इन्हें लुभाने के लिए कई कार कंपनियां आज मैदान में हैं। ऑटो एक्सपो में ही देश-दुनिया की 47 से ज्यादा कार निर्माता कंपनियों ने अलग-अलग 69 नए मॉडल लान्च किए हैं। जिसमें से 43 केवल भारत के लिए हैं। देश का पहला ऑटो एक्सपो 1986 में दिल्ली के प्रगति मैदान में हुआ था। उसके बाद से लगातार ग्यारह शो वहीं हुए परंतु दर्शकों के बढ़त भीड़ से यह जगह छोटी पड़ने लगी, लिहाज इस बार इसे नोएडा ले जाया गया। देश में कार के बाजार को बढ़ाने में इस शो की अहम भूमिका मानी जाती है।
भारत में मोटराइजेशन पर नजर डालें तो अब भी यहां 1000 नागरिकों पर कारों का औसत 100 से भी कम है। वहीं ब्राजील जैसे देशों के मामले में यह औसत 200 है। बीते वर्ष भारत में कारों की बिक्री 9 फीसदी से ज्यादा की गिरावट में रही है। आर्थिक मंदी के कारण ऑटो इंडस्ट्री को मांग में कमी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि देश का कार बाजार भले ही सुस्त है, लेकिन यहां एक बड़ा बाजार है। यही वजह है कि कंपनियां भविष्य को लेकर बहुत उत्साहित हैं। इसकी पुष्टि ऑटो एक्सपो से भी होती है।
सुस्ती की वजह से दिग्गज कार कंपनियों को भी अपनी रणनीति बदलनी पड़ रही है। अब कंपनियां मध्य व उच्च मध्यवर्ग को लक्ष्य करके छोटे व सस्ते एसयूवी लांच करने पर जो दे रही हैं, पेट्रोल के महंगा होने के कारण डीजल कारों को भी विकल्प के तौर पर पेश किया जा रहा है। मारुति सुजुकी ने भी अपनी रणनीति बदलते हुए अक्टूबर 2012 में मारुति ऑल्टो-800 बाजार में उतार दिया था और अब सलेरियो पेश किया है। दुनिया की सातवीं सबसे बड़ी भारतीय ऑटो इंडस्ट्री पर विश्व की नजर है। जिस तरह से कंपनियां ने अपने अलग अलग मॉडल पेश किए हैं उससे स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में ऑटो बाजार में जंग तेज होगी। 12वें एक्सपो में कंपनियों का लगने वाला जमघट यह साफ संकेत दे रहा है कि भारतीय ऑटो इंडस्ट्री का भविष्य उज्जवल है।
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