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चिंतनः विश्व अर्थव्यवस्था का सिरमौर बनेगा भारत

भारत की जीडीपी 2040 अरब डॉलर है जो आकार के मामले में दुनिया में दसवें स्थान पर है।

चिंतनः विश्व अर्थव्यवस्था का सिरमौर बनेगा भारत
ब्रिटेन के आर्थिक शोध संस्थान सेंटर फॉर इकोनॉमिक्स बिजनेस एंड रिसर्च (सीईबीआर) की रिपोर्टके मुताबिक अगले 15 वर्षों में यानी 2030 तक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आकार के आधार पर भारत दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। वहीं 2050 तक यह चीन और अमेरिका को पछाड़कर दुनिया की नंबर एक अर्थव्यवस्था बन जाएगा और तो और रिपोर्ट में अनुमान व्यक्त किया गया है कि 2019 तक भारत ब्रिटेन को भी पीछे छोड़ते हुए कॉमनवेल्थ देशों में सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।
दरअसल, अभी भारत की जीडीपी 2040 अरब डॉलर है जो आकार के मामले में दुनिया में दसवें स्थान पर है। जबकि पहले और दूसरे स्थान पर अमेरिका और चीन हैं। माना जा रहा है कि 2030 तक भारत की जीडीपी पांच गुना बढ़कर 10133 अरब डॉलर हो जाएगी।
जाहिर है, इस दौरान वह जापान, रूस, फ्रांस, र्जमनी, ब्राजील, इटली, ब्रिटेन से आगे निकल जाएगी। ऐसे में विश्व व्यवस्था में आए इस बदलाव के बाद कई आर्थिक और राजनीतिक संगठनों में फेरबदल देखने को मिलेंगे। भारतीय अर्थव्यवस्था का लगातार विस्तार हो रहा है। यह तेजी से आगे बढ़ रही है। हालांकि इसके कई कारण हैं।
मसलन, यहां जीवंत लोकतंत्र है, जिसमें सभी वगरें की भागीदारी है। बड़ी कामकाजी आबादी युवा है। जैसे-जैसे शिक्षा का विस्तार हो रहा है, वैसे-वैसे नई संभावनाएं आकार ले रही हैं। आबादी बड़ी होने से यहां बाजार भी बड़ा है। लिहाजा, उत्पादन का उपभोग होने में समस्या नहीं है। यही वजह है कि विश्व की नामी कंपनियां भारत में आ रही हैं।
मालूम हो कि विश्व बैंक के अनुसार क्रय शक्ति के आधार पर भारत पहले ही दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। अर्थात खरीद शक्ति के मामले में हम अमेरिका और चीन के बाद आते हैं। 1991 में आर्थिक सुधार के बाद शुरू हुए उदारीकरण के दौर ने भी भारत को तेजी से विकास के रास्ते पर लाने में मदद किया है। मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद से कई सुधारवादी कदम उठाए हैं जिसके परिणामस्वरूप वैश्विक मंदी के दौरमें भी भारतीय अर्थव्यवस्था सात फीसदी से अधिक विकास दर हासिल करने में सफल रही है।
हालांकि यह बढ़त बनाए रखने के लिए अभी कई बुनियादी सुधार करने की जरूरत है। जैसे कि वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि ढांचागत सुधारों को जारी रखना, वस्तु एवं सेवा कर बिल (जीएसटी) को जल्द कानून का शक्ल दिलवाना, प्रत्यक्ष करों को तर्कसंगत बनाना और कारोबार सुगमता के क्षेत्र में और बेहतर करना उनकी प्राथमिकता में शामिल हैं।
जीएसटी के आने से पूरा देश एक बाजार में तब्दील हो जाएगा। अलग-अलग अप्रत्यक्ष करों के स्थान पर पूरे देश में एक कर लागू होगा। जाहिर है, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और स्टार्ट अप इंडिया आदि कार्यक्रम जैसे-जैसे आगे बढ़ेंगे, लोगों के हाथों में रोजगार आएंगे, उनकी आमदनी बढ़ेगी। तो देश की अर्थव्यवस्था भी तीव्र गति से आगे बढ़ेगी। इस प्रकार देश अपनी गरीबी और कुपोषण की समस्या से निजात पा सकेगा।
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