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योग को धर्म से जोड़ना अनुचित

संयुक्त राष्ट्र ने भी माना है कि योग स्वास्थ्य के लिए आवश्यक सभी जरूरी ऊर्जा प्रदान करता है।

योग को धर्म से जोड़ना अनुचित
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योग को लेकर मौजूदा विरोध उचित नहीं है। इसे किसी धर्म विशेष से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि योग किसी भी धर्म और संप्रदाय से नहीं जुड़ा है। यह धर्म, नस्ल, जाति, वर्ण, क्षेत्र या भाषा के आधार पर भेदभाव से परे है। यह प्रेम, अहिंसा, करुणा और सबको साथ लेकर चलने की बात करता है, इसलिए इसमें पूरी दुनिया को एक परिवार के तौर पर बांधने की क्षमता है। लोग यदि योग को समझ लेंगे और उसे महसूस कर लेंगे तो दुनिया में खासा बदलाव आ जाएगा। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर केंद्र सरकार ने दिल्ली के राजपथ सहित देश भर में योग कार्यक्रम का आयोजन करने की योजना बनाई है जिसमें योग के करीब 14 आसन किए जाएंगे। राजपथ पर यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में होगा।
इस योग दिवस पर किए जाने वाले आसनों में सूर्य नमस्कार शामिल होने पर एक वर्ग के कुछ नेताओं और धर्मगुरुओं ने आपत्ति जताई थी। जिसके बाद केंद्र सरकार ने सूर्य नमस्कार को कार्यक्रम से हटा लिया है। जाहिर है, योग के दौरान वर्ग विशेष की भावनाएं आहत न हों इसका खयाल रखा गया है। बीते साल जिस तरह से 21 जून को हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र महासभा की ओर से मंजूरी दी गई थी, उसे दुनिया में भारत की बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा गया था। उससे देश की प्राचीन विद्या योग को वैश्विक मान्यता मिली थी। भारत के लिए सबसे खुशी की बात ये भी थी कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव का 193 में से 177 सदस्य देशों ने सर्मथन किया था, जिसमें कई मुस्लिम देश भी शामिल हैं।
इससे पहले इतने भारी सर्मथन के साथ महासभा में कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ था। इतना ही नहीं संयुक्त राष्ट्र में दूसरा रिकॉर्ड 90 दिन में किसी देश के प्रस्ताव को पेश करके उसे लागू कराने का भी बना था। नरेंद्र मोदी ने 21 जून को योग दिवस मनाने का सुझाव इसलिए दिया था, क्योंकि उस दिन उत्तरी ध्रुव में दिन की अवधि सबसे लंबी होती है और दुनिया के कई हिस्सों में यह दिन महत्वपूर्ण माना जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने भी माना है कि योग स्वास्थ्य के लिए आवश्यक सभी जरूरी ऊर्जा प्रदान करता है। लिहाजा योग के फायदे की जानकारियां फैलाना दुनियाभर में लोगों के स्वास्थ्य के हित में होगा। हालांकि विश्व में योग के बारे में कई तरह की भ्रांतियां फैल गई हैं। अंतरराष्ट्रीय पटल पर मान्यता मिलने से उम्मीद है कि वे भी दूर होंगी। योग सिर्फ आसान और मुद्राओं तक सीमित नहीं है और न ही हिंदू धर्म के प्रचार प्रसार का जरिया है। यह एक आदर्श जीवन शैली है, जो मानवीय उत्थान की ओर ले जाती है। योग और ध्यान न केवल हमारा स्वास्थ्य संवर्धन करते हैं बल्कि हमें आंतरिक और मानसिक बल भी प्रदान करते हैं। योग मस्तिष्क और शरीर, विचारों और क्रिया, संयम और पूर्णता, मानव और प्रकृति के बीच सद्भाव का समागम है, यह स्वास्थ्य और कल्याण के लिए समग्र पहल प्रदान करता है। यह लोगों को अपने आस-पास की जिंदगी के प्रति सजग बनाता है। ऐसे में जब सारी दुनिया योग की ओर आकर्षित हो रही है तब देश में इसका विरोध कहां तक जायज है?

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