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देश के कारोबारी माहौल में सुधार फायदेमंद

ऑनलाइन प्रक्रिया होने से कंपनी खोलने के लिए लंबी कागजी प्रक्रिया से भी मुक्ति मिल गई है।

देश के कारोबारी माहौल में सुधार फायदेमंद
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नई दिल्ली. विश्व बैंक की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रिपोर्ट (आसानी से कारोबार करने लायक माहौल वाले देश) में भारत की रैंकिंग में जबर्दस्त उछाला आना मोदी सरकार द्वारा बीते एक साल में इस दिशा में उठाए गए कदमों का परिणाम है। विश्व बैंक द्वारा 2002 से 189 देशों में कारोबार आरंभ करने से जुड़े कारकों के अध्ययन के आधार पर जारी होने वाली इस सूची में भारत की मौजूदा रैंकिंग 130 हो गई है, जबकि यह पहले इस मामले में 142वें स्थान पर था।

हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया मिशन यानी देश को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने या देश में उद्योग को बढ़ावा देने जैसे सपने को साकार करने के लिए जरूरी हैकि भारत इस रैंकिंग में अंडर 50 में जगह बनाए। गत वर्ष सत्ता में आने के बाद से एनडीए सरकार लगातार इस दिशा में प्रयास करती दिख रही है जिससे कि व्यवसाय की स्थापना की राह में आने वाली रुकावटें दूर हो सकें।

वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा हैकि रैंकिंग में बारह अंकों का उछाल सरकार द्वारा किए गए सुधारों के मुताबिक कम है। चूंकि विश्व बैंक ने इसमें सिर्फ एक जून तक के वस्तुस्थिति को शामिल किया है, ऐसे में इस बात की उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में भारत और बेहतर स्थिति में नजर आएगा। इससे साफ होता है कि केंद्र सरकार सही दिशों में आगे बढ़ रही है। इससे उन आलोचकों को भी जवाब मिलने की बात कही जा रही है जो मोदी सरकार पर दिशाहीन होने और आर्थिक नजरिया स्पष्ट नहीं होने का आरोप लगा रहे हैं।

विश्व बैंक दस मानकों के आधार पर यह रैंकिंग तैयार करता है जिसमें कारोबार शुरू करना, ढांचा खड़ा करने के लिए अनुमति मिलना, बिजली कनेक्शन मिलना, संपत्ति का पंजीकरण, उधार प्राप्त करना, निवेशकों के हितों की सुरक्षा, कर अदा करना, व्यापार करना, निविदा को लागू करना और विवादों का निपटारा करना शामिल हैं। इसमें निवेशकों के हितों की सुरक्षा, उधार प्राप्त करने और बिजली का कनेक्शन लेने के मामले में सबसे ज्यादा प्रगति हुई है।

अब बिजली कनेक्शन लेने के मामले में दुनिया में भारत का 70वां स्थान हो गया है जबकि एक साल पहले देश इस मामले में 137वें स्थान पर था। वहीं 2004 में भारत में कारोबार आरंभ करने में 127 दिन लगते थे जबकि 2015 में सिर्फ29 दिन लग रहे हैं। इसके अलावा कंपनी कानून में कोई कारोबार शुरू करने के एवज में कुछ रकम जमा करने वाले प्रावधान खत्म करने से भी बिजनेस फेंड्रली वातावरण बनाने में मदद मिली है।

ऑनलाइन प्रक्रिया होने से कंपनी खोलने के लिए लंबी कागजी प्रक्रिया से भी मुक्ति मिल गई है। इस तरह सरकार लालफीताशाही पर लगाम लगाने में कुछ हद तक कामयाब रही है। हालांकि अभी भी कई क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है जैसे लाइसेंस, क्लीयरेंस आदि लेने की प्रक्रिया में खर्च होने वाली रकम व वक्त को और कम करने, आधारभूत ढांचा विकसित करने और जीएसटी बिल व र्शम कानूनों में सुधार की दिशा में आगे बढ़ाना होगा।

कुल मिलाकर एक साल में भारत जैसे बड़े देश के लिए यह बड़ी उपलब्धि है। एक तरफ विश्व के प्रमुख देश मंदी का सामना कर रहे हैं। वहीं भारत विकास की सीढ़ियां चढ़ रहा है। यहां विदेशी निवेश में भी वृद्धि दर्ज की जा रही है। ऐसे में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में देश की रैंकिंग में सुधार हमारी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत है।

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