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चिंतन: संसद की गरिमा की रक्षा का दायित्व विपक्ष का भी

अनप्रोडक्टिव मुद्दों को लेकर कांग्रेस लगातार इस प्रयास में है कि संसद ठप रहे।

चिंतन: संसद की गरिमा की रक्षा का दायित्व विपक्ष का भी
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संसद में फिर एक बार कामकाज नहीं हो रहा है। रेल बजट और आम बजट पेश होने और इस पर चर्चा के अलावा कोई भी विधायी कार्य नहीं हो पा रहा है। बजट सत्र के दौरान करीब 32 बिलों पर चर्चा होना है, ताकि पास हो सके। लेकिन विपक्ष रोड़ा अटकाया हुआ है। खास कर कांग्रेस। अनप्रोडक्टिव मुद्दों को लेकर कांग्रेस लगातार इस प्रयास में है कि संसद ठप रहे। सरकार की ओर से विपक्ष से बार-बार अपील की गई है कि संसद में वे चर्चा में भाग लें, मुद्दों पर बहस करें। सरकार के किसी बिल या प्रस्ताव से असहमत हों तो भी अपनी बात रखें, अपना सुझाव दें, लेकिन विपक्ष पर इस अपील का कोई असर पड़ता नहीं दिखाई दे रहा है। कांग्रेस ने तो जैसे ठान ही लिया है कि संसद नहीं चलने देंगे। कांग्रेस के अड़ियल रुख के चलते पिछले दो सत्र बेकार गए। इसलिए जब बजट सत्र 23 फरवरी को शुरू हो रहा था, उसके ठीक दो दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी दलों से अपील की थी कि सरकार की आलोचना करें, लेकिन चर्चा में भाग भी लें और संसद भी चलने दें। इस अपील के बावजूद कांग्रेस इस प्रयास में लग रही है कि पहले दो सत्रों की तरह बजट सत्र भी धुल जाए। जेएनयू कन्हैया प्रकरण के बाद तो कांग्रेस और वाम दलों में अघोषित गठजोड़ भी दिख रहा है। इसलिए पीएम मोदी ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के अभिभाषण पर धन्यवाद ज्ञापन के दरम्यान कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष को अपने संवैधानिक कर्तव्यों की याद दिला कर सरकार के दायित्व का ही निर्वहन किया है। इसके लिए पीएम ने कांग्रेस के तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों पंडित जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के संसद में विपक्ष के कर्तव्यों और सदन में गरिमा बनाए रखने को लेकर दिए भाषणों का जिक्र किया। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने एक दिन पहले संसद में जिस तरह पीएम मोदी पर अपने मंत्रियों-नेताओं की बात नहीं सुनने की कह कर निशाना साधा था, मोदी ने उसका भी जवाब दिया। उन्होंने राहुल को अपनी पार्टी कांग्रेस की सरकार में पीएम रहे मनमोहन के समय आर्डिनेंस फाड़ने की याद दिलाई। दागी नेताओं के फेवर में लाए गए इस आर्डिनेंस को राहुल ने ही फाड़ा था। यह पूरे देश को पता है। लोग यह भी जानते हैं कि राहुल संसद सत्र के दौरान बिना किसी को कुछ बताए गायब हो गए थे। इससे संसद, अपनी पार्टी की सरकार और वरिष्ठ नेताओं के प्रति राहुल के मन में 'कितना आदर' है व सार्वजनिक जीवन में उनका आचरण कैसा है, इसका पता चलता है। पीएम ने जो एक बड़ी बात कही है कि हर हाल में संसद चलनी चाहिए। इससे कोई असहमत नहीं होगा। पूर्व लोकसभा स्पीकर सोमनाथ चटर्जी भी संसद की र्मयादा बनाए रखने की अपील करते थे। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी सदन की कार्यवाही सुचारू चलने की सलाह दी है। लेकिन इधर के वर्षों में संसद सत्र की गुणवत्ता का जिस तेजी से क्षरण हुआ है, यह वाकई गंभीर चिंता की बात है। इसका जिक्र पीएम ने भी किया। उन्होंने कहा कि संसद में गंभीर चर्चा नहीं होने के चलते नौकरशाही पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। सांसद जनता के प्रति जिम्मेदार हैं, अफसर नहीं और संसद ही अफसरों को उसकी जिम्मेदारी का एहसास कराती है, इसलिए जब तक संसद में मुद्दों पर चर्चा नहीं होगी, देश का भला नहीं होगा। बिल को रोक कर कुछ भी हासिल नहीं होगा। संसद की गरिमा की रक्षा का दायित्व विपक्ष का भी है।
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