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चिंतन: जल संकट दूर करने को समग्र नीति की जरूरत

देश में सूखे और पानी को लेकर संकट गहराया हुआ है। समय पर राज्य सरकारों के सजग नहीं होने के चलते आम जनता को इससे दो-चार होना पड़ रहा है।

चिंतन: जल संकट दूर करने को समग्र नीति की जरूरत
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देश में सूखे की मार और पानी के लिए जारी संग्राम के बीच मौसम विभाग की ओर से सुकून देने वाली खबर आई है। मौसम विभाग ने अनुमान जाहिर किया है कि इस साल सामान्य से छह फीसदी अधिक 110 फीसदी बारिश होगी। पिछले साल 104 फीसदी वर्षा दर्ज की गई थी। सूखे से तरसते देश के लिए इससे राहत की खबर और क्या हो सकती है। इस अनुमान में गौर करने लायक बात यह है कि देश के जिस हिस्से में सूखे की मार ज्यादा है, वहां भी अधिक वर्षा होने की बात कही गई है।

इस वक्त महाराष्ट्र के मराठवाड़ा, विदर्भ क्षेत्र और मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र सबसे अधिक सूखे के हालात का सामना कर रहे हैं। निश्चित ही अधिक वर्षा होगी तो सरकार के लिए भी राहत की बात होगी, कारण कि खरीफ फसलों की अधिक पैदावार होगी। अनाज की बंपर उपलब्धता से पीडीएस स्कीमों में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी और महंगाई पर नियंत्रण रखने में भी मदद मिलेगी। बड़ा लाभ यह होगा कि अधिक वर्षा होने से भूजल का स्तर सुधरेगा। महाराष्ट्र में भूजल का स्तर सूख जाने के चलते ही पानी का भीषण संकट उत्पन्न हुआ है। लेकिन ये सारी स्थिति मौसम विभाग के अनुमान के हकीकत में बदलने पर निर्भर करेगी। फिलहाल देश में सूखे और पानी को लेकर संकट गहराया हुआ है। समय पर राज्य सरकारों के सजग नहीं होने के चलते आम जनता को इससे दो-चार होना पड़ रहा है।

इन समस्याओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक को सुनवाई करनी पड़ रही है। सूखे का सामना कर रहे महाराष्ट्र में आईपीएल मैच के दौरान पानी की बर्बादी पर सुप्रीम कोर्ट को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के प्रति सख्त रुख अपनाना पड़ा और कठोर हिदायत देनी पड़ी कि आप मैच पानी की उपलब्धता वाले क्षेत्र में कराएं। महाराष्ट्र के ही लातूर में जल संकट इतना गहरा गया कि सरकार को ट्रेन से पानी उपलब्ध करानी पड़ी है। मध्य प्रदेश में नलकूप से पानी भरने को लेकर एक लड़की की हत्या कर दी गई। सूखे से निपटने में हीलाहवाली के चलते सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात, हरियाणा और बिहार सरकार को फटकार लगाई। समय पर अगर सरकारें नहीं चेतीं, तो आने वाले समय में पेयजल के लिए देश में संग्राम छिड़ सकता है।

सूखे के चलते कृषि पर असर पड़ता है और भूजल स्तर में गिरावट आती है। केंद्र सरकार को अपनी राष्ट्रीय जल नीति में इन मुद्दों पर फोकस करना चाहिए। नीदी जोड़ो योजना भी आगे नहीं बढ़ पा रही है। नमामि गंगे योजना में भी तेजी लाने की जरूरत है। एक बड़ी बात यह है कि जब हम ईरान-कुवैत से पाइपलाइन के जरिये कच्चा तेल देश ला सकते हैं, तो हम देश भर में पानी उपलब्ध कराने के लिए पाइपलाइन का संजाल क्यों नहीं बिछा सकते हैं। हमारे देश में पानी की कमी नहीं है, नदियों की भरमार है, बस असमान उपलब्धता है। देश में ही डीआडीओ और इसरो के वैज्ञानिकों ने खारा पानी को पीने लायक शोधन करने की सस्ती तकनीक बनाई है।

सरकार को भी यह मालूम है। लेकिन लगता है कि पानी माफिया के आगे राज्य सरकारें बौनी साबित हो रही हैं। केंद्र सरकार को जल संकट दूर करने की दिशा में समग्रता में जल्द से जल्द ध्यान देना चाहिए। वरना मौसम अनुमान में ही हम संकट का समाधान ढूंढ़ते रहेंगे?

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