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व्यापमं घोटाले का सच सामने लाना जरूरी

व्यापमं की भर्तियों में हुए घोटाले में शामिल, आरोपी या गवाह रहे कई लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

व्यापमं घोटाले का सच सामने लाना जरूरी

मध्यप्रदेश के व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) की भर्तियों में हुए घोटाले में शामिल अथवा आरोपी या गवाह रहे कई लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आधिकारिक तौर पर कहा जा रहा है कि ऐसे लोगों की संख्या करीब दो दर्जन है, जबकि विरोधी दल के लोगों का कहना है कि जब से यह मामला सामने आया है तब से करीब चालीस लोग इसकी भेंटचढ़ चुके हैं। गत तीन दिनों के अंदर ही इस मामले की छानबीन करने मध्यप्रदेश गए एक पत्रकार और घोटाले की जांच में सहयोग कर रहे जबलपुर मेडिकल कॉलेज के डीन की मृत्यु ने संदेह को और गहरा कर दिया है। इनकी मौत के कारणों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। तभी यह सच्चाई समाने आएगी कि उनकी मृत्यु स्वाभाविक थी या अस्वाभाविक। हालांकि इस मुद्दे पर विपक्षी दल खासकर कांग्रेस सियासत करती दिख रही है! वह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार को घेरने की जल्दबाजी में बिना तथ्यों को जांचे सभी असामान्य मृत्यु को व्यापमं घोटाले से जोड़ रही है, यह उचित नहीं है।

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किसी की मौत पर राजनीतिक रोटी सेंकना ठीक नहीं है। सोमवार को व्यापमं द्वारा संचालित परीक्षा के माध्यम से पुलिस बल में सब-इंस्पेक्टर के पद पर भर्ती हुई अनामिका सिकरवार एक झील में मृत पाई गईं। जिसे आनन फानन में व्यापमं कांड से जोड़ दिया गया, परंतु बाद में पता चला कि उन्होंने घरेलू विवादों के कारण आत्महत्या कर ली थी। यहां गौर करने की बात यह है कि इस मामले को उजागर करने वाले शिवराज सिंह चौहान ही हैं। उन्होंने ही सबसे पहले इसकी जांच के लिए एसटीएफ का गठन किया था। अभी हाई कोर्ट की निगरानी में एसआईटी इसकी जांच कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने भी माना हैकि जांच सही दिशा में है और इसे सीबीआई को सौंपने की कोई जरूरत नहीं है। फिर भी कांग्रेस के सवालों का जवाब देते हुए राज्य सरकार ने अपनी स्थिति साफ करते हुए कहा है कि हाईकोर्ट चाहे तो वह सीबीआई से भी व्यापमं घोटाले की जांच करा सकती है। हमें न्यायिक व्यवस्था पर भरोसा करना चाहिए कि वह इस घोटाले में शामिल सभी गुनाहगारों को सख्त से सख्त सजा देगी। यह अच्छी बात है कि केंद्र सरकार भी इस मामले में गंभीरता दिखा रही है।

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वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि इस घोटाले से जुड़े लोगों की संदिग्ध हालत में मौतों की निष्पक्ष जांच होगी। अब इसके लिए जो भी जरूरी कदम उठाने आवश्यक हैं उनमें देर नहीं की जानी चाहिए। क्योंकि बाकी बचे गवाहों, आरोपियों और जांच में सहयोग कर रहे लोगों की सुरक्षा सवरेपरि है। ऐसा देखा जाता है कि इस तरह के मामलों की जांच कई बार जरूरत से ज्यादा लंबी खिंच जाती है। इस घोटाले की व्यापकता देखकर इसकी गहराइयों का अंदाज लगाया जा सकता है। दूसरी ओर विपक्ष को भी केवल संदेह के जरिए किसी नतीजे पर पहुंचने से बचना चाहिए। उनकी बातों से लग रहा है कि वे मान चुके हैं कि पत्रकार और डीन की हत्या ही की गई है, जबकि इस बारे में अभी कोई प्रमाण सामने नहीं है। साथ ही सभी संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। जब तक इनकी कार्यप्रणाली को पारदर्शी नहीं बनाया जाएगा भर्तियों में धांधली का सिलसिला रुकने वाला नहीं है।

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