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सहवाग जैसा दूजा क्रिकेटर नहीं देखा

सहवाग लंबे समय से टीम से बाहर चल रहे थे।

सहवाग जैसा दूजा क्रिकेटर नहीं देखा
दुनिया के सबसे बेहतरीन और विस्फोटक बल्लेबाजों में एक वीरेंद्र सहवाग का अपने 37वें जन्मदिन पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा के साथ ही भारतीय बल्लेबाजी के स्वर्णिम युग का पटाक्षेप हो गया। अब वे आईपीएल में भी नहीं खेलेंगे। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के क्लोन माने जाने वाले सहवाग की छवि दुनिया में ऐसे बल्लेबाज की थी जो गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाने में यकीन रखता था और दुनिया के बेहतरीन गेंदबाज भी उन्हें गेंदबाजी करने में खौफ खाते थे। सहवाग लंबे समय से टीम से बाहर चल रहे थे। मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें भारतीय टीम में अपनी वापसी की कोई उम्मीद नहीं बची थी। हालांकि कहा जा रहा है कि वे दुबई में मास्टर्स चैंपियन लीग से जुड़ने जा रहे हैं, इस लीग से जुड़ने की एक शर्त है कि खिलाड़ी को सभी तरह के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लेना चाहिए। उनके इस फैसले से उनके प्रशंसकों को निराशा हुई है कि अब उन्हें सहवाग की बल्लेबाजी देखने को नहीं मिलेगी। सहवाग अपनी तरह के अकेले बल्लेबाज रहे हैं, उनके जैसा कोई दूसरा क्रिकेटर नहीं देखा गया है। वे स्वयं सचिन के प्रशंसक हैं, लेकिन कई मायने में उनसे आगे थे। वीरेंद्र सहवाग ने अप्रैल 1999 में मोहाली में पाकिस्तान के खिलाफ अपना एकदिवसीय और नवंबर 2001 में ब्लूमफोंटेन में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपना टेस्ट कॅरियर शुरू किया था। उन्होंने 104 टेस्ट मैचों में 49.34 के औसत से 8586 रन बनाए, जिसमें 23 शतक और 32 अर्धशतक शामिल हैं। उनके टेस्ट कॅरियर की उन पारियों को नहीं भूला जा सकता है जिसमें उन्होंने दो तिहरा शतक लगाया था। उन्होंने 319 रन मार्च 2008 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ चेन्नई में और 309 रन मार्च 2004 में पाकिस्तान के खिलाफ मुल्तान में बनाए थे। इसके बाद उन्हें मुल्तान का सुल्तान कहकर पुकारा जाने लगा। इसके अलावा उन्हें नजफगढ़ का नवाब, द लिटिल तेंदुलकर जैसे उपनामों से भी पुकारा जाता है। वहीं एकदिवसीय में उन्होंने 251 मैचों में 35.05 के औसत से 8273 रन बनाए हैं जिसमें 15 शतक और 38 अर्धशतक शामिल हैं। एकदिवसीय में उन्होंने सबसे ज्यादा 219 रन वेस्टइंडीज के खिलाफ बनाए हैं। सहवाग 2011 की विश्व कप विजेता टीम के सदस्य रहे हैं। वे आखिरी बार भारत के लिए मार्च 2013 में खेले थे। वे दुनिया में एकमात्र ऐसे बल्लेबाज हैं जिनके नाम टेस्ट में तिहरा शतक और वनडे में दोहरा शतक दर्ज हैं। अन्य कोई भारतीय बल्लेबाज तिहरे शतक के आंकड़े को छू भी नहीं पाया है। वे टेस्ट में 278 गेंदों में सबसे तेज तिहरा शतक बनाने वाले इकलौते बल्लेबाज भी हैं। सहवाग अपने कॅरियर के दौरान बेखौफ होकर बल्लेबाजी करते रहे। वे कहते रहे हैं कि वो 5 रन पर खेल रहे हों, या 195 पर या फिर चाहे 295 पर ही खेल रहे हों, अगर उन्हें लगेगा कि गेंद छक्के के लिए है तो वो छक्का ही लगाएंगे। उन्होंने कई बार ऐसा किया भी। उन्हें अपने नैसर्गिक खेल के लिए कई बार आलोचना भी झेलनी पड़ी। इसके बावजूद उन्होंने अपने बल्ले को खामोश नहीं होने दिया और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपना अलग मुकाम बनाया। उनके संन्यास लेने से भारतीय क्रिकेट का वह दौर खत्म हो गया जिसमें सचिन तेंदुलकर, सौरभ गांगुली, राहुल द्रविड़ व वीवीएस लक्ष्मण सरीखे बल्लेबाज थे।
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