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गांव सांसद को बताएंगे कि कैसे हो उनका विकास

सांसद आदर्श ग्राम योजना इसी शक्ति के बल पर आगे बढ़ेगी। बीते 11 अक्टूबर को प्रधानमंत्री ने इस योजना का शुभारंभ किया था।

गांव सांसद को बताएंगे कि कैसे हो उनका विकास

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में जयापुर को औपचारिक रूप से सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत चुन लिया है। इस मौके पर उन्होंने इस योजना के बारे में सांसदों, नेताओं और आम जनता के बीच फैली एक बड़ी गलतफहमी को भी दूर कर दी। उन्होंने कहा कि हकीकत में सांसद गांव को गोद नहीं ले रहे, बल्कि गांव सांसद को गोद ले रहे हैं। इसके तहत गांव के लोग अपने सांसद को सिखाएंगे कि कैसे गांवों का विकास हो सकता है। अब तक होता यह रहा हैकि सांसद या विधायक संसद या विधानसभाओं में बैठकर गांवों के विकास के रास्ते तलाशते हैं। ग्राम स्वराज की अवधारणा यही कहती है कि गांवों की समस्याओं का समाधान ग्रामीण ही सुझा सकते हैं।

इस तरह प्रधानमंत्री ने आसान शब्दों में इस योजना का स्पष्ट खाका खींचा है। इससे पहले तमाम तरह के भ्रम फैलाए जा रहे थे कि यदि सांसद अपने फंड को कुछ ही गांवों में खर्च कर देंगे तो बाकी क्षेत्र का वे विकास कैसे करेंगे, लेकिन प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया है कि इसमें सांसदों को अपने फंड से खर्च न करके सरकार की मौजूदा जो योजनाएं हैं उन्हीं को धरातल पर उतारना है। आजादी के बाद से अब तक सैकड़ों योजनाएं बनाई जा चुकी हैं। उसमें गांवों की दशा सुधारने और विकास के रास्ते पर लाने के लिए बड़ी-बड़ी बातें की गई हैं।

यही नहीं उन सब योजनाओं पर अब तक करोड़ों-अरबों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। फिर भी क्या कारण हैकि आज भी गांवों की स्थिति जस की तस बनी हुई है। उनका विकास क्यों नहीं हो पा रहा है यह सोचने की बात है? दरअसल, इन साठ सालों तक सरकारों ने विकास के जो रास्ते चुने, उनमें कुछ न कुछ कमी अवश्य रह गई थी। इस योजना के तहत सांसद जिस गांव को चुनेंगे उनमें सुनिश्चित करेंगे कि मौजूदा समय में सरकार की जितनी भी योजनाएं हैं, वे समय पर और प्रभावी तरीके से लागू हों। जिससे उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।

तभी अच्छे परिणाम आएंगे और इस तरह गांवों का विकास होगा। इस तरह दूसरे गांवों में भी परिवर्तन की लौ जलेगी। इस दौरान सांसदों को योजना में असली खामियों का पता चलेगा। उन्हें यह भी ज्ञात होगा कि उन योजनाओं को जमीन पर लागू कराने में कौन-कौन सी व्यावहारिक दिक्कतें पेश आ रही हैं। जिसके आधार पर भारत सरकार उन नीतियों में बदलाव करेगी। इस अवसर पर लोगों को अपनी जड़ों से जुड़ने के लिए गांवों का जन्मदिन मनाने का आह्वान भी अनोखा है। उनका सरकार की शक्ति नहीं, बल्कि जनता व समाज की शक्ति के जरिए बदलाव लाने का विचार भी काफी अहम है।

सांसद आदर्श ग्राम योजना इसी शक्ति के बल पर आगे बढ़ेगी। बीते 11 अक्टूबर को प्रधानमंत्री ने इस योजना का शुभारंभ किया था। जिसके तहत 2016 तक प्रत्येक सांसद को अपने निर्वाचन क्षेत्र के एक गांव, फिर 2019 तक दो और गांवों को आदर्श ग्राम में तब्दील करना है, लेकिन पिछले दिनों यह खबर आई थी ज्यादातर सांसद इसमें रुचि नहीं ले रहे हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि प्रधानमंत्री की इस व्याख्या के बाद इस योजना से जुड़े उनके भ्रम दूर हुए होंगे और सभी सांसद इसको सफल बनाने में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे।

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