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कांग्रेस के सामने अपनी जमीन बचाने की चुनौती

हरियाणा में विधानसभा का कार्यकाल 27 अक्टूबर को खत्म हो रहा है। इनसे पहले इन दोनों राज्यों में नई सरकार का आ जाना जरूरी है।

कांग्रेस के सामने अपनी जमीन बचाने की चुनौती

चुनाव आयोग ने हरियाणा और महाराष्ट्र के लिए विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया है। मई में संपन्न हुए 16वीं लोकसभा चुनावों के बाद पहली बार राज्यों के विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। इन पर सभी की निगाहें रहेंगी, क्योंकि लोगों में यह जानने की उत्सुकता बनी हुई है कि क्या नरेंद्र मोदी का जादू बरकरार है और क्या कांग्रेस की हार का सिलसिला टूटेगा? दोनों राज्यों में अभी कांग्रेस की ही सरकारें हैं। हरियाणा विधानसभा सीटों की संख्या 90 है। वहीं महाराष्ट्र विधानसभा सीटों की संख्या 288 है। महाराष्ट्र में विधानसभा का कार्यकाल 8 नवंबर को खत्म हो रहा है, जबकि हरियाणा में विधानसभा का कार्यकाल 27 अक्टूबर को खत्म हो रहा है। इनसे पहले इन दोनों राज्यों में नई सरकार का आ जाना जरूरी है। जहां हरियाणा में बीते 10 साल से कांग्रेस सत्ता में है वहीं महाराष्ट्र में बीते 15 साल से कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन की सरकार है। इस समय देश में जिस तरह का राजनीतिक वातावरण है और कांग्रेस पार्टी के खिलाफ जिस तरह से मतदाताओं का मूड है, उससे तो लगता है कि इन चुनावों में वैसे ही नतीजे देखने को मिलेंगे जिस तरह के नतीजे मई में लोकसभा चुनावों में देखने को मिले। मौजूदा परिस्थितियों को देखकर राजनीतिक विश्लेषक इस बात की भी उम्मीद लगा रहे हैं कि अक्टूबर में भी कुछ उसी तरह के नतीजे आ सकते हैं जिस तरह के परिणाम वर्ष 2013 के विधानसभा चुनावों में आए थे। खासतौर से भारतीय जनता पार्टी को उम्मीद है कि हरियाणा में वो अपने दम पर पहली बार सरकार बना सकती है। वहीं महाराष्ट्र में शिवसेना व बाकी सहयोगी दलों के साथ उसकी सरकार बन सकती है। जल्दी ही झारखंड और जम्मू-कश्मीर में भी चुनाव होने वाले हैं। प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के करीब चार महीने के कार्यकाल को काफी सकारात्मक दृष्टि से देखा गया है। महंगाई में कमी आई है। हालांकि यह अभी भी अधिक है। सरकार के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ी है। तेजी से फैसले हो रहे हैं। विदेश नीति के मोर्चे पर दिशाहीनता खत्म हुई है। एक सुदृढ़ फैसले लेने के संकेत सरकार ने दिए हैं। हाल फिलहाल में इन राज्यों में जो सर्वेक्षण हुए हैं, उनसे पता चलता है कि नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी का जादू बना हुआ है। यही वजह है कि दूसरे दलों के नेता भी बड़ी संख्या में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर रहे हैं। लेकिन कांग्रेस, खासकर राहुल गांधी की प्रतिष्ठा दांव पर है। जबसे पार्टी ने उन्हें महासचिव से उपाध्यक्ष बनाया है, एक तरह से पार्टी को लीड करने का जिम्मा सौंपा है, तबसे कांग्रेस की सफलता का ग्राफ लगातार नीचे की तरफ जा रहा है। पहले बिहार और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस बुरी तरह हारी। फिर पिछले वर्ष छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, दिल्ली और राजस्थान में भी यही हालत रही। वहीं मई के लोकसभा चुनावों में भी पूरे देश ने उसका हर्श देखा। कांग्रेस की ऐतिहासिक हार हुई। उसे सिर्फ 44 सीटों पर संतोष करना पड़ा। हरियाणा और महाराष्ट्र में वह एंटी इनकंबेंसी का सामना कर ही रही है। लिहाजा देश में अभी जिस तरह का वातावरण है उससे साफ लग रहा है कि कांग्रेस को इन राज्यों में भी पराजय का सामना करना पड़ सकता है।

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