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आतंकवाद से एकजुट होकर निपटे विश्व जगत

मोदी सरकार की चिंता यह हैकि बंधक बनाए हुए लोगों में एक भारतीय भी है।

आतंकवाद से एकजुट होकर निपटे विश्व जगत
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ऑस्ट्रेलिया के सिडनी के लिंट चॉकलेट कैफे में बंदूकधारी द्वारा करीब चालीस लोगों को बंधक बनाए जाने लेने की घटना को वैश्विक आतंकवाद की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। सिडनी की घटना की जिम्मेदारी अभी तक किसी संगठन ने नहीं ली है और न ही उस शख्स के इरादे पूरी तरह साफ हुए हैं। हालांकि उसने आॅस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टोनी एबॉट से बात करने की इच्छा जाहिर की है। पुलिस के मुताबिक सीरिया के आतंकी संगठन अल नुसरा का इस घटना से कनेक्शन हो सकता है। वहीं कुछ लोग मान रहे हैं कि बंदूकधारी आईएसआईएस से प्रभावित किसी संगठन का सदस्य हो सकता है क्योंकि उसने सुरक्षाकर्मियों के सामने आईएसआईएस के झंडे की मांग रखी है। वहीं कैफे में घुसा आतंकी भी एक झंडा दिखा रहा है जिस पर अरबी में लिखा है कि अल्लाह एक है।

बहरहाल, मोदी सरकार की चिंता यह हैकि बंधक बनाए हुए लोगों में एक भारतीय भी है। ऑस्ट्रेलिया के सुरक्षाकर्मी आसपास के भवन खाली कराने और यातायात सेवाओं को बंद करने जैसे एहतियाती कदम उठाए हैं। ऐसे समय में ये कदम जरूरी भी हो जाते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री टोनी एबॉट का देशवासियों और मीडिया से की गई अपील कई मायने में महत्वपूर्ण रही। उन्होंने कहा है कि लोग घबराएं नहीं और सामान्य तरीके से अपना काम करते रहें। उन्होंने मीडियाकर्मियों से रिपोर्टिंग के दौरान संयम बरतने का आग्रह किया। इसका प्रभाव भी हुआ है। भारत ने भी अपने दूतावास को बंद करने और ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गई क्रिकेट टीम की सुरक्षा बढ़ा दी है। इस तरह की घटना घटती है तो सुरक्षा के मद्देनजर इस तरह के कदम उठाना स्वाभाविक है। वैसे देखा जाए तो आज दुनिया आतंकवाद के साए में जी रही है।

विश्व स्तर पर आतंकवादी गतिविधियों का तेजी से विस्तार हो रहा है। कोई भी देश इसकी मार से बचा नहीं है। मौजूदा दौर में इराक एवं सीरिया में आईएसआईएस के नाम से आतंकवाद का नया चेहरा सामने आया है जिसने बर्बरता की सारी सीमाओं को पार कर दिया है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह हैकि संपन्न देशों के पढ़े लिखे एक खास तबके के युवा इसकी ओर आकर्षित होने लगे हैं। हाल ही में आईएसआईएस से जुड़े दो भारतीय आरिफ मजीद और मेहदी मसरूर विश्वास को गिरफ्तार किया गया है।

इससे पहले अलकायदा का आतंकी चेहरा दुनिया देख चुकी है। बोको हरम के नाम से नाइजीरिया दुनिया के लिए अलग से चिंता का विषय बना हुआ है। वहीं अफगानिस्तान में तालिबान का अभी भी पूरी तरह सफाया नहीं हो पाया है। इन सबके बीच हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान भी लंबे अरसे से आतंकवाद का सबसे बड़ा पनाहगाह बना हुआ है। बेहतर होगा कि सभी देश आतंकवाद से अलग-अलग लड़ने की बजाय एकजुट हों। हालांकि पाक जैसे देशों को आतंकवाद के प्रति दोहरी नीति छोड़नी होगी। अच्छे-बुरे की श्रेणी में बांटने की बजाय इससे कड़ाई से निपटना होगा। नहीं तो आज ऑस्ट्रेलिया में ऐसी घटना घटी है। कल कोई और देश इसका शिकार हो सकता है। दुनिया कब तक हाथ पर हाथ रखे बैठी रहेगी।

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