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एक बेहतर कल की ओर इशारा करते सौ दिन

विदेश नीति के मोर्चे पर मोदी सरकार ने शपथ ग्रहण के साथ ही काम शुरू कर दिए थे।

एक बेहतर कल की ओर इशारा करते सौ दिन

सौ दिन पूर्व सवा सौ करोड़ देशवासियों की उम्मीदों के वाहक के रूप में केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बनी थी तो इसकी सफलता को लेकर सबकी अपनी-अपनी चिंताएं थीं। देश जिस निराशा के गर्त में गोते लगा रहा था और आर्थिक, राजनीतिक तथा वैश्विक मोर्चे पर भविष्य अंधकारमय दिखाई दे रहा था, वैसे में यह सवाल हर किसी के जेहन में उठ रहा था कि अच्छे दिन कैसे आएंगे? परंतु अब तक के कामकाज को देखने के बाद इस सवाल का उत्तर तलाशने में ज्यादा मुश्किल नहीं आ रही है। जाहिर है, केंद्र सरकार जिस तेजी, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ फैसले ले रही है, उससे आम जनता के मन में आशा का संचार हुआ है। हाल में आए कुछ सर्वेक्षण भी इसकी तस्दीक कर रहे हैं। विदेश नीति के मोर्चे पर मोदी सरकार ने शपथ ग्रहण के साथ ही काम शुरू कर दिए थे। एक तरफ पड़ोसी देशों की ओर दोस्ती और सहयोग का हाथ बढ़ाकर मोदी ने सहयोगात्मक रुख का परिचय दिया तो दूसरी तरफ पाक को दो टूक कह अपनी कश्मीर नीति स्पष्ट कर दी व ब्रिक्स को प्रभावी बनाने की पहल कर वैश्विक राजनीति में भारत को मजबूती दी। पहली कैबिनेट बैठक में ही मोदी सरकार ने कालाधन पर विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया। वहीं सरकरी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए मंत्रियों से अपने निजी स्टाफ के रूप में परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों को नहीं रखने और सरकारी कर्मचारियों को हर वर्ष अपनी संपत्ति की घोषणा करने की बात कह भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का काम किया। सबसे ज्यादा उत्सुकता आर्थिक मोर्चे को लेकर थी कि मोदी सरकार देश की अर्थव्यवस्था को कैसे पटरी पर लाती है। पहले आम बजट में देश को आगे ले जाने को लेकर एक स्पष्ट नीति दिखी। मोदी सरकार ने अब तक दो सौ से ज्यादा परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जो पिछली सरकार में वर्षों से पर्यावरण क्लियरेंस के अभाव में लंबित थीं। विदेशी पूंजी निवेश को लेकर भी सरकार ने अपनी स्थिति साफ कर दी है, जिससे बीते तीन महीने में देश में कारोबार के लायक माहौल बना है। यही वजह है कि वित्त वर्ष 2014-15 की पहली तिमाही में देश की आर्थिक विकास दर 5.7 फीसदी रही। जुलाई में महंगाई दर भी घटकर 7.96 फीसदी के स्तर पर आ गई। हालांकि यह अभी भी ज्यादा है। वहीं विश्व व्यापार संगठन के खाद्य सब्सिडी संबंधी समझौते पर हामी भरने से इंकार कर किसानों और गरीबों के हितों को संरक्षण प्रदान की। रक्षा के क्षेत्र में भी अनिर्णय की स्थिति खत्म हुई है। संसाधनों को गरीबों तक पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री जन धन योजना को अमलीजामा पहनाने की मुहिम जारी है। रोजगार के लिए कुछ बुनियादी सुधारों की दरकार होती है। सरकार उस दिशा में सक्रिय दिखाई दे रही है, क्योंकि मोदी सरकार निवेश को बढ़ाकर उद्योग और विनिर्माण क्षेत्र को नई ऊंचाई देने का प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबका साथ सबका विकास का सूत्र पकड़कर शासन चला रहे हैं। यही वजह है कि दस वर्ष बाद 16वीं लोकसभा के बजट सत्र में सबसे ज्यादा बैठकें हो पार्इं। कुल मिलाकर, मोदी सरकार के सौ दिन एक बेहतर कल की ओर इशारा कर रहे हैं।

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