Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

चिंतन: मेडिकल में प्रवेश के लिए एक टेस्ट होने से राहत

एनईईटी को मंजूरी देने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2013 में दिए अपने ही फैसले को पलटा है।

चिंतन: मेडिकल में प्रवेश के लिए एक टेस्ट होने से राहत

डॉक्टर बनने के लिए एंट्रेंस टेस्ट की तैयारी कर रहे छात्रों को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। अब सभी मेडिकल कॉलेजों में केवल एक कॉमन एंट्रेंस टेस्ट से एडमिशन होगा। सर्वोच्च अदालत ने सभी मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए नेशनल एलिजबिलिटी एंट्रेंस टेस्ट (एनईईटी) को मंजूरी दे दी है। छात्रों के हक में शीर्ष कोर्ट का यह अहम फैसला है।

खास बात यह है कि एनईईटी को मंजूरी देने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2013 में दिए अपने ही फैसले को पलटा है। दरअसल, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने एमबीबीएस, बीडीएस और पीजी कोर्स के लिए कॉमन एंट्रेंस टेस्ट लेने का निर्णय किया था, जिसे जून, 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दिया था। उस वक्त तीन सदस्यीय पीठ ने दो-एक से फैसला देते हुए कहा कि एमसीआई का यह फैसला संविधान के खिलाफ है। उस वक्तअदालत ने कहा था कि 'मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया, प्राइवेट मेडिकल कॉलेज को कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (सीईटी) के लिए बाध्य नहीं कर सकता।

एमसीआई को ऐसा निर्णय करने का हक ही नहीं है। एमसीआई का यह कदम अल्पसंख्यक संस्थानों को संविधान से मिले अधिकार का हनन है।' उसके बाद एमसीआई ने शीर्ष कोर्ट में एनईईटी पर पुनर्विचार याचिका दायर की थी। इसी याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि जब तक एनईईटी पर कोई और निर्देश जारी नहीं किया जाता, कॉमन एंट्रेंस टेस्ट के जरिए ही मेडिकल कोर्स में एडमिशन होगा। छात्रों की परेशानी देखें, तो इस समय देश में तकरीबन 90 एंट्रेंस टेस्ट के जरिए मेडिकल कॉलेज में एडमिशन होते हैं। यानी कि लगभग हर प्रकार के मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए अलग-अलग परीक्षाएं। इससे छात्रों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। सभी के सिलेबस अलग होते हैं, इसलिए तैयारी उसी के अनुरूप करनी होती है। सभी के अलग-अलग फॉर्म भरने में अधिक धन जाया होता है। इतना ही नहीं अगर एक छात्र ने चार-पांच एंट्रेस टेस्ट के लिए फॉर्म भरा है तो उसके एक्जाम डेट के भी टकराने (सेम डेट) पड़ने की आशंका रहती है। ऐसे दो या तीन टेस्ट के एक डेट होने से छात्र किसी एक में भाग ले पाता है, इसका पता भी एक्जाम डेट के करीब चलता है। इससे ऐसे छात्रों को समय व धन का नुकसान उठाना पड़ता है। पहले इंजीनियरिंग में भी ऐसा होता था, लेकिन उसे अब एक रूप कर दिया गया है।

आईटी सॉफ्टवेयर क्षेत्र में जाने के लिए भी कॉमन एडमिशन टेस्ट होता है। इस तरह देखा जाए तो मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए एक टेस्ट होने से तैयारी कर रहे छात्रों को बहुत सुविधा होगी। कारण एक सिलेबस व पैटर्न पर वे फोकस कर सकेंगे। इसी परीक्षा के आधार पर सरकारी व निजी क्षेत्र के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन हो सकेंगे। देर ही सही, लेकिन निश्चित ही सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से मेडिकल प्रवेश परीक्षा में एकरूपता आ पाएगी। हमारे घर पर चूहों ने हमला बोल दिया था। उन्हें सबक सिखाने निकला था। खुद सबक सीखकर आ गया। हुआ यूं कि एक व्यक्ति चूहे मारने की दवा बेच रहा था। मैंने दस पैकेट खरीदे। घर आकर खोले तो हर पैक्ट में एक ही बात लिखी हुई थी। चूहे पकड़ें और मारें। यहीं समाधान है। तब से मैं तो झमेले में पड़ता नहीं। अपनी समस्या से खुद निपटता हूं। आप भी ऐसे समाधानों से दूर रहेंगे तो बेहतर है।

महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित मराठवाड़ा के लातूर जिले के लोगों को पीने का पानी पहुंचाने के लिए सांगली जिले के मिराज से पानी भरकर एक ट्रेन रवाना हुई है। इस ट्रेन में कुल 10 टैंकर लगे हैं। इनमें से हर टैंकर में करीब 50 हजार लीटर पानी भरा है। इन टैंकरों में पीने का पानी भरने से पहले उन्हें राजस्थान के कोटा भेजकर उनकी खास तरीके से सफाई की गई। इसी तरह की एक दूसरी ट्रेन 15 अप्रैल को भेजी जा सकती है। पानी को टैंकरों में भरने से पहले उन्हें रेलवे के पानी साफ करने के प्लांट में साफ किया गया। लातूर के लोगों के लिए पीने के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए महाराष्ट्र सरकार रेल मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रही है। माना जा रहा है कि इस ट्रेन के पहुंचने से लातूर के लोगों को राहत मिलेगी।

खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलो करें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-

Next Story
Top