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अब विमान यात्रा पर आतंक का साया!

विमान के कॉकपिट की जांच हो रही है, जिससे आने वाले दिनों में हादसे के कारण पूरी तरह स्पष्ट हो जाएंगे।

अब विमान यात्रा पर आतंक का साया!

मिस्र के शर्म-अल-शेख से रूस के सेंट पीट्सबर्ग के लिए उड़ा एयरबस ए 321 विमान शनिवार को सिनाई प्रायद्वीप में क्रैश हो गया, जिसके कारण उसमें सवार सभी 224 यात्रियों की जान चली गई। इस्लामिक स्टेट (आईएस) से संबद्ध मिस्र के एक आतंकी समूह ने इस विमान को मार गिराने का दावा किया है। उसने इसे सीरिया में रूस के हवाई हमले का बदला करार दिया है। वहीं मिस्र और रूस की सरकारों ने इस दावे को सिरे से खारिज किया है और दुर्घटना से पूर्व मिली जानकारी के अनुसार इसे विमान में आई तकनीकी खामी की वजह बता रहे हैं। वहीं कई जानकारों का भी कहना है कि तीस हजार फीट की ऊंचाईपर उड़ान भर रहे विमान को मार गिराने की क्षमता किसी आतंकी संगठन के पास नहीं है। बहरहाल, विमान के कॉकपिट की जांच हो रही है, जिससे आने वाले दिनों में हादसे के कारण पूरी तरह स्पष्ट हो जाएंगे।

रूसी विमान मिस्र में दुर्घटनाग्रस्त, 212 यात्रियों संग भरी थी उड़ान

हालांकि यह घटना एक दूसरे तरह की सुरक्षा संकट की ओर इशारा कर रही है। यदि दुर्भाग्यवश किसी आतंकी संगठन के हाथ ऐसे हथियार लग जाएंगे तो दुनिया में तबाही का ऐसा ही मंजर नजर आएगा। जाहिर है, इस घटना को आसन्न खतरे की आहट मानकर विश्व को अभी से इससे निपटने के लिए कमर कस लेनी चाहिए है। जिस तरह से आतंकवादियों के हाथ मजबूत हो रहे हैं उससे ऐसी आशंका व्यक्त की जाने लगी है कि आतंकी संगठन लंबे समय तक जनसंहारक हथियारों से वंचित नहीं रह सकेंगे। भविष्य में मानवता के सामने ऐसे संकट न आएं इसीलिए सैन्य ठिकानों की सुरक्षा मजबूत करने और दुनिया को जनसंहारक हथियारों की दौड़ से दूर रहने की सलाह दी जाती रही है। आज सभी को इस पर गंभीरता से अमल करने की जरूरत है। दूसरी ओर यदि यह घटना तकनीकी कारणों की देन है तो भी चिंताजनक है क्योंकि हाल के दिनों में इस तरह से भी विमान हादसे बढ़े हैं। इस साल र्जमनविंग एयरलाइंस का एक विमान फ्रांस के आल्प्स की पहाड़ियों के बीच दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।

रूसी विमान हादसे में 224 यात्रियों की जान हमने ली- आईएस

वहीं पिछले साल भी दुनिया तीन बड़ी विमान दुर्घटनाओं का सदमा झेल चुकी है, जिसमें मलेशियाई एयरलाइन के विमान एमएच-17 को यूक्रेन के विद्रोहियों द्वारा मिसाइल से मार गिराने की घटना भी शामिल है। इन हादसों के साथ यदि ताजा घटना जोड़ कर देखें तो यह धारणा बनती जा रहा है कि विमान यात्रा लगातार असुरक्षित होती जा रही है। क्या वायुसेवाएं अधिक से अधिक किफायती सेवा देने की होड़ में हिफाजत के बुनियादी इंतजामों पर समझौता कर रही हैं? दरअसल, तकनीकी खराबी, सुरक्षा संबंधी लापरवाही, अशांत क्षेत्रों के ऊपर से गुजरने की मजबूरी और प्रतिकूल मौसम ने उड़ानों के लिए जोखिम बढ़ा दिया है। इसमें कोई दो राय नहीं कि हवाई यात्रा ने दूरी और समय को एक हद तक पाटने का काम किया है जिसका लाभ अंतत: मानव जीवन को ही हो रहा है। हवाई यात्राओं को हर तरह से सुरक्षित किए जाने की जरूरत है। विमानों में तकनीकी परीक्षण उच्च स्तर के होने चाहिए क्योंकि जिन लोगों की जान ऐसे हादसों में चली जाती है उनके परिवार के लोगों पर क्या गुजरती है, इसकी सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है।

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