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चिंतन: बेहतर टैक्स कलेक्शन निवेश बढ़ने के संकेत

इस साल टैक्स कलेक्शन के बेहतर आंकड़ों को देखते हुए कहा जा सकता है कि निजी सेक्टर में निवेश बढ़ा है।

चिंतन: बेहतर टैक्स कलेक्शन निवेश बढ़ने के संकेत
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आम बजट से चंद दिन पहले सरकार के लिए आर्थिक मोर्चे से बेहतर खबर आई है कि वैश्विक इकॉनोमिक सुस्ती के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था बेहतर प्रदर्शन कर रही है। देश में टैक्स कलेक्शन के बेहतर आंकड़े दिखा रहे हैं कि हमारी इकॉनोमी की अंदरूनी सेहत खराब नहीं हुई है, जैसा कि ग्लोबल रेटिंग एजेंसियां भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर अलग-अलग चिंता बढ़ाने वाली रिपोर्ट दे रही हैं और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में सुधार की धीमी रफ्तार और निर्यात में गिरावट के आंकड़े घरेलू अर्थव्यवस्था में सुस्ती के संकेत दे रहे थे। राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने ट्वीट करके खुशखबरी दी कि 31 जनवरी तक के आंकड़ों में इनडायरेक्ट टैक्स में 33 फीसदी उछाल आया है और डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन भी 10 फीसदी से ज्यादा बढ़ा है। इससे सरकार की उम्मीद जगी है कि वह अपने टैक्स कलेक्शन के लक्ष्य को हासिल कर लेगी। अब तक लक्ष्य का 73.5 फीसदी टैक्स कलेक्शन हो गया है। आगे इनडायरेक्ट टैक्स कलेक्शन लक्ष्य से 40 हजार करोड़ बढ़ सकता है और डायरेक्ट टैक्स में कमी की समस्या भी दूर होगी। इस साल 14.49 लाख करोड़ रुपये के टैक्स कलेक्शन का लक्ष्य है। यह पांच साल में पहली बार होगा जब सरकार चालू वित्त वर्ष में बजट में निर्धारित कर राजस्व का लक्ष्य हासिल कर लेगी। इससे पहले 2010-11 में कर राजस्व बजट लक्ष्य से अधिक हुआ था। इससे पहले लगातार दो वित्त वर्ष के दौरान कर राजस्व लक्ष्य को संशोधित किया गया था। पिछले वित्त वर्ष 2014-15 में सरकार ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों दोनों को मिलकार कुल 13.64 लाख करोड़ रुपये के कर राजस्व का बजट अनुमान तय किया था लेकिन साल की समाप्ति पर इसे संशोधित कर 12.51 लाख करोड़ रुपये किया गया। इससे पिछले वर्ष 2013-14 में कर राजस्व के लक्ष्य को 12.35 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान से घटाकर 11.58 लाख करोड़ रुपये किया गया था। इस साल टैक्स कलेक्शन के इन बेहतर आंकड़ों को देखते हुए कहा जा सकता है कि निजी सेक्टर में निवेश बढ़ा है। कुछ ही समय पहले निजी सेक्टर ने सरकार से आर्थिक सुधार में तेजी लाने की अपील की थी। इससे लग रहा था कि निजी क्षेत्र अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही है। यह तय है कि टैक्स रेवेन्यू कलेक्शन का पटरी पर होने से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर के अनुमानों को सर्मथन मिलता है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने चालू वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है जो पिछले पांच साल की सबसे तेज वृद्धि दर होगी। पिछले सप्ताह चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के लिए सरकार की ओर से जारी जीडीपी के आंकड़ों में मामूली कमी दर्ज की गई थी। लेकिन अब टैक्स राजस्व के आंकड़े बता रहे हैं कि वित्त वर्ष पूरा होने तक जीडीपी का लक्ष्य भी हासिल हो जाएगा। इससे सरकार का आत्मविश्वास बढ़ेगा और व बजट में और बेहतर लक्ष्य अपने लिए तय कर पाएगी। हालांकि अगर सरकार इस बजट में टैक्स रिफॉर्म का रोडमैप लेकर आती है और जीएसटी को पास कराने में सफल होती है, तो टैक्स कलेक्शन के मोर्चे पर और भी बेहतर नतीजे देखने को मिलेंगे।

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