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पेशावर की घटना से सबक ले पाकिस्तान, आतंकवाद से लड़ने के लिए हो एकजु़ट

पेशावर की बर्बर घटना ने इंसानियत में विश्वास रखने वाले हर व्यक्ति की चेतना को झकझोर कर रख दिया है।

पेशावर की घटना से सबक ले पाकिस्तान, आतंकवाद से लड़ने के लिए हो एकजु़ट
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पाकिस्तान के पेशावर में तहरीक-ए-तालिबान अर्थात पाकिस्तानी तालिबान के आतंकियों द्वारा सैकड़ों मासूमों पर ढाए गए जुल्म की सच्ची तस्वीर बयां करने के लिए खौफनाक, हैवानियत, दरिंदगी या वहशीपन जैसे शब्द भी बहुत हल्के पड़ रहे हैं। जिस तरह से आतंकियों ने निर्दोष बच्चों को गोलियों से भूना, मानवता के लिए इससे ज्यादा दुखदायी चीज और कोई नहीं हो सकती। पेशावर के आर्मी स्कूल में आतंकवादी कई घंटों तक मासूम बच्चों और स्कूल के कर्मचारियों को मौत के घाट उतारते रहे, कुल सात हैवानों की बर्बरता में 132 बच्चों समेत 141 लोगों की जान चली गई।

पेशावर की बर्बर घटना ने इंसानियत में विश्वास रखने वाले हर व्यक्ति की चेतना को झकझोर कर रख दिया है। इसे आतंक का अब तक का सबसे भयानक चेहरा माना जा सकता है। आतंकी पूछ-पूछकर पाक सैनिकों के बच्चों को गोली मार रहे थे। यही नहीं एक शिक्षिका ने बच्चों को बचाने की कोशिश की तो हैवानों ने उन्हें जिंदा ही जला दिया और बच्चों को खौफनाक मंजर देखने को मजबूर किया। इससे साफ है कि आतंकियों का कोई धर्म व मजहब नहीं होता। उनके लिए महिलाएं और बच्चों में कोई फर्क नहीं है। फिर वह आईएस, बोको हरम, अल कायदा, जमात उद दावा, लश्कर-ए-तैयबा हो या फिर तालिबान जैसे आतंकी संगठन। इस घटना की वेदना भारत में भी देखी जा सकती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवाज शरीफ से फोन पर बात कर आश्वासन दिया कि सभी विवादों को भूलाकर इस संकट की घड़ी में भारत पाकिस्तान के साथ खड़ा है। साथ ही संसद के दोनों सदनों व देश के स्कूलों में मौन रखकर मारे गए बच्चों को श्रद्धांजलि दी गई। पाकिस्तानी सरकार ने इसे राष्ट्रीय त्रासदी करार दिया है। इस घटना की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान ने यह कहते हुए ली है कि यह पाकिस्तानी फौज की उनके खिलाफ खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र में की जा रही कार्रवाई का बदला है। पाक के उत्तरी वजीरिस्तान में सेना और आतंकियों के बीच लड़ाई चल रही है।

नवाज शरीफ ने कहा है कि सेना आतंकियों के खिलाफ जर्ब-ए-अज्ब ऑपरेशन आगे भी जारी रखेगी और पाकिस्तान अफगानिस्तान के साथ मिलकर पूरे क्षेत्र से आतंकवाद को समाप्त करेगा। वहां आतंकियों को फांसी की सजा पर लगी रोक भी हटा ली गई है। हालांकि यह भी सच है कि वहां की सरकारें, सेना और आईएसआई ने पाकिस्तानी तालिबान जैसे दर्जनों आतंकी संगठनों को फलने-फूलने का पूरा मौका दिया है। यह नृशंस घटना दर्शाती है कि पाकिस्तान की पूरी व्यवस्था कितनी चरमरा गई है।

पाक सरकार भले ही अब आतंकवाद को मिटाने की बात कह रही है, परंतु यह तभी संभव हो सकेगा जब वह समग्र रूप से आतंकवाद के खिलाफ जंग छेड़े। एक तरफ वह स्वयं आतंकवाद का शिकार हो रहा है, लेकिन दूसरी तरफ भारत के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा देने का काम भी बखूबी अंजाम दे रहा है। उसकी मंशा आतंकवाद को अच्छे और बुरे की श्रेणी में बांट कर देखने की रही है। यदि पाक को अपनी धरती पर शांति कायम करनी है तो उसे इस दोहरी नीति का त्याग करना होगा। पेशावर की घटना से पाकिस्तान को सबक लेना चाहिए।

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