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राजनीति के शुद्धिकरण की जगी उम्मीद

दागी जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों को एक साल के भीतर निपटाया जाएगा।

राजनीति के शुद्धिकरण की जगी उम्मीद
दागी जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों को एक साल के भीतर निपटाए जाने की पहल कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजनीति को अपराध मुक्त करने की दिशा में कदम बढ़ाते दिख रहे हैं। उन्होंने लोकसभा चुनावों के दौरान कहा था कि यदि वे सत्ता में आये तो दागी माननियों से जुड़े मामलों का निपटारा एक साल के भीतर करने की दिशा में काम करेंगे। अब बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को इस संबंध में खाका तैयार करने का निर्देश दिया है, जिससे यह तय हो सके कि इन मुकदमों की सुनवाई और उन पर फैसले की प्रक्रिया को किस तरह तेज बनाया जाए। हालांकि गत दिनों विधि आयोग की एक रिपोर्ट के आधार पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि निचली अदालतों को सांसदों एवं विधायकों पर चल रहे आपराधिक मुकदमों का निपटारा आरोप-पत्र दाखिल होने के साल भर के भीतर करना होगा। यदि अदालतें ऐसा नहीं कर पाती हैं तो जज को संबंधित उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को लिखित में कारण बताने को कहा था। वहीं मोदी ने ऐसे मामलों का निपटारा त्वरित आधार पर करने का विकल्प सुझाया था। ताकि दोषी नेताओं को सजा मिले और निर्दोषों पर झूठे आरोप लगने बंद हों, परंतु वर्तमान समय में अदालतों में रूटीन के कामकाज और मुकदमों की सुनवाई का अंबार लगा है। वर्तमान में देश की सभी अदालतों में लगभग 3.13 करोड़ मुकदमे लंबित हैं। मौजूदा ढांचा समय पर मामलों को निपटाने में असहाय महसूस कर रहा है। जरूरी मुकदमों में भी तारीख मिलती रहती है और इस तरह सुनवाई सालों चलती रहती है। यदि अलग से दागी सांसदों या विधायकों के खिलाफ मामलों की सुनवाई होगी तो इसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन करना होगा, जिसका अर्थ है कि उसके लिए अलग से ढांचा खड़ा करना होगा। जजों की बहाली करनी होगी। अभियोग पक्ष को चुस्त-दुरुस्त करना होगा। लिहाजा, इसके लिए बड़ी पहल करनी होगी। आज भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी समस्या राजनीति का अपराधिकरण है। एडीआर के अनुसार 16वीं लोकसभा में 34 फीसदी (186) सांसद दागी हैं। राज्यों में कुल 4032 विधायकों में से 1258 यानी 31 फीसदी पर विभिन्न मामलों में केस दर्ज हैं। इससे एक बात जाहिर है कि संसद या विधानसभाओं में बैठे हमारे नीति-नियंताओं में एक-तिहाई दागी हैं। गत वर्ष भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी पाए जाने के कारण लालू प्रसाद यादव और रशीद मसूद की संसद सदस्यता खत्म हो गई थी। हरियाणा के बड़े नेता ओमप्रकाश चौटाला को भी भ्रष्टाचार के एक मामले में दस वर्ष की सजा हुई है। देश में लंबे समय से राजनीति के अपराधिकरण को लेकर बहस चल रही है। यह स्थिति स्वस्थ लोकतंत्र के लिए कतई शुभ नहीं है। यह सही नहीं कि जिनके खिलाफ गंभीर धाराओं में मामले दर्ज हैं, वही शासन चलाएं, यदि ऐसा होगा तो लोकतंत्र कहां बचेगा? अफसोस की बात रही है कि इस समस्या से छुटकारा दिलाने में राजनीतिक दलों का रवैया नकारात्मक रहा है, परंतु अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दिशा में सकारात्मक पहल कर उम्मीद जगाई है।
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