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भारतीय क्रिकेट के हित में सुप्रीम कोर्ट के प्रस्ताव

सुनील गावस्कर प्रमुख बनते हैं तो अन्य संघों में भी मांग पूर्व खिलाड़ी को प्रमुख बनाने की मांग उठने लगेगी।

भारतीय क्रिकेट के हित में सुप्रीम कोर्ट के प्रस्ताव
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नई दिल्ली. तीन दिन पूर्व मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने आईपीएल में सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग की निष्पक्ष जांच के लिए बीसीसीआई प्रमुख एन र्शीनिवासन को पद छोड़ने की सलाह दी थी। हालांकि इसके बावजूद उन्होंने अध्यक्ष पद से इस्तीफा नहीं दिया। और फिर बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट ने अहम कदम उठाते हुए बीसीसीआई के समक्ष तीन प्रस्ताव रखे, यदि वे अमल में आते हैं तो भारतीय क्रिकेट के लिए एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकते हैं। साथ ही भारतीय खेल जगत में कई बुनियादी बदलाव भी देखने को मिल सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट इस पर किस तरह आगे बढ़ता है यह तो बाद में ही पता चल पाएगा, परंतु जिस तरह अदालत ने सख्त लहजे में कहा है कि हम वो सब करेंगे जो कानून और क्रिकेट के हक में होगा, तो खेल प्रेमी क्रिकेट की बेहतरी के लिए एक उम्मीद कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने जो तीन प्रस्ताव दिए हैं उसमें प्रथम है, स्पॉट फिक्सिंग मामले की चल रही सुनवाई के दौरान एन र्शीनिवासन की जगह सुनील गावस्कर को बीसीसीआई का अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया जाए। दूसरा है, मामले की निष्पक्ष जांच होने तक राजस्थान रॉयल्स और चेन्नई सुपर किंग्स टीमें आईपीएल-7 का हिस्सा न हों। तीसरा है, इंडिया सीमेंट, जो कि मौजूदा बीसीसीआई प्रमुख एन र्शीनिवासन की कंपनी है, का कोई भी कर्मचारी बीसीसीआई में न हो। आज देश में तमाम खेल संघों पर राजनीतिक लोगों का वर्चस्व है।
यदि सुनील गावस्कर प्रमुख बनते हैं तो अन्य संघों में भी यह मांग उठने लगेगी कि उनका प्रमुख भी किसी पूर्व खिलाड़ी को ही बनाया जाए। देश में यह मांग बहुत दिनों से हो रही है। आईपीएल के सीजन सात के भविष्य पर भी प्रश्न चिह्न् लग सकता है। क्योंकि यदि दो टीमें बाहर निकलेंगी तो मैच की तारीखों को नए सिरे से सूचीबद्ध करनी होगी। साथ ही इन टीमों से जुड़े खिलाड़ियों का क्या होगा, अब यह भी देखना होगा। वहीं बीसीसीआई को केंद्र सरकार के अधीन लाने की भी मांग होती रही है। अभी बीसीसीआई खुद को स्वायत्त संस्था बताती है, क्योंकि वह सरकार से कोई अनुदान नहीं लेती। जाहिर है, इसके नाम पर बोर्ड अपनी मनमानी भी करता है।
जब आईपीएल की शुरुआत हुई थी तब आयोजकों ने तर्क दिया था कि इससे देश में क्रिकेट और क्रिकेटर्स को बढ़ावा मिलेगा और नए खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा परंतु आज आईपीएल में किस कदर सट्टेबाजी और फिक्सिंग की गंदगी फैली है, देख सकते हैं। जस्टिस मुकुल मुदगल की अध्यक्षता में गठित समिति की रिपोर्ट ने भी जिस हकीकत को बयां किया है उससे खेल प्रेमी आहत हुए हैं। कई पूर्व क्रिकेट पदाधिकारी तो यह भी कहने लगे हैं कि आईपीएल को बंद कर दिया जाना चाहिए, क्योंकि यह पैसों का खेल हो गया है। और पैसा भी गलत तरीके से कमाया जा रहा है। यहां खेल भावना का अभाव देख सकते हैं। निश्चित रूप से फिक्सिंग के बाद खेल से जुनून और प्रतियोगिता खत्म हो जाती है, बिना इसके खेल, खेल नहीं बल्कि पहले से लिखी एक पटकथा हो जाती है। तो सवाल है कि क्रिकेट से यह गंदगी दूर होनी चाहिए।
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