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चिंतन: अनिश्चित हड़तालों से आखिर किसका हित

आभूषण विक्रेताओं की हड़ताल 13वें दिन में भी जारी रहने से इस कारोबार पर व्यापक असर पड़ना शुरू हो गया है।

चिंतन: अनिश्चित हड़तालों से आखिर किसका हित
आभूषण विक्रेताओं की हड़ताल 13वें दिन में भी जारी रहने से इस कारोबार पर व्यापक असर पड़ना शुरू हो गया है। सरकार की तरफ से अब तक कोई ठोस जबाव न मिलने के कारण हड़ताल पर गए रत्न एवं गहना कारोबारियों के देशभर के संगठनों ने 17 मार्च को राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के रामलीला मैदान में राष्ट्रव्यापी विरोध जताने के लिए महारैली करने का फैसला भी किया है। इससे निश्चित रूप से केंद्र सरकार की परेशानी बढ़ेगी। सर्राफा कारोबारी दो मार्च से हड़ताल पर हैं। इस दौरान अलग-अलग राज्यों में सर्राफा व्यापारी धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं और कहीं-कहीं क्रमिक अनशन भी कर रहे हैं। दरअसल सर्राफा व्यापारी इस बार के आम बजट में सोने और रत्न एवं कीमती पत्थर जड़ित चांदी के आभूषणों (नॉन सिल्वर ज्वेलरी आइटम) पर एक प्रतिशत उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) लगाए जाने का विरोध कर रहे हैं। इसके अलावा दो लाख रुपये अथवा इससे अधिक के लेनदेन में स्थायी खाता संख्या (पैन) का जिक्र करने का भी सर्राफा करोबारी विरोध कर रहे हैं। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2016-17 के बजट में बिना इनपुट क्रेडिट के एक प्रतिशत और इनपुट क्रेडिट के साथ 12.5 प्रतिशत की दर से उत्पाद शुल्क लगाने का प्रस्ताव किया है। हालांकि बजट के बाद विरोध बढ़ता देख वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया है कि केवल 12 करोड़ रुपये से अधिक कारोबार करने वाले सर्राफा कारोबारियों पर ही एक प्रतिशत उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा। इससे साफ है कि सरकार छोटे आभूषण विक्रेताओं पर किसी तरह का भार नहीं दिया है। इस ऐलान के बाद भी गहना कारोबारी संतुष्ट नहीं हैं, जबकि सरकार ने नन सिल्वर ज्वेलरी पर एक फीसदी एक्साइज ड्यूटी लगाने का प्रस्ताव कुछ सोच समझ कर ही किया होगा। ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन का तर्क है कि बजट में प्रस्तावित एक्साइज ड्यूटी से कारोबार और कारीगरों की आय पर असर पड़ेगा। इसके साथ ही जवेलरों का यह भी मानना है कि दो लाख से अधिक की खरीदारी पर पैन नंबर अनिवार्य करने से ग्रामीण और शहरी मध्यवर्ग के खरीदारों पर असर पड़ेगा। अभी भी देश में बड़े वर्ग के पास पैन नंबर नहीं है और इसको लेकर कई प्रकार से भ्रम की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में जिनके पास पैन नहीं है, उनके मन में एक हौवा खड़ा हो जाएगा, जिसका अंतत: सर्राफा कारोबार पर असर पड़ेगा। सर्राफा एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखकर एक्साइज ड्यूटी लगाने के प्रस्ताव को वापस लेने व पैन अनिवार्य नहीं करने की मांग की है। अभी शादी-विवाह का मौसम है, ऐसे में ज्वेलरों की हड़ताल से लोगों को दिक्कत हो रही है। इसलिए सरकार को सर्राफा कारोबारी संगठनों से बातचीत का रास्ता निकालने की कोशिश करनी चाहिए। सर्राफा संगठनों को भी समझना चाहिए कि हड़ताल हर समस्या का हल नहीं है, जापान की तरह व्यापार जारी रखते हुए विरोध जता सकते हैं और सरकार से बात कर सकते हैं। फिलहाल लंबी खिंच रही इस सर्राफा हड़ताल से किसी का हित नहीं सध रहा है। अनिश्चितकालीन हड़ताल अर्थव्यवस्था को ही नुकसान होता है।
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