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चिंतन: उद्यमशीलता का नया युग शुरू करेगा स्टार्ट अप इंडिया

स्टार्टअप इंडिया के जरिए हमारी कोशिश देश के युवाओं को जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर बनाना है।

चिंतन: उद्यमशीलता का नया युग शुरू करेगा स्टार्ट अप इंडिया
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मोदी सरकार ने उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने नया उद्यम शुरू करने वालों के लिए 10 हजार करोड़ के कोष (फंड) के साथ स्टार्ट अप इंडिया स्कीम की शुरूआत की है। इस स्कीम के तहत नए कारोबारियों के लिए मुनाफे पर तीन साल की टैक्स छूट, पूंजीगत लाभ टैक्स में राहत, तीन साल तक कोई इंस्पेक्शन नहीं, इंस्पेक्टर राज मुक्त वातावरण, नौ श्रम और पर्यावरण कानूनों के अनुपालन के लिए सेल्फ सर्टिफिकेशन योजना, 90 दिन में ही नई कंपनी को बंद करने की छूट सहित कई तरह के प्रोत्साहनों की घोषणा की गई है। स्कीम में इनोवेटिव सोच के साथ आने वाले तकनीक आधारित नए उद्यमों के लिए पेटेंट रजिस्ट्रेशन के शुल्क में 80 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इसको लांच करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो बड़ी बातें कही हैं। पहला ये कि जो कुछ करना चाहते हैं उनके लिए पैसे मायने नहीं रखते, बस जोखिम उठाना जरूरी है और दूसरी ये कि स्टार्टअप इंडिया के जरिए हमारी कोशिश देश के युवाओं को जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर बनाना है। पीएम मोदी को अच्छी तरह पता है कि नई कॉरपोरेट व मार्केट ओरिएंटेड अर्थव्यवस्था में किसी भी सरकार के लिए अधिक से अधिक जॉब क्रिएट करना आसान नहीं है, लेकिन सरकार उद्योग करने का वातावरण जरूर आसान बना सकती है। इस स्कीम के जरिये सरकार ने यही कोशिश की है। नया उद्यम शुरू करना आसान बनाया है। देश में इस समय बेरोजगार युवाओं की बड़ी फौज है, जो सरकार की तरफ आशाभरी नजरों से देख रहे हैं। भाजपा ने सालाना एक करोड़ नए जॉब देने का वादा किया था। इस वादे को पूरा करने की दिशा में भी यह स्टार्टअप स्कीम मदद करेगी। उद्यमशीलता तो भारत की मिट्टी में रची बसी है, तभी कभी भारत सोने की चिड़िया कहलाता था। भारत के मसाले, हस्तशिल्प और रेशम दुनिया भर में मशहूर रहे, अभी भी विश्व में इन चीजों की मांग है। लेकिन अंग्रेजों की दासता ने भारत की उद्यमशीलता को तहस-नहस कर दिया। उसने भरतीय समाज को कारोबारी से नौकरीपेशा बना दिया। आजादी के बाद भी सरकारों ने देश में उद्यमशीलता की नींव रखने में ईमानदारी नहीं दिखाई। देश के पहले पीएम पंडित जवाहर लाल नेहरू जरूर थोड़े गंभीर दिखे, लेकिन अंग्रेजों के जमाने की सोच वाली नौकरशाही ने समाज में कभी उद्यमशीलता को पनपने ही नहीं दिया। उनके लाइसेंस राज ने देश में व्यापार करना नामुमकिन सा बना दिया। देश में उदारीकरण की नींव रखने वाले पूर्व पीएम पीवी नरसिम्हाराव और पूर्व वित्त मंत्री डा. मनमोहन सिंह (बाद में 10 साल पीएम रहे) की जोड़ी ने लाइसेंसराज पर जरूर चोट किया, लेकिन इसका लाभ बड़े उद्यमियों तक ही सीमित रहा, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नए तरीके से सोच रहे हैं। उनका ध्यान समावेशी विकास की तरफ है। वे एक साथ बड़े उद्यम और छोटे कारोबार को बढ़ावा दे रहे हैं। वे जानते हैं कि बड़े उद्यम भी अधिक जॉब क्रिएट नहीं कर पाएंगे, जबकि छोटे कारोबारी बड़ी क्रांति कर सकते हैं, उन्हें बड़े कॉरपोरेट उद्यमी की अपेक्षा सरकार से मदद भी छोटी ही चाहिए। इसलिए मोदी सरकार स्टार्टअप इंडिया स्कीम के जरिये भारतीय समाज में उद्यमशीलता के नए युग का सूत्रपात कर रहे हैं। उनके सामने उद्यमशील जापानी समाज का उदाहरण है। स्टार्टअप आइडिया भारत के लिए नया जरूर है, लेकिन तीसरा बड़ा केंद्र है। उनके इस अभियान में नौकरशाही अगर रोड़ा नहीं अटकाई, तो निश्चित ही आने वाले चंद सालों में भारतीय युवा बड़े जॉब क्रिएटर बन जाएंगे, क्योंकि युवाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है, बस उसे मौके की जरूरत है।
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