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धार्मिक स्थलों पर भीड़ नियंत्रण बड़ी चुनौती

सऊदी अरब में दुनिया के अलग-अलग देशों से हर साल लाखों की तादाद में इस्लाम धर्म को मानने वाले श्रद्धालु हज यात्रा करने जाते हैं।

धार्मिक स्थलों पर भीड़ नियंत्रण बड़ी चुनौती
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सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का में हज के दौरान भगदड़ मचने से सैकड़ों लोगों की मौत और बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने की घटना दुखद है। यह हादसा उस दौरान हुआ जब लाखों हज यात्री शैतान को पत्थर मारने की रस्म पूरी कर रहे थे। मक्का के बाहरी इलाके मीना में हज यात्रा के दूसरे दिन शैतान को सांकेतिक रूप से पत्थर मारने का धार्मिक रिवाज है। इस दौरान हज यात्री तीन पत्थर शैतान को मारते हैं। यह इस यात्रा का आखिरी पड़ाव माना जाता है। इसके बाद लोग ईद मानते हैं और हज यात्रा समाप्त हो जाती है। माना जा रहा हैकि इस बार इस रस्म के लिए मीना में करीब 30 लाख लोग इकट्ठा हुए थे। मीना में भगदड़ मचने की यह पहली घटना नहीं है, इससे पहले भी कई बार शैतान को पत्थर मारने की रस्म के दौरान बड़े हादसे हो चुके हैं, जो सैकड़ों हज यात्रियों की मौत का कारण बने हैं। इससे पहले 2006 में मची भगदड़ में चार सौ से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।

यमन: 'ईद अल-अजहा' की नमाज के दौरान जोरदार धमाका, 30 से ज्यादा लोगों की मौत

सऊदी अरब में दुनिया के अलग-अलग देशों से हर साल लाखों की तादाद में इस्लाम धर्म को मानने वाले श्रद्धालु हज यात्रा करने जाते हैं। इतनी भारी संख्या में आने वाले लोगों को नियंत्रित करने के लिए सऊदी अरब की सरकार सुरक्षा के तमाम प्रबंध करती है। इस बार ढांचा का भी पर्याप्त विस्तार किया गया था, जिससे कि लागों को किसी तरह की असुविधा नहीं हो, लेकिन इसके बावजूद इतनी भीषण घटना घटी है तो इसका मतलब है कि व्यवस्था व इंतजामों में कहीं न कहीं खामी है। बताया जा रहा हैकि पिछले हादसों से सबक लेते हुए गत कुछ वर्षों से मीना में नई व्यवस्था बनाई गई है जिसके तहत हज यात्री शैतान को पत्थर मारने के लिए जिस रास्ते से आते हैं, वापसी उस रास्ते से न कर दूसरे रास्ते से करते हैं, लेकिन कई बार ऐसा होता है कि कुछ लोग जानकारी के अभाव में जो रास्ता आने के लिए बनाया गया है उसी रास्ते वापस जाने लगते हैं। वहीं श्रद्धालुओं में यह भी मान्यता है कि मक्का मस्जिद में नमाज अदा करने के दूसरे दिन सिर्फ बारह बजे तक का समय ही शैतान को पत्थर मारने के लिए पवित्र होता है। इस वहम के चलते लोग जल्दबाजी करने लगते हैं। जाहिर है, इसी दौरान कोई अफवाह फैल जाती है, जो अंतत: भगदड़ में बदल जाती है। और पल भर में लाखों की भीड़ हादसे को न्योता दे देती है।

मक्का में शैतान को पत्थर मारने के दौरान मची भगदड़, 750 की मौत-सैकड़ों घायल

धार्मिक स्थलों पर भीड़ का अनियंत्रित होना और फिर भगदड़ मचना किसी एक देश की समस्या नहीं है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। अभी गत महीने ही झारखंड के देवधर में प्रसिद्ध शिवमंदिर और आंध्रप्रदेश के पुष्करम मेले में भगदड़ मचने से कई लोगों की मौत हो गई थी। देखा जाए तो विशेष धार्मिक अवसरों पर ऐसी घटनाओं की सूची लंबी होती जा रही है। फिर भी नहीं लगता कि कहीं भी स्थानीय प्रशासन या सरकारों को इससे चिंता हो रही है। आबादी बढ़ने और आवागमन की सेवाएं बेहतर होने से स्वाभाविक है कि ऐसे मौकों पर अब पहले से ज्यादा भीड़ जुटे। उसके अनुरूप सुरक्षा तथा भीड़ प्रबंधन के उपाय करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। आज भीड़ प्रबंधन के दीर्घकालिक उपाय खोजने और उसे कड़ाईसे लागू करने की आवश्यकता है, लेकिन ऐसा तभी होगा, जब सरकारें लापरवाही छोड़ अपनी जवाबदेही समझेंगी।

हाजियों को भारी पड़ा शैतान को पत्थर मारना, इस रिवाज के दौरान पहले भी हो चुके हैं हादसे

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