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पड़ोसी देश श्रीलंका से रिश्तों में आई कड़वाहट दूर करने की कोशिश करेगा भारत

पड़ोसी देश श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना का तीन दिवसीय भारत दौरा दोनों देशों के बदलते रिश्तों की दास्तां बयान कर रहा है।

पड़ोसी देश श्रीलंका से रिश्तों में आई कड़वाहट दूर करने की कोशिश करेगा भारत
पड़ोसी देश श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना का तीन दिवसीय भारत दौरा दोनों देशों के बदलते रिश्तों की दास्तां बयान कर रहा है। उम्मीद की जानी चाहिए कि उनकी यह यात्रा दोनों देशों के बेपटरी हो गए संबंधों को सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। दरअसल, जनवरी में श्रीलंका का राष्ट्रपति बनने के बाद सिरिसेना ने अपनी पहली विदेश यात्रा के रूप में भारत को चुना है। इससे पहले सत्ता में आने के तत्काल बाद सिरिसेना ने अपने विदेश मंत्री को भारत भेजा था। सोमवार को सिरिसेना की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता होगी, जिसमें दोनों नेता संबंधों को आगे ले जाने की कोशिश करेंगे। दोनों देशों के बीच मुख्य तीन मुद्दों पर विवाद है। पहला, तमिलों की समस्या, खासकर गृहयुद्ध के बाद से। दूसरा, पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के कार्यकाल में श्रीलंका का चीन के करीब आना। और तीसरा, श्रीलंकाई नौसेना द्वारा भारतीय मछुआरों की गरफ्तारी। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि वार्ता के दौरान इन विवादों का कोई सार्थक हल निकलेगा। वहीं द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने और एक दूसरे देशों में निवेश करने के लिए भी कई अहम समझौते होंगे। पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के शासनकाल में श्रीलंका और भारत का कूटनीतिक रिश्ता तनावपूर्ण हो गया था। उस दौरान श्रीलंका की चीन से नजदीकियां बढ़ गई थीं, जिस पर भारत कई बार अपनी नाराजगी जाहिर कर चुका था। उनके शासन काल में भारत को बिना सूचित किए ही श्रीलंका चीन को अपनी समुद्री सीमा का इस्तेमाल करने की अनुमति देता रहा। वहीं राजपक्षे ने तमिलों के नरसंहार और उनके पुनर्वास मामले में भारत की चिंता को कभी तरजीह नहीं दी। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के साथ-साथ पश्चिमी देशों के सुझावों की भी अनदेखी की। उनके कार्यकाल में र्शीलंका की चीन व पाकिस्तान से दोस्ती बढ़ी, जो कि भारत के लिए चिंता की बात थी। हालांकि जनवरी में हुए चुनाव में सिरिसेना ने महिंदा राजपक्षे के दस साल के शासन का अंत कर दिया था। आज र्शीलंका भी कई समस्याओं से जूझ रहा है। वह सिंहली बहुसंख्यकों और तमिल अल्पसंख्यकों के बीच विभाजन से जूझ रहा है। वहां के युवाओं के बीच विकास, महंगाई, रोजगार बड़ा मुद्दा बना हुआ है। इसके अलावा पश्चिमी देश जहां र्शीलंका में हुए मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन से नाराज हैं तो भारत तमिल हितों की रक्षा न होने से चिंतित है। माना जा रहा है कि भारत विरोधी खासतौर पर तमिल विरोधी छवि नहीं होने के कारण सिरिसेना बातचीत के माध्यम से भारत के साथ सभी विवादित मुद्दों को सुलझाने पर ध्यान देंगे। सिरिसेना ने सत्ता में आने बाद कहा था कि वे भारत के साथ रिश्तों में आए असंतुलन को दूर करेंगे। इसलिए भी यह यात्रा अहम है, क्योंकि उन्हें भारत सर्मथक माना जाता है। भारत आज कई क्षेत्रों में श्रीलंका का सहयोग कर रहा है। भारत वहां विकास की कई योजनाओं जैसे भवन व अस्पताल निर्माण से लेकर रेल नेटवर्क दुरुस्त करने में लगा है। ऐसे में उम्मीद है कि सिरिसेना का दौरा श्रीलंका को चीन के नजदीक जाने से रोकने के अलावा तमिल मुद्दे का हल निकालने में मददगार साबित होगा। यदि ऐसा होता है तो दोनों देशों के बीच आई कड़वाहट दूर होगी।
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