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बजट से पूर्व किसानों को फसल बीमा की सौगात

देश के कई हिस्सों में किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं, तो हर वर्ष लाखों लोग खेती छोड़ रहे हैं।

बजट से पूर्व किसानों को फसल बीमा की सौगात
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किसानों को राहत पहुंचाने और कृषि क्षेत्र की दशा सुधारने की दिशा में राष्ट्रीय फसल बीमा योजना बड़ी भूमिका निभा सकती है। आम बजट से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को लांच कर किसानों को बड़ी सौगात दी है। सभी जानते हैं कि इस समय कृषि क्षेत्र की दशा बहुत अच्छी नहीं है, देश के कई हिस्सों में किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं, तो हर वर्ष लाखों लोग खेती छोड़ रहे हैं। कृषि उपज से लेकर उपभोक्ता के बीच सप्लाई चेन सुनियोजित नहीं है, इसमें कई लूपहोल्स हैं, जिसके चलते किसानों को अपनी उपज का सही दाम नहीं मिल पाता है, जबकि बिचौलिये अधिक मुनाफा कमाते हैं। सरकार को यह पता है, लेकिन कृषि विपणन व्यवस्था में आमूलचूल सुधार राजनीति में फंस कर रह जाता है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर अगर चार फीसदी या उससे अधिक हो तो भारत का जीडीपी ग्रोथ दहाई अंक में पहुंच सकता है। अभी कृषि वृद्धि दर दो फीसदी से भी कम है। कृषि क्षेत्र में वृद्धि तभी संभव है, जब खेती लाभदायक पेशा बने। लेकिन दुर्भाग्य से खेती नुकसानदायक साबित हो रही है। इसके कई कारण हैं। सिंचाई के लिए अभी भी वर्षा पर निर्भरता है, उद्योग की तरह कृषि के लिए आसान पूंजी उपलब्ध नहीं है। सस्ती लागत के साथ अधिक पैदावार के लिए कृषि शोध में सरकारी निवेश कम है, कृषि को सब्सिडी समेत अन्य पूंजीगत व मार्केटिंग संबंधी सरकारी सुरक्षा बहुत कम है। बीज और खाद की उच्च लागत व समय पर उपलब्धता की कमी खेती को और महंगा बना देती है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फसल बीमा योजना लांच कर खेती के जोखिम को कम करने की बड़ी कोशिश की है। लांचिंग के दौरान पीएम ने एक बड़ी बात कही। वह यह कि केवल 20 फीसदी किसान ही फसल बीमा योजना का लाभ रहे हैं, बाकी 80 फीसदी को इस योजना पर भरोसा ही नहीं है, लेकिन मैं उन्हें विश्वास दिलाना चाहता हूं कि इससे किसानों का फायदा है, नुकसान नहीं। इस बीमा योजना की खासियत है कि इसमें किसानों के अंशदान को काफी कम रखा गया है। उसे खरीफ की फसल के लिए 2 फीसदी और रबी की फसल के लिए 1.5 फीसदी प्रीमियम देना होगा। बागवानी के लिए प्रीमियम 5 फीसदी होगा। बाकी प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकारें आपस में आधा-आधा बांटकर भरेंगी। इसमें पिछली योजना से प्रीमियम पर लगाई गई सीमा को हटाया गया है। अभी तक क्लेम मिलने में बहुत देरी होती थी, लेकिन अब क्लेम का 25 फीसदी तुरंत किसान के खाते में जमा हो जाएगा। बीमा क्लेम के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होगा। गांव-गांव एजेंट नियुक्त किए जाएंगे, जिनसे किसान बीमा करा सकेंगे। प्राकृतिक आपदा की वजह से फसल नष्ट होने पर किसानों के नुकसान की भरपाई होगी। एक किसान के भी खेत को हानि होगी तो बीमे की रकम मिलेगी। कटाई के बाद अगर खेत में पड़े फसल के ढेर को बारिश से नुकसान हुआ तो भी बीमा का फायदा मिलेगा। बारिश नहीं होने से किसान ने यदि बुआई नहीं की है तो भी उसे इसका फायदा मिलेगा। सरकार 14 अप्रैल को डा. अंबेडकर जयंती पर नेशनल एग्रीकल्चर ऑनलाइन मार्केट लॉन्च करेगी। इसके जरिए किसान देश की किसी भी मंडी में फसल बेच सकेगा। सरकार प्रधानमंत्री सिंचाई योजना लाने की भी तैयारी कर रही है। इससे लग रहा है कि सरकार किसानों व कृषि की दशा सुधारने के प्रति सचेत है, लेकिन ध्यान रखना होगा कि योजनाएं भ्रष्टाचार और लालफीताशाही की भेंट न चढ़ जाएं
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