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शहरीकरण को दिशा देगी स्मार्ट सिटी योजना

ग्रामीण इलाकों से लोगों के लगातार होते पलायन को देखते हुए देश में नए शहरों की दरकार भी है।

शहरीकरण को दिशा देगी स्मार्ट सिटी योजना
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में स्मार्ट सिटी योजना को मंजूरी मिलने के बाद इस पर तजी से काम शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। आम बजट में भी इसके लिए 7060 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की गई है। हालांकि भारत की स्मार्ट सिटी योजना अभी शुरुआती दौर में है। ऐसे में यह तभी सफल हो पाएगी जब केंद्र व राज्य सरकारों के साथ शहरी प्रशासन भी मिलजुल कर समन्वित प्रयास करेंगे। स्मार्ट सिटी को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसके तहत देश में ऐसे सौ शहरों की कल्पना की गई है जिसमें 24 घंटे आवश्यक सेवाएं नागरिकों को उपलब्ध हों और सेवाओं की तकनीकी से निगरानी की जाए। इसके अलावा स्मार्ट सिटी में वाई-फाई जोन और मनोरंजन के स्थलों समेत हाई क्वॉलिटी का सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराना भी सरकार की योजना में शामिल है।
इन शहरों की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह होगी कि सभी सूचनाओं तक नागरिकों की पहुंच होगी। आज भारत में तेजी से शहरीकरण हो रहा है। 2001 में जहां देश की कुल 27.8 फीसदी आबादी शहरों में रहती थी। वहीं 2011 में यह आंकड़ा बढ़कर 31 फीसदी हो गया। अनुमान है कि साल 2040 तक भारत सबसे बड़ी शहरी आबादी वाला देश होगा। इन सबके बावजूद यह भी उतना ही सत्य है कि मौजूदा भारतीय शहरें हर तरह से बदहाल हैं। सुरक्षा के कई मानकों पर भी हमारे शहर कहीं नहीं टिकते हैं। यहां जीवन-यापन के लिए जरूरी सुविधाओं का नितांत अभाव है।
देश में विश्वस्तरीय शहरों की संख्या उंगली पर गिनी जा सकती है। विशेषज्ञों का मत है कि देश की शहरी आबादी में बीते चार दशकों में जो वृद्धि हुई है, उससे कहीं ज्यादा अगले दो दशक में हो सकती है। शहरों पर आबादी का बोझ बढ़ने से शहरी व्यवस्था चरमरा-सी गई है। लिहाजा इनके आसपास नए शहर बसाना वक्त की मांग भी है। पिछले दो-तीन दशकों में देश में शहरीकरण की प्रक्रिया बेहद असंतुलित और दिशाहीन ढंग से आगे बढ़ी है। शहरों को नियोजित रूप से बसाने और बढ़ाने का काम नहीं हुआ है। वे स्वयं बसते और बढ़ते गए हैं। यही वजह है कि भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं में बड़े पैमाने पर जानमाल की क्षति हो रही है। स्मार्ट सिटी योजना के साकार होने से पुराने शहरों से आबादी का बोझ कम करने में मदद मिलेगी। इससे आने वाले दिनों में शहरीकरण को एक नई दिशा मिलेगी।
ग्रामीण इलाकों से लोगों के लगातार होते पलायन को देखते हुए देश में नए शहरों की दरकार भी है। पर हम ध्यान रखें कि शहर का अर्थ मात्र एक रहने का स्थान भर नहीं होता है। एक संपूर्ण शहर का मतलब है जहां लोगों को केवल एक छत ही नहीं बल्कि रोजगार, शिक्षा, सांस्कृतिक गतिविधि और मनोरंजन के साधन भी उपलब्ध हों। इसके साथ ही स्मार्ट सिटी में समाज के हर वर्ग अमीर-गरीब के लिए जगह होनी चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि संपन्न वर्ग को सभी सुविधा मिले और गरीब वर्ग हाशिए पर रहने को मजबूर हो जाए। जब सौ स्मार्ट शहरों की योजना साकार होने की ओर बढ़ रही है तब उम्मीद की जानी चाहिए कि इनकी बनावट भी आदर्श शहर की कसौटी पर खरा उतरेगा।
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