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देश के सामने कालाधन का सच आने की उम्मीद

फिक्की के एक अनुमान के तहत लगभग 45 लाख करोड़ रुपये के करीब ब्लैकमनी है।

देश के सामने कालाधन का सच आने की उम्मीद
नई दिल्ली. एक नई सरकार से अपेक्षा रहती है कि वह शुरुआती दिनों में ही अपने कामकाज की दिशा स्पष्ट कर दे। भारतीय जनता पार्टी की अगुआई वाली केंद्र सरकार ने मंगलवार को अपने कैबिनेट की पहली बैठक में ही विदेशों में जमा कालेधन की जांच को लेकर विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर यह दिखाने की कोशिश की हैकि वह अपनी कथनी करनी में अंतर नहीं होने देगी। चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कालेधन का मुद्दा बार-बार उठाया था।
भाजपा ने अपने घोषणापत्र में कालेधन को वापस लाने की बात कही है। कहा जाना चाहिए सरकार का यह सकारात्मक कदम है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच और निगरानी के लिए एसआईटी के गठन का आदेश पूर्व की यूपीए सरकार को ही दे रखा था परंतु पूर्वसरकार इस पर बहुत मंद गति से आगे बढ़ रही थी। एक प्रकार से यह देश की नई सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
जांच दल यह पता लगाएगा कि किन-किन देशों में कितनी-कितनी मात्रा में भारतीयों का कालाधान है और वह किसके नियंत्रण में है। हालांकि यह काम आसान नहीं है। इसमें काफी पेचीदगियां भी हैं, जिनसे एसआईटी को पार पाना होगा। कालाधन उसे कहते हैं, जो अवैध रूप से कमाई गई होती हैऔर जिस पर सरकार को कर नहीं चुकाया जाता है। कालाधन लंबे समय से देश में एक बड़ा मुद्दा रहा है। कई संस्थाओं ने अलग-अलग स्रोतों से विदेशों में जमा कालेधन का अनुमान लगाया है।
भाजपा ने विपक्ष में रहते हुए 2011 में अपनी एक रिपोर्ट में विदेशों में जमा कालेधन के 500 अरब डॉलर और 1.4 खरब डॉलर के बीच होने का अनुमान जाहिर किया था। बाबा रामदेव ने पूरे देश में इसके लिए एक अभियान चला रखा है। फिक्की के एक अनुमान के तहत यह 45 लाख करोड़ रुपये के करीब है। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री अरुण कुमार कहते रहे हैं कि विदेशों में जमा कालाधन देश के अंदर छिपे कालेधन की तुलना में 20 फीसदी ही है। वहीं ग्लोबल फाइनेंस इंटीग्रिटी की रिपोर्ट के अनुसार भारत से केवल 2010 में ही 85 अरब रुपये कालेधन के रूप में बाहर गये थे। जबकि आजादी के बाद से अब तक करीब 25 हजार अरब रुपये कालेधन के रूप में बाहर जाने का अनुमान है।
यद्यपि इस बारे में कोई अधिकृत आंकड़ा नहीं है, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि देश में कालेधन की एक समानांतर अर्थव्यवस्था चल रही है, जिसका आकार जीडीपी के करीब 50 प्रतिशत है। भारतीय अर्थव्यवस्था को झटका देने में कालाधन का अहम योगदान है। यदि ये पैसा देश वापस आ जाए तो कई समस्याएं समाप्त हो जाएंगी। हाल के दिनों में ऐसी खबरें भी आयी हैं कि कालाधन जमा करने वालों ने अपना पैसा विदेशों से निकालना आरंभ कर दिया है। बहरहाल, अब एसआईटी का गठन हुआ हैतब उसकी जांच से सब कुछ साफ हो जाएगा। आधिकारिक रूप से देश को पता चल जाएगा कि आखिरकार कितना कालाधन विदेशों में छिपा है और वह किसका है। वापसी की प्रक्रिया उसके बाद शुरू हो सकेगी। लिहाजा अभी लंबी यात्रा तय करनी है, परंतु सरकार ने इसे प्राथमिकता सूची में रखा है तो किसी सकारात्मक नतीजे की उम्मीद कर सकते हैं।
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