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गलत कारणों से फिर चर्चा में न्यायपालिका

मध्य प्रदेश की एक महिला जज ने राज्य हाईकोर्ट के जज एसके गंगेले पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है।

गलत कारणों से फिर चर्चा में न्यायपालिका
उच्च न्यायपालिका एक बार फिर गलत कारणों से चर्चा में है। इस बार मध्य प्रदेश की एक महिला जज ने राज्य हाईकोर्ट के जज एसके गंगेले पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश आरएम लोढ़ा से इसकी लिखित में शिकायत की है। महिला जज का आरोप हैकि जस्टिस गंगेले उन्हें बार-बार अपने घर पर अकेले बुलाते थे और आपत्तिजनक कमेंट करते थे। अनैतिक बातों को नहीं मानने पर गंगेले ने उन्हें प्रताड़ित किया और ग्वालियर से सीधी तबादला कर दिया गया। लिहाजा उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। महिला जज 15 जुलाई को इस्तीफा दे चुकी हैं। वहीं जस्टिस गंगेले ने इस आरोप को बेबुनियाद बताया है और मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर किसी भी तरह की जांच का सामना करने की बात कही है। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि आरोप साबित हो जाए तो वे फांसी पर चढ़ने को तैयार हैं। मुख्य न्यायाधीश ने इस मामले को बेहद गंभीर माना है। हैरानी की बात यह भी हैकि वह पीड़ित महिला जज जिले की विशाखा कमेटी की अध्यक्ष भी थीं। यह कमेटी कार्य स्थल पर यौन प्रताड़ना के मामलों की जांच करती है। पिछले छह महीने में किसी जज पर यौन शोषण के आरोप लगने का यह तीसरा मामला है। इससे पहले जस्टिस गांगुली और जस्टिस स्वतंत्र कुमार पर भी महिला इंटर्न यौन उत्पीड़न का आरोप लगा चुकी हैं। बहरहाल, इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए, जिससे देश के सामने सच आ सके। और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि न्यायपालिका में इस तरह की गंदगियों का होना ठीक नहीं है। पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह ने ठीक कहा हैकि यदि एक महिला जज ही सुरक्षित नहीं है, तो आम आदमी कानून-व्यवस्था पर क्या भरोसा कर सकता है? न्यायतंत्र में इस तरह के मामले तो और भी अक्षम्य होने चाहिए। देश भर के वंचित लोग अपने अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायपालिका का दरवाजा इस आस में खटखटाते हैं कि वहां से उनको निराशा नहीं मिलेगी बल्कि उन्हें न्याय मिलेगा। परंतु यदि न्याय करने वाले ही इस तरह की मानसिकता से ग्रसित होंगे तो फिर आम आदमी का न्यायपालिका से भरोसा उठना स्वाभाविक है। आज देश में महिलाओं से जुड़े मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हर साल बलात्कार, छेड़छाड़ और हिंसा जैसी घटनाओं की हजारों महिलाएं शिकार हो रही हैं। यौन हिंसा से जुड़े हजारों मामले विभिन्न अदालतों में चल रहे हैं। यदि ऐसी प्रवृत्ति के लोग ऐसे मुकदमों की सुनवाईकरेंगे तो फिर उनसे किसी सकारात्मक, संवदेनशील और तटस्थ दृष्टिकोण की उम्मीद कैसे की जा सकती है। आज न्यायपालिका कई समस्याओं से ग्रस्त है। एक तो उसके पास मुकदमों का अंबार लगा है। उसके पास संसाधन नहीं हैं कि वह पीड़ितों को त्वरित न्याय दिला सके। वहीं न्यायपालिका में भ्रष्टाचार भी एक बड़ी समस्या बनकर उभरा है। इसके बावजूद भी आम लोगों का कानून और इसके रक्षक न्यायपालिका में विश्वास बना हुआ है। इस भरोसे को बनाए रखना न्यायपालिका की जिम्मेदारी है। इसके लिए उसे भ्रष्ट और अनैतिक आचरण वालों को सिस्टम से बाहर करना चाहिए।
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