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आतंकवाद का बढ़ता खतरा चिंताजनक

आतंकी समूहों की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए हमें और चौकन्ना होने की जरूरत है।

आतंकवाद का बढ़ता खतरा चिंताजनक

देश की आईटी राजधानी बेंगलुरु में रविवार देर शाम को हुए बम धमाके के बाद देश की सुरक्षा एजेंसियों की आंख और कान खुल जानी चाहिए! इस विस्फोट के बाद स्थानीय प्रशासन भले ही राहत की सांस ले कि बडे पैमाने पर नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन यह घटना सुरक्षा व्यवस्था में चूक को तो दर्शाती ही है। वह भी ऐसे समय में जब देश-दुनिया में हाल के दिनों में सुरक्षा खामियों की वजह से कई आतंकी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। पेशावर और ऑस्ट्रेलिया के सिडनी की घटना के बाद से भारत में भी आतंकी हमले के आसार बने हुए हैं।

बीते दिनों आईएसआईएस का ट्विटर एकाउंट चलाने वाले आतंकी मेहंदी बिस्वास की गिरफ्तारी के बाद बेंगलुरु पुलिस को धमकी भरे में ई-मेल मिले थे। अभी ज्यादा दिन नहीं बीते हैं जब राजस्थान के करीब 18 मंत्रियों के पास एक धमकी भरा मेल आया था, जिसमें आतंकियों ने देश में धमाका करने की धमकी दी थी। इन घटनाओं के बाद समय-समय पर केंद्र सरकार की ओर से राज्यों की पुलिस को हाई-अलर्ट भेजे भी जाते रहे, फिर भी धमाका हो गया।

हालांकि इस हमले की किसी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली है, परंतु गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इसे आतंकी हमला करार दिया है। इस हमले के लिए कम तीव्रता वाले आईईडी विस्फोटक का इस्तेमाल हुआ है। यही वजह है कि हताहतों की संख्या नहीं बढ़ी। देश में अब तक हुए विस्फोटों के ट्रेंड देखते हुए माना जा रहा है कि इसमें सिमी या इंडियन मुजाहिदीन का हाथ हो सकता है। अब पूरी सच्चाई जांच के बाद ही सामने आ पाएगी। हाल के दिनों में कई ऐसी खबरें आई हैं जिससे पता चलता है कि आतंकियों की नजर भारत पर है।

बीते दिनों आतंकी संगठन अलकायदा का एक वीडियो सामने आया था जिसमें भारत में भी आतंकी गतिविधियों को बढ़ाने का जिक्र किया गया था। वहीं देश के कई पढ़ेलिखे युवा जिस तरह से इन आतंकी संगठनों की तरफ आकर्षित हो रहे हैं वह भी चिंता की बात है। गत दिनों मुंबईके आरिफ मजीद और मेहंदी बिस्वास की गिरफ्तारी इस बात के संकेत हैं। हालांकि देश में मुंबई हमले के बाद से सुरक्षा व्यवस्था को कई स्तरों पर मजबूत बनाया गया है जिससे बडे आतंकी हमलों पर एक हद तक रोक लगाने में सफलता मिली है। खुफिया तंत्र की सक्रियता से भी हाल के दिनों में कई बड़े आतंकियों की गिरफ्तारी संभव हुई है, जिससे उनकी योजनाओं का समय रहते पता लगाने में सुरक्षा बल कामयाब हुए हैं, लेकिन इतने से संतुष्ट नहीं हो जाना चाहिए।

आतंकी समूहों की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए हमें और चौकन्ना होने की जरूरत है। वैसे भी नए साल के आगमन और 26 जनवरी के दौरान आतंकी हमले की आशंका बढ़ जाती है। हमें सीमाओं की निगरानी बढ़ाने के साथ ही आतंरिक सुरक्षा व खुफिया तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत है। पुलिस को भी ‘स्मार्ट’ बनाना होगा। ऐसे समय में आम आदमी की भी भूमिका बढ़ जाती हैकि वे अपने आसपास किसी भी तरह की असामान्य हरकतों को नजरअंदाज नहीं करें, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों को उसकी खबर दें। अतिरिक्त सजगता और एकजुटता से ही आतंकी हमले को रोका जा सकता है।

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