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महिला खिलाड़ी बढ़ा रहीं हैं भारत का गौरव

भारत में टेनिस को नई ऊंचाई देने वाली सानिया मिर्जा ने स्विट्जरलैंड की अपनी जोड़ीदार मार्टिना हिंगिस के साथ मिलकर इतिहास रच दिया है।

महिला खिलाड़ी बढ़ा रहीं हैं भारत का गौरव
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भारत में टेनिस को नई ऊंचाई देने वाली सानिया मिर्जा ने स्विट्जरलैंड की अपनी जोड़ीदार मार्टिना हिंगिस के साथ मिलकर इतिहास रच दिया है। वे विंबलडन में महिलाओं का युगल खिताब जीतने वाली देश की पहली खिलाड़ी बन गई हैं। पेशेवर बनने के बारह साल बाद उन्होंने पहला महिला युगल ग्रैंडस्लैम खिताब जीता है। इससे पहले सानिया तीन मिर्शित युगल 2009 में ऑस्ट्रेलियन ओपन, 2012 में फ्रेंच ओपन और 2014 में यूएस ओपन के खिताब भी अपने नाम कर चुकी हैं। जाहिर है, विंबलडन में जो कारनामा कोई भारतीय पुरुष खिलाड़ी नहीं कर पाया वह सानिया ने कर दिखाया है। निश्चित रूप से यह देश के लिए गौरव की बात है।पिछले कुछ सालों से उन्होंने खासकर युगल प्रतिस्पर्धाओं में अच्छा प्रदर्शन किया है। जिसकी बदौलत वे महिलाओं की युगल रैंकिंग में दुनिया की नंबर एक महिला खिलाड़ी बन चुकी हैं। सानिया मिर्जा में टेनिस के प्रति खास जुनून ही उन्हें औरों से अलग करता है।

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निजाम क्लब हैदराबाद में सानिया ने छह साल की उम्र से टेनिस खेलना शुरू किया था। महेश भूपति के पिता और भारत के सफल टेनिस खिलाड़ी सीके भूपति से सानिया ने अपनी शुरुआती कोचिंग ली। तब उनके पिता के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह उनको प्रोफेशनल ट्रेनिंग करवा सकें। इसके लिए उन्होंने कुछ बड़े व्यापारिक समुदायों से स्पांसरशिप ली। सानिया को शीर्ष की ओर ले जाने में उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि का महत्वपूर्ण योगदान है। बेहतर खेल के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार और पद्मर्शी सम्मान दिया गया है। वे यह सम्मान पाने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी हैं। वर्ष 2005 में प्रतिष्ठित टाइम पत्रिका द्वारा सानिया को एशिया के 50 नायकों में नामित किया गया था। हालांकि व्यक्तिगत जीवन में सानिया का विवादों से भी गहरा नाता रहा है, लेकिन उन्होंने इसकी परवाह किए बगैर खेल पर ध्यान केंद्रित रखा और कई अंतरराष्ट्रीय खिताब अपने नाम कर चुकी हैं। उधर बैडमिंटन के क्षेत्र में साइना नेहवाल देश का नाम रोशन कर रही हैं। वे भी दुनिया की नंबर वन महिला बैडमिंटन खिलाड़ी बनने का कारनामा कर चुकी हैं। महिला हॉकी टीम भी अपने शानदार खेल की बदौलत तीन दशक बाद फिर से ओलंपिक का टिकट पाने के करीब पहुंच गई है।

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हाल ही में महिला क्रिकेट टीम भी न्यूजीलैंड में मेजबान के खिलाफ वनडे श्रृंखला जीतने में सफल रही। इसके साथ ही कुश्ती में गीता और बबीता, मुक्केबाजी में मैरीकॉम, तीरंदाजी में दीपिका और चक्काफेंक में सीमा पूनिया सहित कई महिला खिलाड़ी अपने उम्दा प्रदर्शनों से आज देश का चेहरा बन गई हैं। ये सभी जिस मुकाम पर पहुंची हैं उसमें उनकी अथक मेहनत और एकाग्रता का अहम योगदान है। हालांकि आम तौर पर आम जनता को किसी खिलाड़ी की सफलता ही ज्यादा दिखाई देती है, लेकिन उसके पीछे उसकी कितनी मेहनत, त्याग और संघर्ष छिपा होता है, वह नहीं दिखता है। इनकी उपलब्धियों से समाज महिलाओं के प्रति अपना नजरिया बदलने को मजबूर हुआ है। आज देश की लड़कियों की एक पूरी पीढ़ी इनसे प्रेरणा ले रही है। वहीं भारत के लिए भी ये खुशी के पल उपलब्ध करा रही हैं। जाहिर है, खेलों में भारतीय महिलाओं का शिखर पर पहुंचना देश के लिए गौरव की बात है।

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