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चिंतन: सानिया की कामयाबी आधी आबादी के लिए मिसाल

सानिया हिंगिस की जोड़ी ने 2015 में नौ खिताब जीते।

चिंतन: सानिया की कामयाबी आधी आबादी के लिए मिसाल
भारत की टेनिस स्टार सानिया मिर्जा और स्विट्जरलैंड की मार्टिना हिंगिस की जोड़ी ने लगातार 29वां महिला युगल मैच जीतकर 22 साल पुराना विश्व रिकार्ड तोड़ दिया है। दुनिया की नंबर एक टेनिस जोड़ी ने पुएटरे रिको की जिजि फर्नांडिस और बेलारूस की नताशा ज्वेरेवा की जोड़ी का रिकार्ड तोड़ा है, जिन्होंने 1994 में लगातार 28 मैच जीते थे। अब इस जोड़ी के सामने 1990 में हेलेना सुकोवा-याना नोवोत्ना युगल के लगातार 44 जीत के वर्ल्ड रिकॉर्ड को तोड़ने की चुनौती है। वल्र्ड नंबर वन महिला डबल्स प्लेयर सानिया मिर्जा और नंबर टू मार्टिना हिंगिस की इस जोड़ी ने डब्ल्यूटीए सिडनी इंटरनेशनल के महिला युगल फाइनल भी जीत ली। यह उनकी लगातार 30वीं जीत है। यह उनका इस साल का दूसरा और लगातार 11वां खिताब है। दोनों ने पिछले हफ्ते ब्रिसबेन इंटरनेशनल में इस साल का पहला टूर्नामेंट जीता था। इस जोड़ी ने 2015 में नौ खिताब जीते, जिनमें दो ग्रैंड स्लैम विंबलडन व यूएस ओपन और साल का आखिरी डब्ल्यूटीए फाइनल शामिल हैं। इसके अलावा इसने सिडनी इंटरनेशनल, इंडियन वेल्स मास्टर्स, मियामी ओपन, फैमिली सर्कल कप, ग्वांग्झू इंटरनेशनल, वुहान ओपन, चाइना ओपन में भी जीत हासिल की। किसी भी शादी-शुदा महिला के लिए यह शानदार उपलब्धि है। खास कर खेल की दुनिया में, जहां किसी भी महिला खिलाड़ी के विवाह के बाद मान लिया जाता है कि उसका करियर अब खत्म हो गया है। लेकिन सानिया और हिंगिस ने न केवल इस मान्यता को झुठला दिया है, बल्कि आधी आबादी के लिए प्रेरणा के ज्योति पूंज बनकर उभरी हैं। हिंगिस तो एकल खेल छोड़ने के आठ साल बाद वापसी की। 2015 में राजीव गांधी खेल रत्न से नवाजी गईं सानिया व हिंगिस की कामयाबी हर उस महिला के लिए मिसाल है, जो जीवन में अपना मुकाम हासिल करना चाहती है। सानिया ने भूपति के साथ 2009 में ऑस्ट्रेलिया ओपन और 2012 में फ्रेंच ओपन का मिक्स्ड डबल्स का खिताब भी जीता था। मात्र छह साल की उम्र से टेनिस खेलने वाली सानिया की खास बात है कि वह एक सामान्य मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखती हैं,जहां की महिला के लिए टेनिस जैसे ग्लैमर खेल में करियर बनाना आसान नहीं है। हैदराबाद की सानिया ने 2003 में एफ्रो-एशियन गेम्स में चार मेडल, एशियन गेम्स 2002, 2006, 2010, 2014 में मेडल और कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 में भी मेडल जीते हैं। 12 अप्रैल 2010 में उन्होंने पाकिस्तान के क्रिकेटर सोहेब मलिक से विवाह किया, तो अटकलें थीं कि उनका ससुराल पक्ष उन्हें टेनिस जारी रखने की इजाजत नहीं देगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सोहेब ने पूरा सहयोग किया। जिसका नतीजा आज सामने है, सानिया सफलता की बुलिंदियों पर हैं। चेन्नई की एमजीआर इंस्टीट्यूट ने सानिया को डॉक्टरेट की मानद उपाधि से नवाजा है। हैदराबाद की ही शटलर साइना नेहवाल बैडमिंटन में सफलता की परचम लहरा रही हैं। सानिया-हिंगिस व साइना नेहवाल की सफलता खेल की दुनिया में आने वाली महिलाओं को प्रोत्साहित करती रहेगी।
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