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भारत-अमेरिका संबंधों में नए युग की शुरुआत

सैन्य शक्ति के क्षेत्र में हम निरंतर मजबूत हो रहे हैं। परमाणु शक्ति हम हैं ही। इसके अलावा अंतरिक्ष, आईटी और संचार सेवा के क्षेत्रों में हम सफलता के झंडे गाड़ चुके हैं।

भारत-अमेरिका संबंधों में नए युग की शुरुआत
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भारत आज अपना 65वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। आज ही के दिन 1950 में देश ने अपना संविधान लागू किया था। भारत ने अपने संविधान की गरिमा को बरकरार रखा है। संविधान वह लिखित दस्तावेज होता है जिसके आधार पर किसी देश की शासन व्यवस्था संचालित की जाती है। गणतंत्र की शक्ति संविधान में निहित होती है। भारतीय संविधान की विशेषता यह है कि इससे हर देशवासी अपना व्यक्तिगत जुड़ाव महसूस करता है।
यही वजह है कि आज भारत ने दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने का गौरव प्राप्त किया है। साथ ही यह लगातार फल फूल भी रहा है। इसी का नतीजा है कि पूरा विश्व आज भारत को आदर की नजरों से देख रहा है। गणतंत्र दिवस समारोह में पहली बार किसी अमेरिकी राष्टÑपति के मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करना भारतीय गणतंत्र की बुलंद होती आवाज को ही दर्शा रहा है। यही वजह है कि अमेरिकी राष्टÑपति बराक ओबामा के इस भारत दौरे को ऐतिहासिक करार दिया जा रहा है। अमेरिका दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश और पुराना लोकतंत्र है।
यात्रा के पहले दिन अमेरिकी राष्टÑपति बराक ओबामा और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई शिखर वार्ता की सफलता को देखते हुए कहा जा सकता है कि भारत-अमेरिका के द्विपक्षीय रिश्तों में नए युग की शुरुआत हुई है। दोनों देशों के बीच कारोबार, रक्षा, सामाजिक सुरक्षा, पर्यावरण और आतंकवाद के मुद्दे पर बातें हुई हैं। साथ ही परमाणु डील पर भी दोनों देश आगे बढ़ने के संकेत दिए हैं। यह भारतीय गणतंत्र की बढ़ रही ताकत ही है कि आज हर देश इससे जुड़ना चाहते हैं।
तीन दशक बाद देश में पहली बार नरेंद्र मोदी की अगुआई में केंद्र में पूर्ण बहुमत वाली सरकार आई है। उसके बाद से ही चीन, रूस, जापान, आॅस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और यूरोपीय देशों द्वारा भारत को देखने के नजरिए में फर्क आया है। आज पाकिस्तान को छोड़ दें तो बाकी पड़ोसी देशों का भी रुख बदल हुआ है। यह भारतीय गणतंत्र के नेतृत्व व कूटनीति की सफलता है।
आज भारतीय अर्थव्यवस्था भी पटरी पर लौट आई है। नई सरकार के तेज फैसले के कारण आने वाले दिनों में इसमें और तेजी के आसार बने हैं। हाल ही विश्व बैंक और आईएमएफ ने अपनी-अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आने वाले दो वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर चीन से ज्यादा हो जाएगी।
जाहिर है, भारत एक आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है। खरीद शक्ति के आधार पर हम दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था हैं। वहीं सैन्य शक्ति के क्षेत्र में हम निरंतर मजबूत हो रहे हैं। परमाणु शक्ति हम हैं ही। इसके अलावा अंतरिक्ष, आईटी और संचार सेवा के क्षेत्रों में हम सफलता के झंडे गाड़ चुके हैं।
हालांकि इसके अलावा अभी भी बहुत कुछ करने की जरूरत है। क्योंकि इन सफलताओं के साथ कुछ असफलताएं जैसे- गरीबी, भुखमरी, अशिक्षा, महिला सुरक्षा, स्वच्छ पेयजल, नक्सलवाद आदि हैं, जिनसे पार पाना बहुत जरूरी है। इन्हें दूर किए बिना भारत सफल गणतंत्र नहीं कहला सकता है। जाहिर है, गणतंत्र की शक्ति से ही इन समस्याओं का निदान किया जा सकता है। लिहाजा, हमें अपने लोकतंत्र को अक्षुण्ण बनाए रखना होगा।

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