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रेपो में कटौती से सस्ते कर्ज की उम्मीदें बढ़ीं

सीआरआर पहले से ही कम रहने से भी बैंक के हाथ में अधिक नकदी है ही।

रेपो में कटौती से सस्ते कर्ज की उम्मीदें बढ़ीं
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रिजर्व बैंक ने आखिरकार उद्योग जगत और सरकार की बात सुन ली। केंद्रीय बैंक ने अपनी मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत ब्याज दरों-रेपो और रिवर्स रेपो में चौथाई फीसदी की कटौती कर दी। इस साल रेपो रेट में यह तीसरी कटौती है। इससे पहले 15 जनवरी और चार मार्च को चौथाई-चौथाई फीसदी की कटौती की गई थी। वित्त वर्ष 2015-16 की यह पहली कटौती है। कोर सेक्टर और विनिर्माण क्षेत्र में लगातार जारी सुस्ती और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में गिरावट से परेशान उद्योग व सरकार रिजर्व बैंक से लगातार ब्याज दरों में कटौती की मांग कर रहे थे।
मेक इन इंडिया अभियान को भी गति देने के लिए ब्याज दरों में कटौती आवश्यक थी। हालांकि उम्मीद के अनुरूप यह कटौती कम है। 0.50 बेस की कटौती की जाती तो सरकार और उद्योग जगत दोनों के लिए मुफीद होती। क्योंकि इस कटौती के बावजूद रेपो रेट 7.25 फीसदी होगा, पहले यह 7.50 फीसदी था। यह दर अभी भी ज्यादा है। चूंकि रेपो दर के आधार पर ही कारोबारी बैंक अपनी ब्याज दरें तय करते हैं, इसलिए रेपो रेट जितना अधिक होगा बैंकों से कर्ज उतना ही महंगा होगा। इस समय बाजार की जो हालत है, उसमें इसे 6.5 फीसदी या इससे नीचे होना चाहिए। मानसून के कमजोर रहने के अनुमान के बाद निकट भविष्य में रिजर्व बैंक के लिए रेपो दरों में कटौती के अवसर नहीं के बराबर होंगे।
रिजर्व बैंक ने यह संकेत दे भी दिया है। कम वर्षा के चलते सूखे की संभावना बढ़ेगी, जिससे खाद्य महंगाई को पंख लगेंगे। कमजोर मानसून के चलते कंज्यूमर सेक्टर की डिमांड भी प्रभावित होगी। थोक महंगाई दर के शून्य से नीचे आने और औद्योगिक वृद्धि में गिरावट के चलते रेपो दारों में कटौती के अनुमान पहले से ही लगाए जा रहे थे। रिजर्व बैंक ने भी अपनी कटौती के पीछे यही तर्क दिया है। अप्रैल में खुदरा महंगाई दर 4.86 फीसदी के साथ चार महीने में सबसे कम रही। यह आरबीआई के मार्च 2016 तक के 5.8 फीसदी के टारगेट से काफी कम है। थोक महंगाई दर -2.65 फीसदी है। अप्रैल में लगातार छठे महीने थोक महंगाई दर नकारात्मक रही है। अब रेपो रेट घटने से बैंकों के धन की लागत कम होगी, जिससे बैंक होम लोन, आॅटो लोन और उद्योग-धंधे चलाने के लिए कर्ज सस्ता कर सकेंगे।
सीआरआर पहले से ही कम रहने से भी बैंक के हाथ में अधिक नकदी है ही। वैसे एनपीए के चलते बैंकों की लिक्विडिटी पर भारी दबाव है। फिर भी अब बैंकों के लिए ब्याज दरें घटाना आसान होगा। ब्याज में कटौती से रियल एस्टेट और आॅटो सेक्टर में जान आएगी। देखने वाली बात यह होगी कि बैंक कितनी जल्दी इस कटौती का लाभ क्ंज्यूमर तक पहुंचाएंगे। बैंकों ने पिछली बार रेपो में कटौती का लाभ ग्राहकों को देने में कोताही बरती है, शायद इसलिए इस बार रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने बैंकों को सख्त हिदायत दी है कि वह रेपो में कमी का लाभ ग्राहकों को दें। हिदायत का असर हुआ है, तीन बैंकों-स्टेट बैंक, पंजाब एंडसिंध बैंक और इलाहाबाद बैंक ने ब्याज में कटौती का ऐलान कर दिया है। उम्मीद की जानी चाहिए और भी बैंक आरबीआई की इस पहल का ब्याज दरें घटाकर सकारात्मक जवाब देंगे। जिससे ग्रोथ में तेजी आएगी।
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