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अब वाणिज्यिक बैंक सस्ता करें कर्ज

रिर्जव बैंक द्वारा नीतिगत ब्याज दर में कमी किए जाने का वास्तव में अर्थ है कि मुद्रास्फीति काफी नरम हो चुकी है।

अब वाणिज्यिक बैंक सस्ता करें कर्ज
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भारतीय रिर्जव बैंक (आरबीआई) ने बड़ा फैसला लेते हुए नीतिगत ब्याज दरों में पचास बेसिस अंकों की कटौती की है। पिछले करीब तीन साल में यह सबसे बड़ी कटौती है। इससे रेपो दर साढ़े चार साल के न्यूनतम स्तर पर आ गया है। अब रेपो रेट 7.25 फीसदी से घटकर 6.75 फीसदी हो गया है और रिवर्स रेपो रेट 6.25 फीसदी से घटकर 5.75 फीसदी हो गया है। रेपो रेट वह दर है जिस पर वाणिज्यिक बैंक रिर्जव बैंक से फौरी जरूरतों के लिए कैश में उधार लेते हैं। जबकि रिवर्स रेपो रेट इससे उल्टा होता है। रिर्जव बैंक वाणिज्यिक बैंकों को उनके कैश जमा करने की एवज में इस दर पर ब्याज देता है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि रिर्जव बैंक द्वारा नीतिगत ब्याज दर में कमी किए जाने का वास्तव में अर्थ है कि मुद्रास्फीति काफी नरम हो चुकी है और अब यह ठीक-ठाक स्तर पर है।

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रिर्जव बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने भी कहा है कि यह कटौती जमीनी स्तर आए बदलावों के कारण हुई है। वहीं आम जनता और उद्योग जगत ने आशा व्यक्त की है कि आने वाले दिनों में बैंकों से कर्ज सस्ता होगा। इसमें कोई दो राय नहीं कि आरबीआई की ब्याज दर में कटौती से आर्थिक गतिविधियों के सुधार में मदद मिलेगी, लेकिन इसके लिए दर में कटौती का फायदा लोगों तक पहुंचना होगा। इस साल चौथी बार रेपो रेट में कटौती का फायदा आम लोगों को तभी मिलेगा जब विभिन्न बैंक अपने बेसिक ब्याज दरों में कटौती करेंगे। पिछले तीन बार के रेट कट के बाद भी बैंक ने कर्जदारों को उतनी राहत नहीं दी है जितनी रिर्जव बैंक की ओर से उन्हें मिला। इस बात पर सरकार और खुद रघुराम राजन ने कई दफा कहा कि बैंक दर में कमी का फायदा आम लोगों को कर्ज सस्ता कर दें। इस साल पहली कटौती जनवरी में की गई थी। उस समय रिर्जव बैंक ने इसमें चौथाई अंकों की कटौती की थी। उसके बाद दूसरी बार मार्च में 25 अंक की कटौती की गई थी। तीसरी बार जून में भी इतने ही अंकों की कटौती हुई थी, लेकिन बैंकों के ब्याज दर अभी भी 9 से 11 फीसदी के बीच हैं।

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इस बार राजन ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा कि इस रेट कट को दीवाली का बोनस ना समझा जाए। सभी कटौती का लाभ कर्जदारों को दिया जाना चाहिए। हालांकि कुछ बैंकों ने ब्याज दर में कमी का ऐलान कर दिया है, लेकिन यह काफी नहीं दिख रही है। अब गेंद बैंकों के पाले में है। आज देश की अर्थव्यवस्था जिस मुहाने पर खड़ी है, वहां से यह आने वाले दिनों में वैश्विक गतिविधियों का केंद्र बन सकती है, लेकिन इसके लिए यहां भारी निवेश की दरकार है। पहले चीन विश्व अर्थव्यवस्था का अगुआ बना हुआ था, लेकिन वह भी इन दिनों ढलान पर है। इन दिनों दुनिया में भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जो विकास की राह पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया के निवेशकों को भारत आने का न्योता दे रहे हैं। वे भी हमारी तरफ उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा में इसकी झलक भी देखी गई। ऐसे में यदि बैंक भी ब्याज दरों में उचित कटौती करें तो आने वाले दिनों में निवेश में भारी वृद्धि हो सकती। इससे अंतत: भारतीय अर्थव्यवस्था को बूस्ट मिलेगा।

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