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जीवंत लोकतंत्र में जन भागीदारी जरूरी

सरकारें जितनी समाज से जुड़कर चलती हैं, उतनी ज्यादा समाज में बदलाव के लिए काम कर सकती हैं।

जीवंत लोकतंत्र में जन भागीदारी जरूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महीने में एक बार प्रसारित होने वाले मन की बात कार्यक्रम के एक वर्ष हो गए हैं। यह देश की जनता के बीच दिनों दिन लोकप्रिय होता जा रहा है। प्रधानमंत्री ने स्वयं माना है कि यह देश की आम जनता से सवांद स्थापित करने का सबसे बड़ा माध्यम बन गया है। इसमें कोईदो राय नहीं कि हर दिन देश के दूरदराज के इलाके से प्रधानमंत्री के पास हजारों पत्र, ईमेल और अब फोन आने लगे हैं। इनमें लोगों के महत्वपूर्ण सुझाव व शिकायतें होने के साथ-साथ सरकारी विभागों और योजनाओं से संबंधित कई जानकारियां भी होती हैं। यह कहा जा सकता है कि यह कार्यक्रम सरकारी नीतियों को दिशा देने का भी काम कर रहा है क्योंकि बड़े पैमाने पर इससे लोगों के जुड़ने से उन योजनाओं के बारे में देश क्या सोचता है, इसका मोटा-मोटी अंदाजा हो जाता है। इस तरह यह कार्यक्रम जनभागीदारी का एक बड़ा जरिया बनता जा रहा है। उम्मीद है, आने वाले दिनों में इसके सुखद परिणाम देखने को मिलेंगे। सरकारें जितनी समाज से जुड़कर चलती हैं, उतनी ज्यादा समाज में बदलाव के लिए काम कर सकती हैं।

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इसी से राष्ट्र एक सही दिशा में चलते हुआ अपनी सफलता सुनिश्चित करता है। वैसे भी एक सफल लोकतंत्र में जनशक्ति की एकजुटता जरूरी होती है। रास्ता अभी से नजर आने लगा है। देश में बेटियों का मान बढ़ाने के लिए सेल्फी विद डॉटर अभियान से लाखों की संख्या में मां-बाप अपनी बेटियों के साथ जुड़ रहे हैं। हालांकि सिर्फ इसी से देश में लड़कियों की स्थिति नहीं सुधरेगी, लेकिन इससे परिवारों में उनको देखने का नजरिया बदलने की शुरुआत हुई है। देश में खादी स्वदेशी की बड़ी पहचान है, लेकिन आरामदायक होने के बावजूद यह उपेक्षा की शिकार थी। गत वर्ष गांधी जयंती पर प्रधानमंत्री ने देशवासियों का ध्यान इसकी तरफ खींचा। उसका असर यह हुआ है कि पिछले एक साल में खादी की बिक्री दोगुनी हो गई है। गैस सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी छोड़ने की अपील का तो क्रांतिकारी असर हुआ है, अब तक तीस लाख लोगों ने इसे छोड़ दिया है।

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वहीं प्रधानमंत्री ने देश में पर्यटन को ध्यान में रखते हुए अतुल्य भारत अभियान को बढ़ावा देने के लिए लोगों से मनोरम दृश्य साझा करने को कहा था। देश के कोने-कोने से ऐसी-ऐसी तस्वीर लोगों ने भेजी है, शायद भारत सरकार और राज्य सरकारों के पर्यटन विभाग के पास भी उनकी जानकारी नहीं है। यहां स्वच्छता अभियान का भी जिक्र किया जा सकता है। देश में सफाई के प्रति जागरूकता आने के कारण ही एक छोटे बच्चे से लेकर देश की संसद तक इस पर चर्चा करने लगी है। ये उपलब्धियां मोटा खर्च करके या प्रचार-प्रसार करके नहीं हासिल हुई हैं, बल्कि यह जनशक्ति का कमाल है। देश के लोगों ने इसे आगे बढ़ाया है। प्रधानमंत्री ने इसे सकारात्मक ऊर्जा द्वारा देश में चल रही एक मौन क्रांति कहा है। और इसका माध्यम मन की बात कार्यक्रम बना है जिस पर बिहार चुनाव को देखते हुए बीते दिनों विपक्षीदलों ने चुनाव आयोग से रोक लगाने की मांग की थी। जाहिर है, बड़े बदलाव का वाहक बनने वाले ऐसे कार्यक्रमों को राजनीति के चश्मे से नहीं देखना चाहिए।

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