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श्रेष्ठ भारत के सपने को पूरा करने का वादा

राष्ट्रपति, अपने संबोधन से नई सरकार की नीतियों, कार्यक्रमों और दृष्टि से देश को अवगत कराते हैं।

श्रेष्ठ भारत के सपने को पूरा करने का वादा
यह परंपरा है कि जब भी नई लोकसभा चुनी जाती है, राष्ट्रपति उसे संबोधित करते हैं। राष्ट्रपति दरअसल, अपने संबोधन से नई सरकार की नीतियों, कार्यक्रमों और दृष्टि से देश को अवगत कराते हैं। सोमवार के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के अभिभाषण के आधार पर कहा जा सकता हैकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली राजग सरकार ने देश के सामने एक आदर्श भारत बनाने की रूप रेखा रखी है। जिसमें हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक पूरे भारत की तमाम समस्याओं और उनके निदान का जिक्र किया गया है। जिसमें विकास को गति देने, नई स्वास्थ्य योजना बनाने, जनजातियों के लिए वनबंधु योजना बनाने, महिलाओं को सुरक्षा देने, रोजगार दफ्तर को कॅरियर सेंटर में बदलकर युवाओं को रोजगार देने, ऊर्जा समस्या दूर करने, टैक्स के नियम आसान बनाने, हाई स्पीड ट्रेन चलाने, सौ नए शहर बनाने, अल्पसंख्यकों को अवसर देने, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, अलगाववाद, नक्सलवाद को बरदाश्त नहीं करने, महंगाई कम करने, गरीबी-भुखमरी दूर करने, सामाजिक-सांस्कृतिक धरोहरों को संभालने, पर्यटन व ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने, स्वच्छता, पर्यावरण व जल संरक्षण पर जोर देने, कश्मीरी पंडितों की वापसी सुनिश्चित करने, हर राज्य में आईआईटी, आईआईएम और एम्स खालने, शहरों तथा गांवों के बीच की खाई को दूर करने, केंद्र व राज्यों को टीम इंडिया की तरह काम करने, सेना के आधुनिकीकरण, महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण देने, सभी देशों के साथ दोस्ताना संबंध स्थापित करने, तीव्र न्याय सुनिश्चित करने और कृषि को बढ़ावा देने जैसे तमाम कार्यक्रमों को लागू कर एक भारत-र्शेष्ठ भारत बनाने का वादा किया गया है। आज देखा जाए तो देश इन्हीं समस्यों में फंसा हुआ है। पूर्ववर्तीसरकार इनको दूर करने में अक्षम रही थी। अब नई सरकार ने साफ शब्दों में बता दिया हैकि उसके एजेंडे में यही मुद्दे हैं, जिन्हें वह साठ महीनों में पूरा करेगी। उम्मीद की जानी चाहिए कि राष्ट्रपति से जिन बातों को कहलवाया गया है मोदी सरकार उन्हें पूरा करेगी। सरकार अपने लक्ष्यों तक कैसे पहुंचेगी इसका एक खाका मोदी ने पहले ही दस सूत्री एजेंडे में पेश कर दिया है, जिसमें नौकरशाही को चुस्त बनाने सहित सरकारी कामकाज और फैसलों में पारदर्शिता लाने, जीओएम की बजाय मंत्रालयों में बेहतर समन्वय स्थापित करने, जनता के हितों को प्राथमिकता देने, आर्थिक मामलों पर विशेष गौर करने, बुनियादी ढांचे में सुधार करने, सभी नीतियों और कार्यक्रमों को समय-सीमा के भीतर पूरा करने और सरकारी नीतियों में स्थिरता लाने का संकल्प भी लिया गया है। पूर्व में प्रधानमंत्री ने तीन महत्वपूर्ण बातें कही है कि मंत्री गवर्नेंस, डिलीवरी और इम्प्लीमेंटेशन सुनिश्चित करें। यानी सुशासन दें। उन्होंने बार बार कहा है कि मिनीमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस। जनता तक योजनाओं का लाभ पहुंचे और योजनाओं व कार्यक्रमों पर अमल हो। प्रधानमंत्री खुद जितनी तेजी से काम करने के आदी हैं, वैसी की फुर्ती की उम्मीद उनकी मंत्री परिषद से भी है। साफ है कि नई सरकार तेजी से न केवल फैसले ले रही है बल्कि सही दिशा में बढ़ते हुए यह संकेत भी दे रही है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में जो एजेंडा प्रस्तुत किया गया है, उन्हें पूरा करने के प्रति वह प्रतिबद्ध है।
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