Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

चिंतन: विपक्ष को भरोसे में लेने की पीएम की बड़ी पहल

दो चरणों में होने वाले सत्र के पहले चरण में रेल बजट व आम बजट पेश होंगे, उस चर्चा होगी, फिर वे पास होंगे।

चिंतन: विपक्ष को भरोसे में लेने की पीएम की बड़ी पहल
बजट सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्वदलीय बैठक बुलाकर पहली बार नई पहल की है। नहीं तो अब तक किसी भी संसद सत्र से पहले लोकसभा अध्यक्ष की ओर से सर्वदलीय बैठक बुलाई जाती रही है। लेकिन इस बार तेईस फरवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र से पहले पीएम ने सभी दलों की बैठक बुलाकर पुख्ता संदेश दिया है कि सरकार की मंशा विपक्ष को भरोसे में लेकर संसद चलाने की है। पीएम नरेंद्र मोदी पर आरोप लगते रहे हैं कि वे विपक्ष को भरोसे में नहीं लेते हैं और उसके साथ सकारात्मक संवाद नहीं करते हैं, हालांकि यह बात सही नहीं है, क्योंकि गत शीत सत्र के दौरान पीएम खुद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व पीएम मनमोहन सिंह से मिले और उन्होंने सहयोग मांगा। लेकिन कांग्रेस टस से मस नहीं हुई, उसने सहयोग नहीं दिया। जीएसटी बिल पास नहीं हो सका। कांग्रेस के राज्यसभा में अड़ियल रुख के चलते ही पिछले दो सत्र धुल चुके हैं। जनता को करोड़ों रुपये बर्बाद हो गए। लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद भी पता नहीं कांग्रेस को इसकी परवाह भी है कि नहीं? सरकार की लाख कोशिश के बावजूद वह संसद सत्र में अवरोध खड़ा करती रही है। इस मायने में यह सर्वदलीय बैठक अहम है। इसमें पीएम नरेंद्र मोदी से सभी विपक्षी दलों से साफ कहा कि 'सरकार हर मुद्दे पर संसद में' स्वस्थ बहस' चाहती है, 'खुलकर चर्चा' चाहती है। सरकार विपक्षी दलों द्वारा उठाई गई सभी चिंताओं को दूर करेगी, उनके सभी मुद्दों पर प्रतिक्रिया देंगे और उनका निराकरण करेंगे।' विपक्ष के साथ दो घंटे से अधिक समय तक चली इस बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि इस बात को लेकर सभी दलों में आम सहमति थी कि संसद को सुचारू रूप से चलना चाहिए। जदयू अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि संसद में सुचारू रूप से कामकाज होना चाहिए और सभी विषयों पर चर्चा होनी चाहिए। सरकार बेशक नियम के तहत किसी भी मुद्दे पर चर्चा कराने को तैयार हो, कुछ विपक्षी दल भी ऐसा चाहते हों, लेकिन बड़ा सवाल है कि क्या कांग्रेस तैयार है। पिछले सत्रों को देखें तो कांग्रेस की दिलचस्पी येनकेन प्रकारेण हंगामा में रही, संसद को सियासत का अखाड़ा बनाने में रही, उसे ठप करने में रही, स्वस्थ चर्चा में नहीं रही। इस सर्वदलीय बैठक में भी कांग्रेस ने जेएनयू प्रकरण को जिस पुरजोर तरीके से उठाया है और गिरफ्तार जेएनयू छात्र संघ नेता पर देशद्रोह का मामला दर्ज करने के खिलाफ विचार व्यक्त किया है, उससे स्पष्ट लग रहा है कि बजट सत्र में भी वह अपना रंग जरूर दिखाएगी और इस मुद्दे पर संसद में स्वस्थ बहस के बजाय जमकर राजनीति ही करती नजर आएगी। हालांकि सरकार के लिए यह सत्र अहम है। दो चरणों में होने वाले इस सत्र के पहले चरण में रेल बजट व आम बजट पेश होंगे, उस चर्चा होगी, फिर वे पास होंगे। इसके अलावा जीएसटी, लेबर व इकॉनोमिक रिफॉर्म बिल समेत तीन दर्जन के करीब महत्वपूर्ण पेंडिंग विधेयक सरकार के एजेंडे में हैं। पीएम ने जेएनयू देशद्रोह प्रकरण पर आश्वासन भी दिया है कि वे देश के पीएम के तौर पर कोई भी कार्रवाई करेंगे, पार्टी के नेता के तौर पर नहीं। अब बजट सत्र में देखने वाली बात ये होगी कि पीएम की इस बैठक व उसमें दिए उनके आश्वासन का असर कांग्रेस पर पड़ता है कि नहीं? इस बैठक में जिस तरह सभी दलों ने संसद के सुचारू चलने पर सैद्धांतिक सहमति जताई है, वे उस पर भी कायम रहते हैं कि नहीं?
खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलो करें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-
Next Story
Top