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भारतवंशियों को एकजुट करने की मुहिम, महात्मा गांधी की भारत वापसी के सौ साल पूरे

इसी साल महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका से वापसी के सौ साल पूरे हुए हैं।

भारतवंशियों को एकजुट करने की मुहिम, महात्मा गांधी की भारत वापसी के सौ साल पूरे

तेरहवां प्रवासी भारतीय सम्मेलन कई मायनों में महत्वपूर्ण है। पहला, इसी साल महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका से वापसी के सौ साल पूरे हुए हैं। दरअसल, प्रवासी भारतीय दिवस हर साल 9 जनवरी को इसीलिए मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से स्वदेश वापस आये थे। दूसरा, यह पहली बार गांधी की जन्मभूमि गुजरात में मनाया जा रहा है। तीसरा, यह ऐसे समय में मनाया जा रहा है जब देश में बड़े पैमाने पर राजनीतिक बदलाव आया है।

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वर्ष 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने इस आयोजन की शुरुआत की थी। केंद्र सरकार का मकसद इसके जरिए प्रवासी भारतीयों के बीच संपर्क को बढ़ाने के साथ-साथ व्यावसायिक संपर्क को मजबूत करने के प्रयास करना था। इसमें कोईदो राय नहीं कि चीन जैसे कई देशों के विकास में उनके प्रवासियों का अहम योगदान रहा है। देश में भी जिस तरह प्रवासी भारतीय सम्मेलन का आगाज हुआ उससे लगा था कि यह सम्मेलन जल्द ही अपने उद्देश्यों में कामयाब हो जाएगा, परंतु केंद्र में यूपीए सरकार के आने के बाद यह सम्मेलन अपने उद्देश्य से भटकता प्रतीत हुआ। हालांकि 2014 में केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में एनडीए की सत्ता में आने के बाद प्रवासियों को अपनी जड़ों से जुड़ने की यह मुहिम एक बार फिर रंग लाती दिख रही है। जापान, अमेरिका हो या आॅस्ट्रेलिया, प्रवासियों ने नरेंद्र मोदी को हाथों हाथ लिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने उनमें उत्साह पैदा किया है। देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा पैदा किया है। आज प्रवासी भारतीय देश के लिए कुछ करना चाहते हैं। प्रधानमंत्री ने सम्मेलन में अपने संबोधन में कहा भी हैकि प्रवासियों के कारण भारत को एक वैश्विक पहचान मिली है। तथ्य भी इस ओर संकेत करते हैं। प्रवासी भारतीय अपने देश में जितना धन भेजते हैं, वह भारत में कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से भी ज्यादा है।

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आज दुनिया के करीब दो सौ देशों में तीन करोड़ प्रवासी भारतीय रहते हैं। उनके द्वारा 2014 में 71 अरब डॉलर राशि देश में भेजी गई, जबकि 2013 में देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की मात्रा सिर्फ 28 अरब डॉलर ही रही। इस प्रकार प्रवासी भारतीय वतन से दूर रहकर भी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद कर रहे हैं। वहीं ज्ञान अर्जन के लिए भी बड़ी मात्रा में लोग बाहर गए हैं। उन्होंने अच्छा मुकाम हासिल किया है। दुनिया भर में फैले समृद्ध और ज्ञानवान भारतीयों को देश के विकास में शामिल करने की महती जरूरत है, लेकिन इसके लिए पहले उनके अनुकूल वातावरण बनाना होगा। उन्हें विश्वास दिलाना होगा कि यहां उनको निर्बाध अवसर मिलेगा।

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मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद इस दिशा में सक्रियता दिखी है। उन्होंने मेक इन इंडिया, नमामि गंगे, स्वच्छ भारत व डिजिटल इंडिया योजना के जरिये बताया हैकि उनके पास भारत को देने के लिए बहुत कुछ है। इससे एक माहौल बना है। प्रवासी भारतीयों की वतन वापसी की राह में कोई मुश्किल नहीं आए इसके लिए मोदी सरकार ने पीआईओ व ओसीआई स्कीम को एक कर सभी भारतवंशियों को आजीवन वीजा का अधिकार दे दिया है। इससे प्रवासी भारतीयों के मन में निश्चित रूप से विश्वास गहरा होगा और देश से जुड़ने का रास्ता खुलेगा।

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